RTI : जानकारी नहीं देने पर सूचना आयोग सख्त, इस IAS की तय कर दी जवाबदेही, मचा हड़कंप

- सूचना का अधिकार अधिनियम की अवहेलना पर आयोग की बड़ी कार्रवाई
- उच्च शिक्षा की एसीएस सलीना सिंह को बनाया डीम्ड लोक सूचना अधिकारी, तलब की रिपोर्ट

By: Mrigendra Singh

Updated: 02 Jul 2019, 11:05 AM IST

 

रीवा। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। उच्च शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सलीना सिंह को डीम्ड लोक सूचना अधिकारी नियुक्त करते हुए आठ जुलाई से पहले जानकारी तलब की है। वहीं जतना कालेज रीवा के प्रभारी प्राचार्य देवेन्द्र गौतम को नोटिस जारी कर पूछा गया है कि समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के मामले में क्यों न उन पर २५ हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाए। इतना ही नहीं विभाग को लापरवाही की वजह से अपीलार्थी को दस हजार रुपए का हर्जाना देने का भी निर्देश दिया है। इस कार्रवाई के बाद उच्च शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने उन दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी है, जो सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगे गए थे।
बताया गया है कि रिटायर्ड प्राध्यापक टीपी तिवारी ने जनता कालेज से चार बिन्दुओं पर जानकारी मांगी थी। कालेज प्रबंधन की ओर से जानकारी नहीं दी गई, उच्च शिक्षा विभाग में भी अपील की लेकिन कोई असर नहीं हुआ तो वह हाइकोर्ट चले गए। जहां से कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को निर्देशित किया कि जानकारी उपलब्ध कराएं।

इस मामले में आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक से जानकारी मांगी। जहां पर विभाग ने जानकारी उपलब्ध नहीं कराने का कारण यह बताया कि अपीलार्थी ने यह लिखकर दिया है कि उन्हें अब जानकारी नहीं चाहिए। इसके बाद अपीलार्थी टीपी तिवारी फिर राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के पास पहुंचे और जानकारी उपलब्ध नहीं कराने का आवेदन दिया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को एक साथ बुलाकर जानकारी ली तो दोनों की ओर से अपने पक्ष रखे गए। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आयुक्त ने विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव को डीम्ड लोक सूचना अधिकारी नियुक्त करते हुए पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।


- जानकारी नहीं देने पर एसीएस भी कार्रवाई के दायरे में
आयोग के आदेश की अवहेलना से नाराज सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने विभाग की एसीएस सलीना सिंह को डीम्ड लोक सूचना अधिकारी बनाया है। आठ जुलाई को उन्हें मामले की रिपोर्ट सौंपनी है। यदि इस अवधि में कार्रवाई नहीं की गई तो अधिनियम की धारा २०(१) एवं २०(२) के तहत वह भी कार्रवाई की दायरे में आएंगी। उन पर उसी तरह की कार्रवाई होगी जो अन्य लोक सूचना अधिकारियों पर होती है। यदि ऐसा हुआ तो यह अलग ही मामला होगा जब एसीएस जैसे पद के बड़े अधिकारी पर कार्रवाई होगी। विभाग की लापरवाही पर पहले ३ हजार रुपए का हर्जाना था, जिसे बढ़ाकर अब दस हजार रुपए कर दिया गया है। विभाग को यह राशि भी निर्धारित अवधि में अपीलार्थी को देनी होगी।


- यह जानकारी मांगी गई थी
अपीलार्थी टीपी तिवारी की ओर से जनता कालेज से करीब दो साल पहले जानकारी मांगी थी कि १९९५ में कालेज के प्राचार्य का नाम, उस वर्ष कालेज में की गई नियुक्तियों की जानकारी, नियुक्ति कमेटी के सदस्यों के नाम, समाचार पत्र में प्रकाशित विज्ञापन की छायाप्रति। बताया जा रहा है कि कालेज में प्राचार्य के प्रभार को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, अलग-अलग समय पर प्रभार बदलते रहे। इसी बीच कालेज की महत्वपूर्ण फाइलें गायब कर दी गई हैं। कहा जा रहा है कि जो जानकारी मांगी जा रही है, यह भी उसी का हिस्सा है।


- फर्जी हस्ताक्षर के आरोप की जांच करा रहे एसपी
आयोग के सामने सुनवाई के दौरान इस मामले में फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला सामने आया है। विभाग ने एक आवेदन आयोग को सौंपा है, जिसमें अपीलार्थी ने लिखकर कहा है कि उन्हें जानकारी की आवश्यकता नहीं है। इसमें उन लोगों ने भी गवाही दी है, जो उस दौरान मौजूद थे। इस हस्ताक्षर को अपीलार्थी टीपी तिवारी ने कूटरचित बताते हुए स्वयं का होने से इंकार किया है। जिसके चलते मामले की जांच के लिए आयोग ने एसपी रीवा को पत्र भेजा था। इस पर पुलिस ने उच्च शिक्षा के एडी कार्यालय से उक्त आवेदन से जुड़ी फाइलें जब्त कर ली हैं। इस हस्ताक्षर की फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
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हाईकोर्ट से हमें निर्देश मिला था, जिस पर उच्च शिक्षा विभाग ने निर्देश के बावजूद जानकारी नहीं दी है। इसलिए एसीएस सलीना सिंह को डीम्ड पीआइओ बनाकर नि:शुल्क जानकारी देने का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा है। प्रभारी प्राचार्य को जुर्माने का नोटिस दिया है, साथ ही आवेदन में फर्जीवाड़े का जिक्र आया है, जिसकी जांच एसपी रीवा को करने के लिए कहा है।
राहुल सिंह, राज्य सूचना आयुक्त
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आयोग के निर्देश पर पुलिस को वह सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं, जो अपीलार्थी की ओर से बतौर आवेदन दिए गए थे। इसमें वह भी शामिल है, जिसमें मांगी गई जानकारी की आवश्यकता नहीं होने का उल्लेख है।
डॉ. प्रभात पाण्डेय, ओएसडी उच्च शिक्षा

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Mrigendra Singh Reporting
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