रीवा के फूड कंट्रोलर पर सूचना आयोग ने 1100 रुपए जुर्माना लगाया, वजह ऐसी जो प्रदेश में पहली बार सामने आई

- 48 घंटे के भीतर सूचना नहीं देने और आयोग की नोटिस पर उचित जवाब नहीं देने के चलते हुई कार्रवाई

By: Mrigendra Singh

Published: 19 Mar 2020, 08:48 PM IST


रीवा। जिले के फूड कंट्रोलर पर राÓय सूचना आयुक्त ने 1100 रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके पहले नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। आयोग ने यह जुर्माना फूड कंट्रोलर पर व्यक्तिगत रूप से अधिरोपित किया है। बताया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने फूड कंट्रोलर के कार्यालय में आवेदन लगाया था। जिसमें गंगेव जनपद के सरई कला ग्राम पंचायत में खेलाड़ी कोल और लालमणि यादव को मिलने वाले खाद्यान्न की जानकार मांगी थी। इस मामले में यह कहा गया था कि दोनों हितग्राहियों को खाद्यान्न नहीं मिलने की वजह से उनके सामने भोजन का संकट है। सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कि यदि कोई विषय किसी के जीने और भोजन के अधिकार से जुड़ा है तो 48 घंटे के भीतर सूचना देनी है। फूड कंट्रोलर ने इसे सामान्य आवेदन की तरह ही लिया और निर्धारित समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। जिसके बाद इसकी अपील अपर कलेक्टर के यहां लगाई गई। वहां से भी समय पर जानकारी देने संबंधी कोई प्रयास नहीं किया गया। इसकी शिकायत अधिनियम की धारा 18 के तहत राÓय सूचना आयोग में की गई। जहां से राÓय सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित रूप से सुनवाई करते हुए फूड कंट्रोलर राजेन्द्र सिंह ठाकुर को नोटिस देते हुए निर्देश दिया कि आवेदक को 24 घंटे के भीतर जानकारी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही कलेक्टर से भी मामले में रिपोर्ट मांगी गई। फूड कंट्रोलर ने जानकारी तो उपलब्ध करा दी लेकिन अपने जवाब में कई ऐसे तथ्यों का उल्लेख किया जिसमें वह स्वयं ही घिर गए। इनका तर्क था कि गांव से जुड़ी जानकारी है तो वहां पर आवेदन लगाया जाना चाहिए। अन्य कई तर्क दिए लेकिन आयोग इनसे सहमत नहीं हुआ। साथ ही आदेश जारी कर 1100 रुपए का जुर्माना भी लगा दिया है।


- अपर कलेक्टर ने गलती मानी और व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया
अपीलीय अधिकारी अपर कलेक्टर इला तिवारी को भी राÓय सूचना आयोग की ओर से नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। जिसमें आवेदक ने आरोप लगाए थे कि अपील करने के दौरान उनके यहां से पावती नहीं दी गई है। ऐसे कार्य को आयोग ने अनुचित मानते हुए जवाब मांगा था। अपर कलेक्टर ने जवाब दिया है कि उक्त विषय उनके संज्ञान में नहीं आया था। अब जानकारी सामने आई है तो इसके लिए नोटसीट चलाकर कलेक्टर के माध्यम से यह व्यवस्था बनाई जा रही है कि सभी लोक सूचना अधिकारी एवं अपीलीय अधिकारी के यहां पावती देने की व्यवस्था होगी। भविष्य में सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों में गंभीरता बरतने का आश्वासन दिए जाने पर आयोग ने भी सहमति जताते हुए क्लीन चिट दे दी है।

Mrigendra Singh Reporting
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