रीवा. अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के शंभूनाथ सभागार में व्याख्यान का आयोजन किया गया। जहां पर राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम हमारे मौलिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। शासन के कामकाज से जुड़ी कोई भी जानकारी इस अधिनियम के तहत ली जा सकती है। कुछ ऐसी जानकारियां हैं, जिनके बाहर आने से देश और समाज की सुरक्षा को खतरा हो सकता है उन्हें छोडक़र सभी जानकारी ली जा सकती है। कहा कि अधिकांश अपील जो आयोग के पास आती हैं उसमें यह आरोप लगाया जाता है कि संबंधित विभाग के अधिकारी ने जानकारी देने से मना कर दिया है। या फिर जानकारी नहीं लेने के लिए संबंधित अधिकारी द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। इसलिए यह समझकर नहीं चलना चाहिए कि संबंधित विभाग और अधिकारी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देकर कोई एहसान नहीं करते, बल्कि उनकी मजबूरी है। यूथ और आरटीआई विषय पर आयोजित किए गए इस सेमिनार में राज्य सूचना आयुक्त ने विस्तार से यह भी बताया कि किस तरह से जानकारी लेने के लिए आवेदन लगाया जाता है। इसके बाद अपील कैसे होती है और समय पर जानकारी नहीं देने पर संबंधित लोक सूचना अधिकारी पर जुर्माना एवं विभागीय कार्रवाई का भी प्रावधान है।

इस दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केदारनाथ सिंह यादव ने कहा कि सूचना का अधिकार नियम के उपयोगिता और दुरुपयोग दोनों पक्ष हैं। एक ओर लोग इसके जरिए जानकारियां जुटा लेते हैं और कई खुलासे करते हैं तो दूसरा पहलू यह भी है कि दुरुपयोग भी किए जा रहे हैं। कार्यक्रम को प्रभारी कुलसचिव लाल साहब सिंह, प्रो. अतुल पाण्डेय ने भी संबोधित किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के प्रो सीडी सिंह, प्रो विजय अग्रवाल, प्रो. अंजली श्रीवास्तव, प्रो. आरएन सिंह, प्रो. एपी मिश्रा, प्रो. डीएस बघेल, प्रो. आरएन पटेल, प्रो. शुभा तिवारी, प्रो. नविता श्रीवास्तव, प्रो. महेश चंद्र श्रीवास्तव, प्रो पीके राय, प्रो. श्रीकांत मिश्रा, वित्त नियंत्रक प्रवीण कुमार सिंह, उपकुलसचिव नीरजा नामदेव एवं विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी, कर्मचारियों के साथ ही कई विभागों के छात्र मौजूद रहे। राज्य सूचना आयुक्त ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned