रेलवे की इस ट्रेन में यात्रा करने के दौरान 24 घंटे का उपवास रखते है यात्री, जानिए क्यों

रीवा राजकोट में 14 सौ की जगह में 3हजार से अधिक यात्री सफर करते है।जनरल कोच का शौचालय बंद रहता है। इसलिए 24 घंटे उपवास करनी पड़ती है।

By: Lokmani shukla

Published: 27 Nov 2019, 12:42 PM IST

रीवा. यहां रोजगार नहीं मिला इसलिए मिठाईलाल पटेल निवासी मझौली घर छोड़कर राजकोट जा रहे है। ट्रेन टिकट व जगह मिल जाए। इसके लिए वह सुबह 11 बजे से स्टेशन में बैठे है। वहीं कुछ साथी को सतना भेज दिया है। वजह है कि राजकोट में किसी तरह सीट में जाए। ट्रेन के इंतजार में बैठे युवक ने बताया हमारी चिंता कहां राजकोट तक जेल में बंदी की तरह यात्रा करती है। जनरल कोच का शौचालय बंद रहता है। इसलिए 24 घंटे उपवास करनी पड़ती है। महिला यात्रियों के लिए और यह यात्रा और कठिन है। सोमवार को जाने रीवा राजकोट में 14 सौ की जगह में 3हजार से अधिक यात्री सफर करते है। फेरे व कोच नहीं बढ़ा पाने विफल रहे क्षेत्रीय सांसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे है।

बताया जा रहा है कि विंध्य में पंद्रह सालों से कोई बड़ा उद्योग नहीं है। ऐसे में काम की तलाश में बड़ी संख्या में गरीब श्रमिक गांव व घर छोड़कर गुजरात जा रहे है। परिणाम स्वरुप सप्ताह में एक दिन जाने वाली राजकोट ट्रेन में यात्रियों की भारी भीड़ रहती है। 90 कोच की जनरल डिब्बे ४ सौ से अधिक यात्री बैठते है। ऐसे में जो जहां बैठ गया है वह वहीं होकर रह जाता है। बाहर निकलना भी मुश्किल होता है । वहीं रीवा से शौचालय में बंद कर वहां भी यात्री बैठ जाते है। चौबीस घंटे से अधिक का सफर यात्री इसी तरह बैठे- बैठे बितातें है।

तीन साल चल रहा है प्रयास-
रीवा राजकोट की बढ़ती भीड़ व यात्रियों की असुविधा को लेकर पश्चिम मध्य रेलवे पिछले तीन सालों से कोच बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। लेकिन अभी तक कोच नहीं बढ़ पाए है। यह महज 17 कोच की ट्रेन है। जिसमें 8 शयनयान 1 एसी, दो एसएलआर एवं छह जनरल डिब्ले है। इनमें लगभग 14 सौ यात्री यात्रा कर सकते है लेकिन इसमें प्रति सप्ताह ३ हजार से अधिक यात्री यात्रा करते है।

बढ़ाए जा सकते है 8 कोच-
बताया जा रहा है रीवा प्लेटफार्म में 24 कोच की गाडिय़ा अन्य रुटो पर चल रही है। ऐसे में रीवा राजकोट में 8 कोच आसानी से बढ़ाए जा सकते है। जिससे यात्रियों को काफी राहत मिल सकती है। लेकिन यह ट्रेन दूसरे जोन की होने के कारण पश्चिम मध्य रेलवे इस ट्रेन में कोच नहीं बढ़ा पा रहा है। कोच बढ़ाने के बाद काफी हद तक यात्रियों को राहत मिल सकती है।

जनरल टिकट में भी ओवर चार्जिंग-
इस ट्रेन में सबसे अधिक गरीब श्रमिक सफर करते है। ऐसे में टिकट काउंटर में भी इन गरीबों से जमकर ओवर चाॢजंग की जाती है। ट्रेन पकडऩे व जल्दी जाने के चक्कर में यह यात्री शिकायत भी नहीं कर पाते है।

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