रीवा. भारत की विविध संस्कृतियों की विरासत का राष्ट्रीय महोत्सव इन दिनों रीवा में आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के पहले दिन भारत की साझा संस्कृति विरासत की शानदार झलक देखने को मिली। टीआरएस कॉलेज के एनसीसी ग्राउंड में कलाकारों का संगम हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सांसद जनार्दन मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वल कर दिया। इस दौरान उन्होंने यह आयोजन रीवा संभाग के लिए ऐतिहासिक है। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकर ने इस आयोजन के लिए रीवा का चयन कर विंध्य की महत्ता को बढ़ाया है। पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ला, महापौर ममता गुप्ता, पूर्व मंत्री पुष्पराज सिंह, विधायक केपी त्रिपाठी, जिपं. उपाध्यक्ष विभा पटेल सहित संभागायुक्त डॉ. अशोक कुमार भार्गव, कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव, एसपी आबिद खान सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी, कृष्णानंद पाण्डेय एवं नगर के प्रबुद्धजन व कलाकार मौजूद रहे। कार्यक्रम के संयोजक इंद्रजीत ग्रोवर ने आभार जताया।

संस्कृति महोत्सव के मंच पर कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक की लोक कला का संगम देखने को मिला। उप्र से चरकुला, बंगाल से नरूआ, उडि़सा से गौरीपुआ, मणिपुर से लाई हरोवा, महाराष्ट्र से काली लावड़ी, तेलंगाना से माथुरी, गुजरात से महारास, लद्दाख से जेब्रो आदि कलाओं का एक मंच पर एक साथ प्रस्तुति ने कार्यक्रम में जान फूकी दी। पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने रीवा में शाम को यादगार बना दिया। अपने आवाज के जादू से ऐसा जलवा बिसेरा से सभी झूमने पर मजबूर हो गए। मालिनी ने ढुमरी, कजरी, सोहर की शानदार प्रस्तुति दी। जैसे मानों वे पांच दशन के पिछले संस्कृति एवं सम्यता से जोड़ रही हों। मालिनी अवस्थी ने पिया को परदेस लेकर जाने वाली सौतन रेलिया को सुरों से महफिल सजाया। सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया। अवधी लोकगीतों से महफिल सजाई।

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