रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्यता कागज तक सीमित, पानी रोकने के इंतजाम नहीं


- भवन अनुज्ञा के दौरान आम लोगों से रुपए जमा करा रहे लेकिन वाटर हावेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाते निगम के इंजीनियर

By: Mrigendra Singh

Published: 27 Jul 2020, 09:15 AM IST


रीवा। बरसात का मौसम शुरू हो गया है, बारिश हो रही है और पानी बड़ी मात्रा में बहकर नदियों के रास्ते बह जाता है। बारिश के इस पानी को संचित करने बनाई गई योजना की स्थानीय प्रशासन अनदेखी कर रहा है। सरकार ने शहर में बनने वाले हर भवन के साथ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जाने की अनिवार्यता कर रखी है। जिसे नगर निगम प्रशासन ने केवल कागजों तक सीमित कर रखा है। आटोमेटिक बिल्डिंग एप्रूवल के लिए आवेदन के समय भवन के आकार के अनुसार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की राशि भी जमा कराई जाती है। इस पर नियम है कि यदि भवन बनाने वाले ने स्वयं ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम यदि बनवा लिया है तो उसके द्वारा जमा की गई राशि नगर निगम वापस करेगा। यदि नहीं बनाया गया है तो उस राशि से निगम संबंधित के मकान के पास इसे बनाएगा, ताकि बारिश से एकत्र होने वाला पानी भूमि पर संचित किया जा सके। रीवा नगर निगम के इंजीनियरों के लिए यह योजना कमाई का प्रमुख जरिया बन चुकी है। नियम है कि भवन अनुज्ञा के बाद हर काम निगम के इंजीनियर अपनी देखरेख में कराएं लेकिन पहले वह नहीं जाते बाद में अनाधिकृत रूप से दबाव बनाते हैं। लंबे समय से नगर निगम को इसके लिए निर्देश आते रहे हैं कि वह वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर जन अभियान चलाए ताकि लोग स्वयं आगे आए और अधिक संख्या में सिस्टम तैयार कर बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोका जा सके। भूजल स्तर रीवा शहर का भी अब गर्मी के दिनों में काफी नीचे चला जाता है। सरकारी और निजी बोरिंग में राइजिंग पाइप बढ़ानी पड़ती है। शहर में दो बड़ी नदियां होने की वजह से इसका फायदा भी मिलता है लेकिन नदियों का पानी भी सूखने लगता है तो भूजल स्तर भी नीचे चला जाता है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से इसमें सुधार किया जा सकता है।

- राशि वापसी के नाम पर चल रहा खेल
नगर निगम के इंजीनियर और वार्डों में काम करने वाले टाइमकीपर एवं अन्य कर्मचारियों द्वारा भवन बनवाने वालों के साथ मिलीभगत कर या फिर उन पर दबाव बनाकर जमा कराई गई रकम की वापसी में लंबा खेल किया जाता है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के नाम पर जो राशि जमा कराई जाती है, वह तभी लौटाने का प्रावधान है जब भवन के साथ उसका निर्माण संबंधित ने कराया हो। निगम के इंजीनियर कागजों में ही इसे सत्यापित कर जमा राशि वापस कराकर अपना कमीशन बना रहे हैं। इसके कई उदाहरण पहले सामने आ चुके हैं, जिनमें शिकायतें निगम के आयुक्त तक पहुंची हैं।

- सरकारी भवनों और पार्कों में नहीं बना सके
शहर के सरकारी भवनों और पार्कों में बारिश के पानी को संचित करने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने के लिए पूर्व में ही निर्देश नगर निगम के पास आया था। इसमें संबंधित विभागों से राशि जमा कराई जानी थी। शहर के पार्कों में निगम को अपने खर्च पर इसे बनाना था। कलेक्ट्रेट भवन बड़े क्षेत्रफल में फैला है, जहां पर केवल एक ही सिस्टम बनाया गया है, इसके अलावा अन्य क्षेत्रों का पानी व्यर्थ में बह रहा है। इसी तरह अन्य बड़े भवनों में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाया गया है। नगर निगम के पार्कों में भी इसे बनाए जाने के लिए कुछ समय पहले योजना तैयार की गई थी। कई जगह तो कागज पर ही दावे कर दिए गए हैं कि पार्क में बारिश के पानी को संचित करने के लिए इसे बनाया गया है।

- 1500 वर्गफिट तक अनिवार्यता नहीं
सरकार ने 1500 वर्गफिट आकार तक के मकानों के निर्माण में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता से छूट दे रखी है। लेकिन नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश है कि वह लोगों के बीच जाएं और उन्हें प्रेरित करें कि लोग स्वयं ही छोटे आकार का ही हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाएं। अधिकांश जगहों पर छोटे आकार के भवनों का हवाला देकर इससे छूट भी दी जा रही है।


- इस दर से वसूली जाती है राशि


1500-2152 वर्गफिट-- 7,000 रुपए
2153-3229 वर्गफिट-- 10,000 रुपए
3230-4305 वर्गफिट- 12,000 रुपए
4306 वर्गफिट से अधिक पर- 15,000 रुपए
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Mrigendra Singh Reporting
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