EWS और LIG आवास बना रही ठेका कम्पनी को राहत नहीं

- नगर निगम द्वारा रोके गए भुगतान पर हाइकोर्ट ने निर्देश देने से किया इनकार

By: Mrigendra Singh

Published: 22 Nov 2020, 11:01 AM IST

रीवा। शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जा रहे मकानों में ठेका कंपनी का रोका गया भुगतान कराने में हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। इसलिए अब नगर निगम की शर्तों के अनुसार ही ठेका कंपनी को मकानों के निर्माण से जुड़े कार्य करने होंगे।

याचिका की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट जबलपुर ने रीवा के झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में गरीब व निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए आवासों व दुकानों का निर्माण कर रही ठेका कम्पनी व रीवा नगर निगम के बीच 32.48 करोड़ रुपए के भुगतान विवाद में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजय यादव व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच का विवाद है.

विवाद सुलझने तक याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। इंदौर की कंपनी कल्याण टोल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की ओर से याचिका दायर की गई थी। कम्पनी की ओर कोर्ट में अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि 4 अप्रैल 2017 को नगर निगम रीवा के साथ कम्पनी का ठेका हुआ।

ठेके के अनुसार कम्पनी को रीवा के चिन्हित इलाकों रतहरी, विवेकानंद नगर, गोल क्वार्टर बिछिया, तोपखाना, चिरहुला आदि स्थानों में 142.16 करोड़ की लागत से 1593 इडब्ल्यूएस व निम्न आय वर्ग के लिए 456 एलआइजी आवास व दुकानों का निर्माण करना था। इस प्रोजेक्ट की अवधि 18 माह थी।

कार्य मापदंडों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण तरीके से जारी था। लेकिन, कार्य आरम्भ होने के बाद से ही जमीन हस्तांतरित करने, अतिक्रमण खाली करवाने, भुगतान में देरी की वजह से प्रोजेक्ट में विलम्ब हुआ। इसके चलते कम्पनी का भुगतान रोक लिया गया। आग्रह किया गया कि कम्पनी की कुल बकाया 32.48 करोड़ रुपए दिलाए जाएं।

कंपनी का यह भी तर्क है कि उसकी ओर से जहां पर स्थान मिला वहां पर मकानों का निर्माण कराया गया है। इसलिए जितना निर्माण हुआ है उसका समय पर भुगतान भी कराया जाए।

राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता आशीष आनंद बर्नार्ड व रीवा नगर निगम की ओर से अधिवक्ता दिलीप पांडेय ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि कम्पनी व रीवा नगर निगम के बीच उक्त विवाद सुलझने तक ऐसे किसी भुगतान के लिए निर्देश नहीं दिए जा सकते। यह कहकर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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Mrigendra Singh Reporting
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