MP में धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर का खौफनाक चेहरा, जान कर रह जाएंगे दंग

-निजी अस्पताल नहीं गया मरीज तो इलाज से इंकार करने का आरोप
-रीवा के श्यामशाह मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियालिटी ब्लॉक का मामला

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 16 Sep 2021, 01:51 PM IST

रीवा. आमतौर पर डॉक्टरों को धरती का भगवान माना जाता है। हाल के कोरोना काल में इन डॉक्टरों ने दिन-रात एक कर अपना पूरा वक्त मरीजों की सेवा में बिता दिया। इन्हें कोरोना वारियर का दर्जा दिया गया। हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा तक हुई। लेकिन इसी पेशे से जुड़े कुछ डॉक्टरों ने पेशे को बदनाम कर दिया है। ऐसा ही एक केस रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियालिटी ब्लॉक से आई है। आरोप है कि एक न्यूरो सर्जन ने एक मरीज का इलाज करने से इसलिए इंकार कर दिया कि मरीज के परिजन डॉक्टर की सलाह पर उसे निजी अस्पताल लेकर नहीं गए। अब इस मामले में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ मनोज इंदुलकर का कहना है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। मरीज की गंभीर हालत के मद्देनजर उसे सुपर स्पेशियालिटी हॉस्पिटल में भर्ती करना चाहिए।

बता दें कि जिले के सरकारी अस्पतालों की ऐसी हालत पर जिले के कलेक्टर भी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। लोगों की शिकायत पर वह खुद अस्पताल पहुंचे थे और चार घंटे अस्पताल में बिताने के साथ ही व्यवस्था पर गहरी नाराजगी जताई थी। लेकिन उसके बाद भी श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियालिटी ब्लॉक से ऐसी सूचना आई है जिसे सुनकर ही धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों पर से आमजन का विश्वास ही डोल जाए। अब मरीज के परिजनों से जिला कलेक्ट से मिल कर शिकायत करने की तैयारी में हैं। जानकारी के अनुसार मरीज के बेटे भारतीय सेना के जवान हैं।

जानकारी के मुताबिक सीधी के मूल निवासी एयरफोर्स के जवान आकाश सिंह चौहान के 60 वर्षीय पिता देवेन्द्र सिंह को 9 सितंबर को ब्रेन स्ट्रोक आया तो परिजन उन्हें लेकर सीधी से रीवा आए और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल गए। आरोप है कि यहां उन्हें भर्ती न कर उन्हें न्यूरो सर्जन डॉ दिनेश पटेल के पास परामर्श के लिए भेज दिया गया। परिजन मरीज को लेकर दिनेश पटेल के क्लीनिक में पहुंचे तो वहां कई जांच कराई गई। जांच के बाद डॉ दिनेश पटेल ने देवेंद्र सिंह को सिरमौर चौराहा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। इस पर देवेंद्र के बेटे आकाश चौहान ने डॉक्टर से पिता को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर करने का आग्रह किया लेकिन वह इसके लिए राजी नहीं हुए। उन्होंने करीब 3 से 4 हजार रुपए की दवा भी दी और मरीज को निजी अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन देवेंद्र के बेटे व अन्य परिजन उन्हें लेकर सीधे सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंच गए। यहां का स्टॉफ मरीज को भर्ती करने के लिए तैयार नहीं हो रहा था।

फिर परिजनों ने काफी मिन्नत की साथ ही कुछ बड़े लोगों से पैरवी करवाई तो डॉक्टर मरीज को भर्ती कर लिया। लेकिन बताया जा रहा है कि भर्ती करने के बाद इलाज शुरू नहीं हुआ। आरोप है कि अगले दिन डॉक्टर राउंड पर आए तो मरीज को देखा तक नहीं। परिजनों के अनुसार डॉक्टर ने साफ कहा कि, जहां भर्ती करने को कहा थावहां भर्ती नहीं हुए, इसलिए यहां इलाज नहीं होगा। इसके बाद बिना इलाज और जांच के 13 सितंबर को मरीज को डिस्चार्ज भी कर दिया गया। मरीज के बेटे आकाश का कहना है कि इसके बाद वो मरीज को लेकर सीधे नागपुर गए जहां 15 सितंबर को इलाज के बाद वापस लौटे। मरीज के परिजनों का कहना है कि अब वो कलेक्टर से मिलकर संबंधित डॉक्टर की शिकायत करेंगे। परिजनों ने डॉक्टर पर कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

इस जघन्य कृत्य के सामने आने के बाद स्थानीय लोग तरह-तरह के आरोप लगाने लगे हैं। बताते हैं कि ऐसे ही कई अन्य मरीज और परिजनों के साथ हो चुका है। एक मरीज तो इतना तंग हो गया कि वह उसी निजी अस्पताल की दूसरी मंजिल से कूद गया था। वो भी इन्हीं डॉक्टर का पेशेंट था।

लोगों का कहना ह कि आए दिन ऐसे केस यहां मिलते ही रहते हैं। आरोप है कि दरअसल सुपर स्पेशलिटी के कुछ चिकित्सकों का निजी अस्पतालों से है साठगांठ है, जिसके तहत वो मरीजों सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में भर्ती न करके निजी अस्पताल में भेजते हैं। इतना ही नहीं आरोप यह भी है कि यहां के कई डॉक्टरों के खुद के निजी अस्पताल और क्लीनिक हैं तो कई निजी अस्पतालों में हिस्सेदार भी हैं। ऐसे में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के मरीजों को निजी अस्पताल भेजा जाता है।

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