MP में प्राध्यापक 20 जुलाई तक रोज दो घंटे देंगे धरना, ये है बड़ी वजह

Manoj singh Chouhan

Publish: Jul, 13 2018 02:30:21 PM (IST) | Updated: Jul, 13 2018 02:30:22 PM (IST)

Rewa, Madhya Pradesh, India
MP में प्राध्यापक 20 जुलाई तक रोज दो घंटे देंगे धरना, ये है बड़ी वजह

कार्य बहिष्कार कर एपीएस में पहुंचे प्राध्यापक

रीवा. सातवें वेतनमान की मांग को लेकर गुरुवार को महाविद्यालयों के प्राध्यापक कार्य बहिष्कार कर अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय पहुंच गए। वहां विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ मिलकर सभी ने प्रशासनिक भवन में धरना दिया। प्राध्यापकों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो हड़ताल और तेज करेंगे।
शासन की उदासीनता के विरोध में शुरू आंदोलन के तहत प्राध्यापकों ने गुरुवार को दो घंटे पहले ही कार्य बहिष्कार कर दिया। दोपहर तीन बजे के बाद शाम पांच बजे तक विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों के साथ महाविद्यालय के प्राध्यापकों ने भी धरना दिया।

अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष प्रो. एपी मिश्रा ने नेतृत्व में धरनारत प्राध्यापकों ने निर्णय लिया कि उनका दो घंटे का कार्य बहिष्कार 20 जुलाईतक अनवरत जारी रहेगा। इस दौरान प्राध्यापकों ने शासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए आक्रोश जाहिर किया।

धरना में प्रो. रहस्यमणि मिश्रा, प्रो. विजय अग्रवाल, प्रो. राजीव दुबे, प्रो. एसएल अग्रवाल, प्रो. जेपी सिंह, प्रो. आरएन पटेल, प्रो. अतुल पांडेय, प्रो. आरएन सिंह, प्रो. सुनील तिवारी, प्रो. महेश चंद्र श्रीवास्तव, प्रो. अंजली श्रीवास्तव, प्रो. शुभा तिवारी, डॉ. विभा श्रीवास्तव, प्रो. मृदुला श्रीवास्तव व प्रो. दीपा श्रीवास्तव सहित अन्य प्राध्यापक शामिल रहे।

समर्थन में पहुंचे सेवानिवृत्त एडी

उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक कार्यालय से सेवानिवृत्त हुए पूर्व अतिरिक्त संचालक डॉ. विनोद कुमार श्रीवास्तव ने भी प्राध्यापकों के आंदोलन का समर्थन किया है। मांगों को जायज मानते वह धरना में शामिल हुए।

बुधवार को दो घंटे पहले कर दिया था कार्य बहिष्कार

सातवें वेतनमान को लेकर जारी आंदोलन के तहत शासकीय कॉलेजों के प्राध्यापकों ने बुधवार को दो घंटे पहले ही कार्य का बहिष्कार कर दिया था। पूर्व घोषणा के मुताबिक आंदोलन के तीसरे चरण में अब प्राध्यापक 20 जुलाई तक रोज दो घंटे दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक की हड़ताल करेंगे। बुधवार को कार्य बहिष्कार करने के बाद सभी प्राध्यापक मॉडल साइंस कॉलेज में धरना देते हुए आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया। इसमें विश्वविद्यालय के प्राध्यापक भी शामिल हुए।

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