कालेजों में अब पढ़ाएंगे रिटायर्ड प्रोफेसर

कालेजों में अब पढ़ाएंगे रिटायर्ड प्रोफेसर
Retired professors will now teach in colleges

Mahesh Kumar Singh | Publish: Oct, 12 2019 01:03:10 PM (IST) | Updated: Oct, 12 2019 01:03:11 PM (IST) Rewa, Rewa, Madhya Pradesh, India

उच्च शिक्षा के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक इस व्यवस्था की करेंगे निगरानी

रीवा. विश्वविद्यालय और कालेजों में लगातार पिछड़ रहे कोर्स को पूरा कराने के लिए अब नई व्यवस्था बनाई जा रही है। छात्रों को पढ़ाने के लिए रिटायर्ड हुए प्रोफेसर्स का सहयोग लिया जाएगा। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी कर दिया है। सरकार ने इस व्यवस्था के लिए मार्गदर्शन योजना की शुरुआत की है। जिसमें रिटायर्ड शिक्षकों के अनुभव का लाभ छात्रों को दिलाया जाएगा।

अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के साथ ही सभी सरकारी कालेजों में मार्गदर्शन योजना के तहत व्याख्यान एवं संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे। कालेज प्रबंधन आवश्यकता के अनुसार विषय विशेषज्ञों को बुलाएगा। जिन स्थानों पर कई विषयों के शिक्षकों की कमी है, वहां पर रिटायर्ड विशेषज्ञों की सेवा महत्वपूर्ण होगी। क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक रीवा के क्षेत्र में रीवा और शहडोल संभाग में कालेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की भारी कमी है।

लगातार छात्रों द्वारा इस समस्या पर धरना-प्रदर्शन भी किया जा रहा है। बीते साल कुछ सहायक प्राध्यापकों की भर्ती हुई है लेकिन वह भी आवश्यकता के अनुरूप अभी भी समस्या का समाधान करने में सफल नहीं है। सरकार ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए नवाचार करने की शुरुआत की है।

रीवा जिले में अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के साथ ही 16 सरकारी कालेज भी हैं। जिसमें टीआरएस कालेज, माडल साइंस कालेज, न्यू साइंस कालेज, जीडीसी, वेंकेट संस्कृत, मऊगंज, त्योंथर, नईगढ़ी, रायपुर कर्चुलियान, गुढ़, देवतालाब, सेमरिया, मनगवां, गोविंदगढ़ और नष्टिगवां शामिल हैं। इसमें से ऐसा एक भी कालेज नहीं है, जहां पर शिक्षकों के सभी पद भरे हुए हों।

दो हजार रुपए तक दिया जा सकेगा मानदेय
जनभागीदारी समितियां अपने यहां आवश्यकता के अनुसार छात्रों को पढ़ाने के लिए रिटायर्ड प्रोफेसर्स की सेवाएं लेंगी। इसके लिए शासन ने प्रति व्याख्यान अधिकतम दो हजार रुपए तक की सीमा निर्धारित की है। जिन कालेजों की जनभागीदारी समितियों को स्थानीय स्तर पर आवश्यकता के अनुरूप रिटायर्ड प्रोफेसर्स नहीं मिलेंगे, वे जिले के बाहर के विशेषज्ञों की सेवाएं ले सकेंगे।

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मार्गदर्शन योजना के तहत रिटायर्ड प्रोफेसर्स की सेवाएं छात्रों को पढ़ाने के लिए ली जाएंगी। इसके निर्देश भी शासन द्वारा जारी किए गए हैं। साथ ही क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक को इसकी नियमित समीक्षा करने के लिए भी कहा गया है।
डॉ. प्रभात पाण्डेय, ओएसडी उच्च शिक्षा

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