शहर के स्कीम नंबर छह का जिन्न एक बार फिर निकला, एक पर कार्रवाई औरों पर मेहरबानी

- निगम आयुक्त ने संपत्ति अधिकारी को स्कीम में अनियमितता के आरोप में निलंबित कर मामले को दिया तूल
- पूर्व में रहे निगम आयुक्त ने कई कार्रवाई करते हुए मामले को सुर्खियों में लाया था



रीवा। शहर के स्कीम नंबर छह को लेकर एक बार फिर मामला सुर्खियों में आ गया है। बीते साल इसकी नए सिरे से जांच कराई गई, जिसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का लंबा दौर चला। कुछ महीनों से इसे लेकर कोई हलचल नहीं थी। अब प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद नगर निगम के आयुक्त सभाजीत यादव का तबादला भोपाल कर दिया गया और निगम के संपत्ति अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।

इस निलंबन की वजह नवागत प्रभारी आयुक्त अर्पित वर्मा ने सुधार न्यास की भूमि अधिग्रहण में अनियमितता को बताया है। स्कीम नंबर छह की भूमि अधिग्रहण को लेकर ही पहले विवाद चल रहा था। जिसमें कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध थी। यहां पर केवल एक निलंबन के बाद मामले को रोका जाएगा तो प्रक्रिया पर सवाल उठेंगे। अन्यथा उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई करनी पड़ेगी जिनकी भूमिका को लेकर जांच रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं।

बीते साल स्कीम नंबर छह में अवैध कालोनी निर्माण कराने के आरोप में तत्कालीन निगम आयुक्त ने कार्यपालन यंत्री और एसडीओ को निलंबित कर दिया था। इस निलंबन को एमआइसी ने सहमति नहीं दी। करीब महीने भर मामला लंबित रहा, इसी बीच आयुक्त ने उन नियमों का हवाला देते हुए दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया जिसमें एमआइसी दस दिन के भीतर किसी प्रस्ताव पर निर्णय नहीं लेती तो उसे स्वीकृत माना जाता है।

मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से एमआइसी को जिम्मेदारी सौंपी गई। एमआइसी ने अपना पुरान रुख अपनाया और निलंबन की सहमति नहीं दी। बता दें कि स्कीम नंबर छह के लिए 92.37 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई थी, जिसमें 28 एकड़ भूमि सरकारी थी। वर्तमान में पूरे हिस्से में कालोनियां बन गई हैं, अब निगम के पास ऐसा कोई भी हिस्सा नहीं बचा है जहां पर वह मकानों का निर्माण करा सके।


300 करोड़ के घोटाले का निगम ने किया है मूल्यांकन
स्कीम नंबर छह में सुधार न्यास द्वारा भूमि अधिग्रहण किया और न्यास नगर निगम में समाहित हो गया। निगम के अधिकारियों ने यहां पर अवैध रूप से बसाई जा रही कालोनी पर रोक नहीं लगाई बल्कि सहमति ही दी। बीते साल जांच के बाद निगम आयुक्त ने शासन को रिपोर्ट भेजी की करीब ३०० करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। इसका सीमांकन कराने के साथ ही अवैध मकानों को तोडऩे की अनुमति भी मांगी। मामला गंभीर होता गया, प्रमुख सचिव ने कलेक्टर से पूरी जांच रिपोर्ट तलब की। कलेक्टर ने तीन महीने का समय मांगा था और एसडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी, जिस पर अब तक जांच पूरी नहीं हुई है। हाईप्रोफाइल होते मामले को देख जांच अधिकारियों ने भी दूरी बनाई और अब तक एक बार भी मौके का मुआयना करने नहीं पहुंचे हैं।


- सांसद ने इसी मामले में दी थी चुनौती
स्कीम नंबर छह की जांच के खिलाफ भाजपा ने खुलकर मोर्चा खोल दिया था। स्कीम में बसे लोगों के बीच एक सभा को संबोधित करते हुए सांसद जर्नादन मिश्रा ने तीखे शब्दों का उपयोग करते हुए तत्कालीन निगम आयुक्त सभाजीत यादव को जिंदा दफनाने की धमकी दी थी। जिसके बाद से कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुआ था।
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Mrigendra Singh Reporting
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