शहर के सीमा विस्तार की प्रक्रिया रुकी, इस कारण सरकार ने लिया निर्णय


- शासन ने शहर से लगे 26 गांवों को निगम में शामिल करने का मांगा था प्रस्ताव
- भाजपा पहले से विरोध में रही है, अब सरकार ने जारी किया निर्देश

By: Mrigendra Singh

Published: 26 Jun 2020, 10:52 PM IST


रीवा। नगर निगम के सीमा क्षेत्र का विस्तार करने की कवायद एक बार फिर ठंडे बस्ते में चली गई है। सरकार की ओर से रीवा सहित अन्य नगरीय निकायों के सीमा विस्तार की चल रही प्रक्रिया को रोक दिया गया है। इसमें आगामी वर्ष होने वाले जनगणना को कारण बताया गया है। नगरीय निकायों के अधिकारियों को मौखिक रूप से निर्देश दिए गए हैं। हवाला दिया गया है कि जनगणना प्रारंभ होने से एक वर्ष पहले से सीमा क्षेत्र का किसी तरह से विस्तार या बदलाव नहीं किया जा सकता।

रीवा में प्राथमिक नोटिफिकेशन हो चुका है और दावा-आपत्तियां भी मंगाई गई थी। इसके बाद सरकार ने स्थानीय स्तर पर इन पर किसी तरह की सुनवाई नहीं की और सरकार के पास भेज दिया था। वर्तमान में सरकार का रुख स्पष्ट है कि वह अभी शहरी सीमाओं का विस्तार करने के पक्ष में नहीं है। कांग्रेस की सरकार में शुरू की गई इस कवायद का विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने पुरजोर तरीके से विरोध किया था। अब सरकार पर होने के चलते पुराने रुख पर ही काम करने की तैयारी की जा रही है।

जानकारी मिली है कि जनगणना का हवाला देते हुए राज्यपाल के पास पूर्व के नोटिफिकेशन को निरस्त करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है। इधर रीवा नगर निगम के पास कोई लिखित आदेश नहीं आया है लेकिन भोपाल से अधिकारियों की ओर से मौखिक निर्देश दिए हैं। इस कारण माना जा रहा है कि अब शहरी सीमा का विस्तार नहीं होगा। साथ ही आने वाले दिनों में नगर निगम का चुनाव होने के बाद यह प्रक्रिया आगामी पांच वर्ष के लिए बढ़ा दी जाएगी।

- वार्डों का आंतरिक परिसीमन पर नीति स्पष्ट नहीं
सरकार ने यह तो तय कर दिया है कि नगरीय निकाय के सीमा क्षेत्र का विस्तार नहीं होगा, पहले की तरह ही यह आगे भी रहेगा। वहीं शहर के भीतर वार्डों की सीमा को लेकर भी परिसीमन किया जाना है। इस पर सरकार की ओर से अभी तक कोई नीति स्पष्ट नहीं की गई है। निगम के अधिकारी भी इस इंतजार में हैं कि लिखित तौर पर कोई आदेश मिले तो फिर आगे के लिए वह मार्गदर्शन मांगें। रीवा शहर मेें वार्डों की सीमा को लेकर व्यापक पैमाने पर विसंगतियां हैं। कई वार्ड जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर काफी छोटे हैं और कई ऐसे हैं जिनमें दो से अधिक वार्ड बनाए जा सकते हैं। पूर्व में निगम ने एक प्रस्ताव तैयार किया था जिसमें कई वार्डों की सीमाओं में परिवर्तन का प्रस्ताव था।

- दावा-आपत्तियों पर अब तक सुनवाई नहीं
नगर निगम के सीमा विस्तार को लेकर पहले ४५ गांवों को शहर में शामिल करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिसमें ३९ गांव मास्टर प्लान में शामिल थे और छह गांवों को आवश्यकता के अनुसार जोड़ा गया था। इसमें पंचायतों की ओर से विरोध भी दर्ज कराया गया था। किसान संगठनों ने भी आपत्ति उठाई थी कि गांवों को शहर बनाने से खेती का नुकसान होगा। इसके बाद सरकार ने २० गांवों को शहर में शामिल करने की अनुमति दी थी और उनकी समीक्षा कर नए सिरे से प्रस्ताव मांगा था। जिस पर निगम के अधिकारियों ने छह और गांवों को जोड़ते हुए कुल २६ गांवों का प्रस्ताव भेजा। इन पर दावा-आपत्तियों के आए आवेदनों पर किसी तरह की सुनवाई नहीं हुई। सभी आवेदनों को सरकार के पास भेज दिया गया है।
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इन गांवों को रीवा नगर निगम में शामिल करने का है प्रस्ताव
निगम द्वारा प्रस्तावित किए गए 45 गांवों में जिन 20 के लिए शासन ने सहमति दी थी उसमें प्रमुख रूप से इटौरा, सिरखिनी, सोनौरा, बरा 393, बरा 395, अजगरहा, गोड़हर, दुआरी, अमरैया, तुर्कहा, मैदानी, करहिया, उमरिहा, कोष्टा, भुंडहा, जिउला, गड़रिया, लोही, जोरी और कोठी शामिल है। इन गांवों को निगम में शामिल करने से नया नक्शा ऐसा हो जाएगा कि भौगोलिक रूप से कामकाज में कठिनाइयां भी होंगी। इसलिए सरकार ने निगम से इसमें संशोधन का प्रस्ताव मांगा था। इसमें से चिन्हित किए गए 20 गांवों में से कोठी को अलग करने के साथ ही सात नए गांवों को शहर में शामिल करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। जिसमें नीगा, रमकुईं, बेलहा 451, बेलहा, सिलपरा, सिलपरी, रौसर आदि को शामिल किया गया है। इन सात गांवों की जनसंख्या 9883 है। इस तरह से कुछ 26 गांवों को शहर में शामिल करने का प्रस्ताव अब तक शासन के पास लंबित है।

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Rewa, Nagar Nigam

Mrigendra Singh Reporting
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