रीवा. मण्डप कला केंद्र ने नाटक माया का मंचन किया। जिसमें नारी को सुरक्षा के लिए खुद सशक्त होने प्रेरित किया गया। नाटक में भगवान कृष्ण अपनी ही बनाई हुई धरती में भ्रमण करने के लिए आते हैं और घूमते हैं। इस दौरान भांति भांति प्रकार के लोगों से मिलते हैं। आधुनिक टेक्नोलॉजी के हिसाब से ढ़लते भी हैं। लोगों की समस्याओं का निवारण करते हैं । परंतु एक दृश्य देखकर उनका मन विचलित हो जाता है । कृष्ण कहते हैं हर युग में मैं तो नहीं आऊंगा पर दु:शासन रहेगा इसलिए द्रौपदी को अपनी रक्षा स्वयं करनी होगी। नारी को सशक्त रूप में दिखाते हुए नाटक का अवसान हो जाता है।

नाट्य कार्यशाला में भारतेंदु नाट्य अकादमी से प्रशिक्षित राकेश कुमार ने नाट्य पाठ, कहानी पाठ, तालवाद्य मध्य बताया। मनुरिका विश्वकर्मा ने मोडुलेशन बॉडी लैंग्वेज की शिक्षा दी। वरिष्ठ रंगकर्मी विपुल सिंह गहरवार ने निर्देशन किया। बच्चों को नाटक - माया का अभ्यास करवाया। नाट्य प्रस्तुति की बारीकियां भी बताई। आर्ट प्वाइंट के संचालक सुधीर सिंह, पार्षद मनीष नामदेव और पुष्पेन्द्र सिंह कार्यक्रम में शामिल हुए। नाटक के सभी पात्र छोटे छोटे बच्चे रहे। इन बच्चों ने नाट्य कार्यशाला में भाग लेकर अपने अभिनय कौशल को निखारा। बच्चों का मनोहारी अभिनय देखकर दर्शकों ने ज़ोरदार तालियां बजाई और सभागार तालियों से गूंज उठा। नाटक माया का लेखन तथा निर्देशन विपुल सिंह ने किया।

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