लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के जागरुकता कार्यक्रम में मनमानी के आरोप, जांच की उठी मांग


- टेंडर के अधूरे दस्तावेजों पर ही स्वीकृति देने का आरोप
- जिले में जल संरक्षण के लिए चलाया जाना है जागरुकता कार्यक्रम


रीवा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल संरक्षण को लेकर जागरुकता अभियान चलाए जाने को लेकर नया विवाद उत्पन्न हो गया है। विभाग के अधिकारियों पर एक एनजीओ को कार्य सौंपे जाने पर मनमानी किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इसकी शिकायत विभाग के मुख्यालय को भी भेजी गई है।

बताया गया है कि जल संरक्षण को लेकर लोगों के बीच जन जागरुकता चलाए जाने को लेकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने स्वयं सेवी संस्थाओं से कार्य कराने की तैयारी की है। इसी के चलते टेंडर भी विभाग ने आमंत्रित किया। इसमें कई अलग-अलग शर्तें रखी गई थी, जिसमें एक शर्त यह भी थी कि आनलाइन आवेदन किए जाने के दौरान संस्था को तीन वर्ष की सीए आडिट रिपोर्ट भी लगानी होगी।

अब इस मामले में शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता शहर के आदर्श नगर निवासी सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा है कि सीए की आडिट रिपोर्ट लगाए बिना ही टीकमगढ़ की दमक नाम की संस्था को विभाग के अधिकारियों ने ठेका दे दिया है। आरोप है कि विभाग के अधिकारियों को जब इस मामले में जानकारी दी गई तो उनकी ओर से गंभीरता नहीं ली गई है। इसलिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के भोपाल स्थित मुख्यालय में भी शिकायत भेजी गई है। साथ ही सीएम हेल्पलाइन एवं अन्य माध्यमों के जरिए भी विभाग के अधिकारियों पर टेंडर फिक्सिंग किए जाने का आरोप लगाया गया है।


- कागजों तक सीमित रह जाता है अभियान
रीवा जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जलसंसाधन को लेकर जागरुकता कार्यक्रम चलाने के लिए हर साल स्वयंसेवी संगठनों को कार्य सौंपा जाता है। जिस तरह से इस संस्थाओं द्वारा दावे किए जाते हैं, वह कार्य मैदानी स्तर पर दिखाई नहीं देते। इसके पहले भी जागरुकता अभियान को लेकर शिकायतें हुई थी लेकिन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। अब एक बार फिर से जन जागरुकता के नाम पर लीपापोती किए जाने की तैयारी की जा रही है, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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पेयजल को लेकर जागरुकता कार्यकर्ता चलाए जाते हैं, इसके तहत नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनाई गई है। शिकायत में किन बिन्दुओं का उल्लेख है यह अभी हमारे सामने नहीं आया है। देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
शरद सिंह, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
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Mrigendra Singh Reporting
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