रीवा. अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के ५२वें स्थापना दिवस पर पं.शंभूनाथ शुक्ल सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति देकर समां बांधे रखा। सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरूआत दोपहर करीब दो बजे हुई। जिसमें बीएएलएलबी की छात्रा मुस्कान सिंह राठौर ने कत्थक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को खूबसूरत बना दिया। कार्यक्रम देखने पहुंचे ऑडियंस ने मुस्कान के कत्थक नृत्य का खूब सराहना की। ऑडियंस का रिस्पॉन्स रोमांचक रहा। इसी प्रकार स्टूडेंट लावणी येंगल ने सूफी भजन की प्रस्तुति देकर ऑडियंस की खूब तालियां बटोरी। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने लावणी की कला एवं प्रतिभा को सराहा। लावणी ने अपने सुमधुर प्रस्तुति से ऑडियंस का मन मोह लिया। कलाकारों ने करीब घंटे भर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। अवसर पर मुख्य अतिथि ने विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले निर्माण कार्यो का भूमिपूजन किया।

इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में पौधे रोपे। विश्वविद्यालय विंध्य भारती रिसर्च जनरल का प्रकाशन करता है। प्रो.आरएन सिंह इसका संपादन करते हैं। इसी प्रकार प्रतिबिम्व न्यूज लेटर का विमोचन किया गया। प्रो. विजय अग्रवाल इसका संपादन करते हैं। जिसका विमोचन मुख्य अतिथि ने किया। कुलपति प्रो. केएन सिंह यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की पिछले पांच वर्ष की प्रगति गिनाई। विश्वविद्यालय कोशल उन्नयन के क्षेत्र में काम कर रहा है। छात्रों को रोजगार उपलब्ध हो सके इसके लिए विश्वविद्यालय में काम हुए हैं। यहां से पढ़ाई कर निकलने वाले छात्रों को सीधे कंपनियों में जगह उपब्लध कराई जाती है। इसके प्रबंधन विश्वविद्यालय में किए गए हैं। बताया कि विश्वविद्यालय पिछले पांच वर्षों के दौरान सात नए कोर्स शुरू किए गए है। भवनों का विस्तार किया जा रहा है। नए भवन स्थापित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में प्रादेशित एवं राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताएं होनी है। विश्वविद्यालय में २३३ महाविद्यालय संबंद्ध है। अकादमिक कैलेंडर के अनुरूप प्रवेश एवं परीक्षाएं हो रही हैं। विश्वविद्यालय परिसर में सौर्य ऊर्जा के दो संयंत्र स्थापित किए गए हैं। जिससे बिजली का खर्च कम हुआ है। विश्वविद्यालय में पर्याप्त बिजली मिल रही है। इसी प्रकार रूसा से अनुदान मिलने वाला है। जिसकी मदद से पर्यावरण विभाग, फिजिक्स एवं केमिस्ट्री विभाग में अत्याधुनिक प्रायोगिक उपकरणों की खरीदी की जानी है। जिससे रिसर्च के कार्यों में गुणवक्ता एवं तेजी आएगी। कुलपति प्रो.केएन सिंह यादव को अपने कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक पदों पर भर्ती नहीं कर पाने का मलाल कार्यक्रम में दिखा। उन्होंने मंच से कहा कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारियों की आवश्यकता है, लेकिन कुछ कारणों से इसे पूरा नहीं किया जा सका। उल्लेखनीय है कि कुलपति का कार्यकाल अब अंतिम दौर में है। किसी भी शैक्षणिक संस्थान का आंकलन वहां के भवन एवं दीवार के आधार पर नहीं होता। शैक्षणिक संस्थान की आत्मा वहां पढ़ाने वाले प्राध्यापक एवं पढऩे वाले विद्यार्थी होते हैं। विश्वविद्यालय की धूरी उन्हीं पर टिकी होती है। शिक्षकों के कर्तव्य के प्रति निष्ठा एवं छात्रों की लगन, मेहनत एवं प्रतिभा ही विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थान दिला सकती हैÓ। यह बात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विजय शुक्ल ने कही है। शनिवार को अवधेश प्रताप ङ्क्षसह विश्वविद्यालय के पं. शंभूनाथ शुक्ल सभागार में ५२वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, विंध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं विश्वविद्यालय के संस्थापक स्व. गोविंद नारायण ङ्क्षसह न केवल मुख्यमंत्री रहे बल्कि महान कवि एवं महान दार्शनिक रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में विंध्य का इतिहास गौरवशाली रहा है। बीरबल एवं तानसेन ने विंध्य की धरती को विश्व के मानचित्र पर स्थापित किया। आरएस शर्मा एनटीपीसी के चेयरमैन बने। न्यायाधीश गुरु प्रसन्न ङ्क्षसह जो यहीं से पले बढ़े एवं शिक्षा प्राप्त की। पं. शभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति बने। मुख्य अतिथि ने कहा कि, यहां से शिक्षा प्राप्त कर कई लोगों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की व इस धरा का नाम रोशन किया है।



MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned