प्रधानमंत्री आवास के लिए गिराए जा रहे गरीबों के आशियाने

शिवनगर में हो रहा निर्माण कार्य, स्थानीय लोगों ने कहा कि पट्टा होने के बावजूद कर रहे बेघर

By: Balmukund Dwivedi

Updated: 13 Mar 2018, 06:23 PM IST

रीवा. प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए चिह्नित स्थल लगातार विवादों में घिरता जा रहा है। तीन दिन पूर्व निर्माण के दौरान हुए बवाल को दरकिनार करते हुए ठेकेदार ने फिर काम लगा दिया है। रविवार को रातभर कार्य चला और पिलर गाड़ दिए गए हैं। इसका स्थानीय लोगों ने फिर से विरोध शुरू कर दिया है। वार्ड दस की पार्षद अमिता सिंह का कहना है कि लोगों का विरोध प्रदर्शन जायज है, जब तक उनके पुनर्वास की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक मकान नहीं गिराने देंगे।

निर्माण कार्य किया प्रारंभ
नगर निगम शिवनगर में 400 मकान और 84 दुकानें बनाने का कार्य करा रहा है। जिस स्थान पर निर्माण प्रारंभ किया गया है वह खाली है, उसके बगल में बस्ती है, जिसे गिराने के बाद निर्माण कराया जाना है। इससे आक्रोशित बस्ती के लोगों ने तीन दिन पहले विश्वविद्यालय मार्ग में करीब दो घंटे तक जाम लगाकर प्रदर्शन किया था। नगर निगम के अधिकारियों ने आश्वस्त किया था कि प्रदर्शनकारियों की मांगों के अनुसार ही कार्रवाई आगे होगी। आक्रोश के चलते निर्माण रोक दिया गया था।

कलेक्टर ने यथास्थिति बनाए रखने का दिया था निर्देश
इंजीनियरिंग कॉलेज की भूमि पर वर्षों से कब्जा है। लोगों ने मकान भी बना लिए हैं। पूर्व में कॉलेज प्रबंधन की मांग पर तहसीलदार ने कब्जा हटाने का निर्देश दिया था। इस पर लोगों ने हाईकोर्टमें आवेदन लगाया जहां से यथास्थिति बनाए रखने के लिए निर्देशित किया गया था। कलेक्टर ने २२ जनवरी 2015 को आदेश जारी कर कहा कि हाईकोर्ट के 3 दिसंबर 2009 और 12 जनवरी 2011 के निर्देश के मुताबिक जब तक किसी दूसरे स्थान पर व्यवस्थित नहीं कर दिया जाता तब तक उन्हें नहीं हटाया जाए। कलेक्टर ने तहसीलदार और इंजीनियरिंग कालेज के प्राचार्यको इसके लिए निर्देशित भी किया था।

सीएम के भाषण का दे रहे हवाला
इंजीनियरिंग कॉलेज की भूमि पर बसे 52 लोगों को अस्थायीपट्टा दिया गया है। वहीं अन्य भी विरोध कर रहे हैं, इनका कहना है कि मुख्यमंत्री भाषणों में कहते हैं कि जो व्यक्ति जहां बसा है उस भूमि से नहीं हटाया जाएगा। सरकार वहीं पर पट्टा देगी। इस कारण वह चाहते हैं कि सरकार अपनी घोषणा पर अमल भी कराए।

पीडि़तों की जुबानी

- यहां बसे 30 साल से अधिक समय हो गया है। जब पट्टा वितरित हो रहा था तो कईलोगों के दस्तावेजों में अधिकारियों ने गड़बड़ी की थी। उस दौरान कहा था कि हटाएंगे नहीं, अब बगैर किसी इंतजाम के हटा रहे हैं।
छोटेलाल कोरी, स्थानीय निवासी

- सरकार ने पट्टा दे रखा है। पहले निगम के अधिकारियों ने कहा था कि आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने में सहायता देंगे। अब कह रहे हैं कि यहां दुकानें बनाई जाएंगी। अचानक हम कहां चले जाएं।
शांति कोल, स्थानीय निवासी

- इसी भूमि से हमारा जीवन-मरण जुड़ा है। पट्टा भी हमारे पास है, किसी हालत में हम स्थान नहीं छोड़ेंगे। प्रशासन के पास बल है तो हमारा घर गिरा दे, मरते दम तक यहीं रहना चाहता हूं।
छबीले कोल, स्थानीय निवासी

- हमारे पास इतने रुपए नहीं हैं कि दूसरी जगह मकान बनवा सकें। निगम के अधिकारियों ने पहले कहा था कि जो बसे हैं सबको पक्का मकान दिलाएंगे। अब हटा रहे हैं, तो हमारे पास विरोध के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है।
ललिता वर्मा, स्थानीय निवासी

Balmukund Dwivedi Desk
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