रीवा वृत्त में वन अपराध से जुड़ी आठ हजार से अधिक शिकायतों की जांच लंबित


- लगातार वन्यजीवों का शिकार और वन संपदा के अवैध दोहन के आ रहे मामले
- वन अपराधों की जांच में हीलाहवाली की वजह से बढ़ रहे मामले

By: Mrigendra Singh

Published: 03 Apr 2021, 09:10 PM IST



रीवा। वन अपराधों को लेकर विभागीय उदासीतना बढ़ती जा रही है। जिसके चलते अपराधों की संख्या बढ़ रही है और उनकी जांच का कार्य लेटलतीफी का शिकार हो रहा है। वन वृत्त रीवा में करीब आठ हजार से अधिक की संख्या में वन अपराधों से जुड़े मामले सामने आए लेकिन इनकी जांच की गति काफी धीमी रही है। इस वजह से मामले लगातार लंबित होते जा रहे हैं। वर्तमान में वृत्त के रीवा, सीधी, सिंगरौली और सतना जिलों में वन अपराधों की जांच से जुड़े करीब आठ हजार से अधिक की संख्या में प्रकरण लंबित हैं। वन अपराधों की जांच और उस पर दोषियों को सजा दिलाने के मामले में वन विभाग काफी कमजोर साबित हो रहा है। पूर्व से भी अब स्थिति खराब होती जा रही है। रीवा में मुख्य वन संरक्षक की पदस्थापना भी है, जिनकी जवाबदेही है कि वह हर जिले की नियमित समीक्षा करें और जांच में लंबित मामलों का निराकरण कराने के लिए अधिकारियों को निर्देशित करें। सीसीएफ की उदासीनता विभाग के कामकाज पर भारी होती जा रही है। इस पर कई संगठनों ने शिकायतें भी दर्ज कराई हैं कि वन अपराधों को रोकने के लिए विभाग उदासीन है, साथ ही अपराधियों को सजा भी नहीं दिला पा रहा है। रीवा जिले में कम संख्या में वन अपराध पंजीबद्ध हुए हैं लेकिन अन्य जिलों में इनकी संख्या अधिक है। इस मामले में बढ़ती लंबित जांच की संख्या पर सीसीएफ ने चुप्पी साध ली है, वह किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं देना चाह रहे हैं। उनके ही कार्यालय में कई शिकायतें ऐसी हैं जिसमें अधीनस्थों के साथ ही सीसीएफ की उदासीन भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।


- आठ साल से भी अधिक पुराने मामले लंबित
वन अपराधों के मामले जो जांच के लिए अब तक लंबित हैं, उनमें वर्ष 2012 और उसके पहले के भी कुछ शामिल हैं। सामान्य घटनाओं में जिनकी जांच महीने-दो महीने के भीतर पूरी हो सकती थी, वह अब तक लंबित हंै। इसके पहले भी जो डीएफओ और सीसीएफ रहे उनकी भी उदासीनता सामने आई है। पुराने मामले रीवा के साथ ही अन्य जिलों के भी बताए गए हैं। बताया गया है कि तीन साल से अधिक समय के प्रकरणों में रीवा के 156, सतना के 1055, सिंगरौली के 2247 एवं सीधी के 1180 शामिल हैं। संभाग भर का यह आंकड़ा साढ़े चार हजार के पार है।


- लॉकडाउन के दिनों में भी हुए वन अपराध


बीते करीब एक वर्ष की अवधि में अधिकांश हिस्सा कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन एवं अन्य तरह की चौकसी में गुजरा है। लॉकडाउन के दिनों में भी कई जिलों में वन अपराध हुए, जिनकी शिकायतें क्षेत्रीय लोगों की ओर से की गई और प्रकरण दर्ज किए गए हैं। बीते करीब एक वर्ष के दर्ज प्रकरणों में सिंगरौली सबसे आगे रहा है, जहां पर 2262 और सीधी में 979 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए। रीवा में 201 और सतना में 434 अपराध दर्ज हुए हैं। इसमें कुछ प्रमुख अपराधों पर एक नजर-
रीवा-
अवैध कटाई 104, वन्य प्राणियों का शिकार 20, अतिक्रमण 19, अवैध परिवहन 48, अवैध उत्खनन सात, अग्रि प्रकरण एक, आरामशीन संबंधी दो प्रकरण दर्ज किए गए।
सतना-
वन्य प्राणियों का शिकार 37, अवैध कटाई 288, अतिक्रमण 59, अवैध परिवहन 20, अवैध उत्खनन 14, अग्रि प्रकरण 11, आरामशीन संबंधी एक और मुनारा तोडऩे और अवैध प्रवेश के तीन प्रकरण दर्ज।

सिंगरौली-
अवैध कटाई 1866, वन्य प्राणियों का शिकार 22, अतिक्रमण 218, अवैध परिवहन 106, अवैध उत्खनन 29, अग्रि प्रकरण तीन, अवैध चाई 15, सीमा लाइन बदलने के दो प्रकरण दर्ज किए गए।
सीधी-
अवैध कटाई 850, वन्य प्राणियों का शिकार 18, अतिक्रमण 61, अवैध परिवहन 17, अवैध उत्खनन 12, अग्रि प्रकरण 14, लघु वनोपज के पांच प्रकरण दर्ज किए गए।
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- वन अपराधों की जांच पर नजर

जिला-- जांच पूरी-- जांच लंबित
रीवा-- 100-- 378
सतना-- 142-- 1636
सिंगरौली-- 93-- 3684
सीधी- 190-- 2527
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नोट- यह जांच प्रक्रिया एक जनवरी 2020 से 2 अप्रेल 2021 तक की है।
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Mrigendra Singh Reporting
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