खुदा न करे, ऐसा आपके साथ हो, गुलामी में गुजार दी पूरी जिंदगी, अब भी मिल रहा तिरस्कार

पिछले 28 वर्षों से कर रहे चाकरी, फिर भी नहीं मिला ठौर...

By: Ajeet shukla

Published: 11 Mar 2018, 12:19 PM IST

रीवा। जिंदगी के 28 वर्ष एक ही परिसर में संस्था व संस्था के अधिकारियों की सेवा में लगा दिए। जवानी गुजर गई। बुढ़ापा आ गया। सेवानिवृत्ति की आयु के नजदीक पहुंच गए। जीवन का मूल्यवान समय सेवा में गुजारने के बावजूद संस्था उन्हें अपना अंग नहीं बना सकी। बात अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय व उनमें वर्षों से कार्य कर रहे दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की कर रहे हैं।

तीन दशक से कर रहे चाकरी
करीब तीन दशक पहले विश्वविद्यालय में कर्मचारी यह सोचकर आए थे कि वह आज नहीं तो कल नियमित हो जाएंगे। लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद उनकी यह आस अधूरी रह गई है। नियमित करने की बात तो दूर विश्वविद्यालय प्रशासन उन्हें स्थाई कर्मी बनाने में भी रुचि नहीं ले रहा है। जबकि इस बावत शासन स्तर से आदेश भी जारी हो गया है।

स्थाई कर्मी बनाने हुआ है आदेश
उच्च शिक्षा विभाग ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थाई कर्मी बनाने का आदेश जारी कर दिया है। स्थाई कर्मी बनने के बाद दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को एक साथ कई लाभ मिल जाएंगे। एक तो वह शासन के रिकॉर्ड में शामिल हो जाएंगे। दूसरे शासन स्तर से प्रतिवर्ष बढऩे वाले विभिन्न भत्तों का लाभ भी मिलने लगेगा। जबकि अभी उन्हें वेतन का भुगतान कलेक्टर रेट से किया जाता है।

सात हजार रुपए में काट रहे जिंदगी
विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी के रूप में 85 कर्मचारी अपने स्थाई कर्मी बनने की बाट जोह रहे हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें हर महीने केवल सात से साढ़े सात हजार रुपए दिया जाता है। वर्षों से वह इसी में अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। स्थाई कर्मी बनाए जाने के बाद उन्हें 10 से 12 हजार रुपए मिलने लगेंगे।

संघ की मांगों में शामिल है यह मुद्दा
वर्तमान में जिन मांगों को लेकर विश्वविद्यालय कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। उन मांगों में यह दैनिक वेतनभोगी कर्मियों के स्थाई कर्मी बनाए जाने की मांग भी शामिल हैं। विवि कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बुद्धसेन पटेल के मुताबिक शासन के आदेश के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन दैनिक कर्मियों को स्थाई कर्मी बनाने का आदेश जारी नहीं कर रहा है।

दैनिक कर्मी व विभाग
53 दैनिक कर्मी यंत्री शाखा से संबद्ध
17 दैनिक कर्मी स्थापना से संबद्ध
15 दैनिक कर्मी स्ववित्तीय से संबद्ध

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Ajeet shukla Reporting
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