30 हजार परिवारों को संबल का इंतजार, पात्रता का नहीं तय हो पाया पैमाना

- सरकार की कोई गाइड लाइन नहीं आने से आवेदन नहीं ले रहा निगम प्रशासन

 

By: Mrigendra Singh

Updated: 20 Jul 2020, 11:01 AM IST

रीवा। प्रदेश सरकार ने एक बार फिर से संबल योजना की शुरुआत तो कर दी है लेकिन इसमें पंजीकृत हितग्राहियों में बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों का है जिन्हें अपात्र किया जा चुका है। ऐसे अपात्र लोगों की संख्या 30 हजार से अधिक है। सरकार ने योजना को दोबारा शुरू किया है लेकिन इन लोगों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जनकल्याण संबल योजना के पोर्टल पर इन लोगों को अपात्र किया जा चुका है, जिसकी वजह से कोई भी आवेदन उनका स्वीकार नहीं हो रहा है। पोर्टल पर आवेदन स्वीकार नहीं होने की स्थिति पर अब नगर निगम ने हितग्राहियों का आवेदन लेना ही बंद कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि आवेदन लिए जाने के बाद हितग्राही केवल इसलिए चक्कर लगाता है कि उसे सहायता राशि कब मिलेगी। सरकार की ओर से इसके लिए गाइडलाइन तय की जा रही है। संबल योजना प्रदेश की भाजपा सरकार की महत्वाकांछी योजनाओं में से एक है।

इस वजह से सरकार बदलते ही कांग्रेस सरकार ने इसे बंद करते हुए नया सवेरा नाम से योजना की शुरुआत की थी। कांग्रेस की सरकार गई तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संबल योजना को फिर से लागू करने का ऐलान किया। इसके बाद से पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिलने लगा है। करीब 30 हजार की संख्या में अपात्र किए गए हितग्राहियों को लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है।

- सत्यापन के बाद किए गए थे अपात्र

संबल योजना का नाम बदलकर कांग्रेस सरकार ने नया सवेरा के नाम से योजना शुरू की थी। दोनों योजनाओं के स्वरूप में आंशिक बदलाव था। इसके पहले संबल के लिए नगर निगम रीवा में 47 हजार 965 पंजीकृत हितग्राही थे, जिनका सत्यापन कराया गया था। इसके लिए नगर निगम ने डोरटूडोर कर्मचारियों को भेजकर इस सूची का सत्यापन कराया था। जिसमें 30 हजार 536 नाम ऐसे थे जो निर्धारित पात्रता के विपरीत हैं। कई इनकम टैक्स भुगतान करने वाले लोग थे तो कुछ सरकारी कर्मचारियों का नाम भी जोड़ दिया गया था। निर्धारित पात्रता के अनुरूप नहीं पाए जाने पर अपात्र घोषित किया गया था। इनका नाम अब भी संबल योजना के पोर्टल पर है लेकिन उसमें अपात्र लिखा गया है।

- योजना को लेकर रीवा में शुरू से रहा है विवाद

संबल योजना में विवाद की शुरुआत रीवा से ही हुई थी। पहले मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले कार्ड वितरण पर आपत्ति उठाई गई फिर कार्ड वितरण के लिए बनाई गई समिति में भाजपा के लोगों की संलिप्तता पर सवाल उठे। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष अजय मिश्रा एवं कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद रामप्रकाश तिवारी डैडू ने निगम कार्यालय में इसका विरोध किया तो अधिकारी, कर्मचारी भी उनके विरोध में उतर आए। यह मामला राजनीतिक रूप लेकर कई दिनों तक सुर्खियों में रहा। कांग्रेस ने प्रदेश स्तर पर इस मनमानी का उदाहरण दिया था।

- इन कार्यों के लिए दी जाती है सहायता

संबल योजना के तहत अंत्येष्टि सहायता, अनुग्रह(मौत और दुर्घटना), प्रसव पूर्व प्रोत्साहन राशि, प्रसव बाद सहायता राशि, आयुष्मान भारत योजना के तहत सहायता, मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना के तहत सहायता, शिक्षा प्रोत्साहन लाभार्थी, सरल बिजली बिल, समाधान बिजली बिल सहित अन्य कई मामलों में सहायता उपलब्ध कराई जाती है। शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण इलाकों के लोगों को भी योजना का लाभ दिया जाता है।

- नया पंजीयन भी नहीं हुआ प्रारंभ

संबल योजना के हितग्राहियों का चयन करने के लिए नए सिरे से पंजीयन कराने की घोषणा भी मुख्यमंत्री की ओर से की गई थी। इसके लिए अब तक नगर निगम के पास कोई आदेश नहीं आया है। इतना ही नहीं पोर्टल पर भी कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है। रीवा शहर में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जो निर्धारित मानकों के अनुरूप योजना के लिए पात्रता रखते हैं लेकिन उनका पंजीयन नहीं होने की वजह से लाभ से वंचित हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण की वजह से लोगों को कम संख्या में निगम कार्यालय जाने के लिए कहा जा रहा है इसके बाद भी हर दिन दर्जनों की संख्या में लोग संबल योजना से जुड़ी जानकारी लेने के लिए निगम कार्यालय का चक्कर लगाते हैं।

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संबल योजना शासन ने फिर शुरू कर दी है, जिसके तहत आवेदन लिए जा रहे हैं और हितग्राहियों को लाभ भी मिल रहा है। पूर्व में सत्यापन के दौरान जो अपात्र घोषित हुए थे उनके संबंध में कोई गाइडलाइन शासन की नहीं आई है।

अशोक सिंह, नोडल अधिकारी संबल योजना

Mrigendra Singh Reporting
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