रीवा. राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार का दिन उन कई परिवारों के लिए खुशियां लेकर आया जो कि लंबे समय सें न्याय के लिए कोर्ट की दहलीज पर चक्कर काट रहे थे। इनमें कई परिवार ने झगड़े को समाप्त कर फिर विवाह रचा कर जीवनसाथी के साथ घर चले गए। वहीं उन परिवारों के आंखों में चेक मिलने के बाद आंसू छलक आए जिन्होंने सड़क दुर्घटना में अपना सहारा खो दिया था। त्वरित व सस्ता न्याय के लिए आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 1601 मामले सहमति के आधार पर निराकृत किए गए। वहीं निराकृत मामलों में 7 करोड़ 33 लाख रुपए का अवार्ड पारित किया गया है। इन मामलों में न किसी की जीत हुई और न ही किसी की हार।जिला न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सुबह जिला सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंह ने सरस्वती मां की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्जवलित कर राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया। लोक अदालत में 10735 न्यायालयों में लंबित मामले एवं 11229 मामले प्री लिटीगेशन के रखे गए थे। इसके लिए गठित 40 खंडपीठ में 1601 मामलों में पक्षकारों की सहमति मिलने पर निराकृत किए गए है। इस दौरान जिला सत्र न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत में मामले निराकृत होने से यह हमेशा के लिए समाप्त हो जाते है। वहीं लोगों में आपसी प्रेम भी बना रहता है। यही कारण है लोक अदालत के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ रहा है।

इस अवसर पर राज्य उपभोक्ता संघ के अध्यक्ष शिवेन्द्र उपाध्याय, उपाध्यक्ष बीडी द्विवेदी, कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रामजी पटेल एवं वाचस्पति मिश्रा, विशेष न्यायाधीश उमेश पांडव, प्रथम अपर जिला न्यायाधीश गिरीश दीक्षित, द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश मोहम्मद शकील खान, तृतीय अतिरिक्त न्यायाधीश सुधीर सिंह रौठौर सहित अन्य न्यायाधीशगण मौजूद रहे। राष्ट्रीय लोक अदालत में पीएचई विभाग के कर्मचारी का पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। परिवार न्यायायल में गठित खंडपीठ में समझाईश के बाद वे राजी हुए। दोनों पति-पत्नी की उम्र 40 साल से अधिक है। पत्नी के गांव में रहने के कारण विवाद हो गया जो लंबे समय से चल रहा था। लोक अदालत मे उनको समझाइश दी गई इसके बाद वे खुशी से घर गए। वहीं आशा यादव का पति मुनेश यादव से अनबन चल रही थी। इनका भरण पोषण का मामला चल रहा था। जिनकों भी समझाइश दी गई जिसपर वे एक साथ रहने को राजी हो गए। कुल 30 परिवारों को फिर से मिलाया गया।

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