एमपी में इस शहर के साथ बदल जाएगी पूरे जिले की तस्वीर, जानिए क्या है योजना

Ajeet shukla

Publish: Apr, 17 2018 12:20:43 PM (IST)

Rewa, Madhya Pradesh, India
एमपी में इस शहर के साथ बदल जाएगी पूरे जिले की तस्वीर, जानिए क्या है योजना

बहुत कुछ बदला, काफी कुछ बदलना है बाकी...

रीवा। शहर का संरचनात्मक विकास हो या फिर स्वास्थ्य व शिक्षा का क्षेत्र। महज तीन दशक में बहुत कुछ बदल गया है। शहर ही नहीं पूरे जिले की तस्वीर विकास को बयां कर रही है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ बदलना बाकी है। पत्रिका रीवा के छठवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को कार्यालय में आयोजित परिचर्चा में छह क्षेत्र के विशेषज्ञों ने जिले के भूत, भविष्य व वर्तमान तीनों पर प्रकाश डाला और कहा कि ...

खड़ंजा से रिंगरोड़ तक पहुंचे
वर्ष १९९४ में मैं यहां आया। उस समय नगर निगम के कर्मचारियों को वेतन तक नसीब नहीं होता था। शहर की सडक़ खड़ंजा से बनी थी। आज हम रिंगरोड तक पहुंच गए हैं। मीठा पानी उपलब्ध कराने के साथ शहर की हर सडक़ पक्की बन गई है। स्वच्छता अभियान से लेकर बाढ़ से बचाव तक के प्रोजेक्ट पर कार्य किया जा रहा है। सीवर लाइन से लेकर स्ट्रीट लाइट तक की बेहतर सुविधा मुहैया कराए जाने पर कार्य हो रहा है। इस बात से भी इंकार नहीं करेंगे कि शहर में जाम व अतिक्रमण जैसी समस्याएं भी है। जिसका समाधान केवल आमजन के सहयोग से ही संभव है।
शैलेंद्र शुक्ला, कार्यपालन यंत्री नगर निगम।

बुनियादी सुविधाएं हों दुरुस्त
एक समय था जब जीएमएच डोनेशन के जरिए बेडशीट से लेकर दवाओं तक की व्यवस्था की जाती थी। अब तो भारी भरकम बजट मिल रहा है। स्थितियां काफी सुधार गई हैं लेकिन मरीजों को जो चाहिए अब भी नहीं मिल रहा है। गांवों से उन्हें शहर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा संबंधित मूलभूत सुविधाओं के साथ आवास व अच्छी स्कूलिंग मिले तो हालात बेहतर हों। शहर के अस्पतालों का भार कम हो। लोगों को इलाज के लिए भागकर शहर आने की जरूरत नहीं पड़े। सुपर स्पेशलिटी ने सारी कमी दूर कर दी है।
सीबी शुक्ला, पूर्व अधीक्षक एसजीएमएच।

संरचनात्मक विकास की जरूरत
इसमें कोई संदेश नहीं कि रीवा की तस्वीर बदल गई है। लेकिन मूल समस्याएं अभी बाकी हैं। बाढ़ से बचाव की बात की जाए तो शहर में नालों का चौड़ीकरण हुआ है। लेकिन जिले के डूब क्षेत्र जवा व त्योंथर पर खतरा अभी बरकरार है। इसी प्रकार आज भी लोग पानी की निकासी के लिए परेशान है। नालियां बनाई तो गई हैं। लेकिन व्यवस्थित नहीं है। पानी निकाल कर ले कहां जाएंगे। समझ नहीं आता है। और भी कई समस्याएं हैं, जिनका समाधान सरकारी तंत्र के साथ आमजन खुद कर सकता है। पत्रिका जागरुकता अभियान चलाता है। इसको लेकर भी लोगों को जागरूक करें तो बेहतर होगा।
जुगुल किशोर कनौडिया, समाजसेवी

शिक्षक बिना शिक्षा का बुरा हाल
इतिहास गवाह है रीवा शिक्षा और शिक्षित लोगों के लिए राज्य में ही नहीं देशभर में जाना जा रहा है। राजनीति से लेकर भारतीय सेवाओं में रीवा के मेधावियों ने अपना परचम लहराया है। टीआरएस कॉलेज १०० वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहा है। समय के साथ स्कूल कॉलेज बढ़े। विकास के लिए बजट भी मिल रहा है लेकिन शिक्षकों की सबसे अधिक जरूरत है। वर्ष १९९३ के बाद से नियमित नियुक्ति नहीं हुई। सबसे बड़ी जरूरत नियमित शिक्षक की है। स्कूल-कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की कमी के चलते हैं। अभिभावक निजी स्कूलों की ओर से भाग रहे हैं।
डॉ. विनोद कुमार श्रीवास्तव, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा

नियम विरूद्ध निर्माण बड़ी बाधा
विकास में सबसे बड़ी बाधा अनियमित रूप से हो रही बसाहट है। तेजी के साथ लोग नियम विरूद्ध भवनों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निर्माण कर रहे हैं। जल्द ही नहीं चेता गया तो नए शहर का हाल भी पुराने शहर जैसा ही हो जाएगा। अधिकारी निर्माण से पहले ही हरकत में आ जाएं तो बड़ी समस्या से निजात मिल सकती है। क्योंकि शहर का अनियमित विकास आगे बड़ी समस्या के रूप में सामने आएगा। बाद में डायनामाइट से बिल्डिंगों को गिराने की बजाय निर्माण पर ही प्रतिबंध लगाना ज्यादा उचित होगा।
हिमांशु सिंह बघेल, बिल्डर।

निजीकरण से मिले मुक्ति
बिजली व पानी से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य तक सभी का निजीकरण हो रहा है। प्राइवेट संस्थाओं का दखल ही सबसे बड़ी समस्या है। बिजली को ही ले लीजिए। बिजली निर्माण से लेकर घरों सप्लाई और बिल भुगतान की पूरी व्यवस्था सरकार के हाथों में होना चाहिए। निजीकरण का ही नतीजा है कि लोग बिना मर्ज के मरीज बनाए जा रहे हैं। निजीकरण का दखल बंद हो तो स्थिति खुद ब खुद बेहतर हो जाए। सरकार स्वच्छता अभियान चला रही है। बाहरी स्वच्छता के साथ आंतरिक स्वच्छता के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए। यह अभियान चले तो अपराध लगाम लगे।
घनश्याम सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता

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