अफसरशाही का खामियाजा भुगत रहा आम इंसान, 11 करोड़ का नुकसान

-आपसी तालमेल के अभाव में रोज टूट रही पेयजल की पाइप लाइन
-पाइप लाइन दुरुस्त करने को खोदी जा रही कंक्रीट की सड़कें

 

By: Ajay Chaturvedi

Published: 06 Jun 2020, 04:03 PM IST

रीवा. अफसरशाही का खामियाजा भुगत रहे आम इंसान। न पीने को शुद्ध जल मयस्सर न चलने को समतल सड़क। विभागीय पत्राचार लगातार जारी है, पर कोई रास्ता नहीं निकल रहा। इस रस्साकसी में आम आदमी की जेब से किस तरह कतरी जा रही इसकी किसी को रत्ती भर भी चिंता नहीं।

कहने को शहरों को आधुनिक बना कर शहरियों को बेहतरीन बुनियादी सुविधा मुहैया कराने का सपना सालों से दिखाया जा रहा है। लेकिन हकीकत इससे परे है। आम आदमी की जरूरतें पूरी करने का जिम्मा जिनके कंधों पर है वो अपने में ही मशगूल हैं। उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं कि उनके वातानुकूलित कमरों के बाहर लोग किस तरह से जी रहे हैं।
कहने के लिए लकदक रोड बनाई जा रही है, कंक्रीट की, लेकिन जहां ये सड़कें बन रही हैं उसके नीचे जो पाइपों का जाल बिछा है उसकी परवाह सड़क बनाने वाले को नहीं। वो पाइप लाइन का जाल जिसने बिछाया है उसे तब होश आता है जब लोगों को पीने का पानी मयस्सर होना बंद हो जाता है या सड़कों पर सीवर का पानी बहने लगता है और जनता सड़क पर उतर आती है। वो जिम्मेदार तब जागते हैं जब इन इंसानों की बुनियादी सुविधाओं पर सियासत शुरू हो जातीहै।

लेकिन वो जागते भी हैं क्या, नहीं वो स्टीमेट बनाते हैं और ई-मेल, ह्वाट्सएप या दफ्तरी से एक से दूसरे विभाग को आंकड़ोंका शब्दबाग भेज देते हैं। बताया जाता है कि करोड़ों, अरबों का नुकसान हो गया। समझने का फेर है अगर ये नुकसान हुआ है तो किसका। क्या ये आमजन से वसूला गया टैक्स नहीं है। लेकिन आमजन को भी अफसरशाही का वह आंकड़ा ही भाता है। उसे लगता है सरकारी धऩ का नुकसान फलां विभाग ने कर दिया।

अब यही आंकड़ेबाजी और अफसरशाही की भेंट चढ़ रही है रीवा की जनता। यहां लोगों को अत्याधुनिक बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर 11करोड़ के नुकसान का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। बताया जा रहा है कि बुनियादी सुविधा मुहैया कराने वाले दो विभागों में आपसी तालमेल न होने के कारण 11 करोड़ का नुकसान हो गया। नगर निगम कहता है कि ये क्षति लोक निर्माण विभाग ने की है। उस पर हर्जाना लगाते हुए पत्र भेज दिया गया। उधर लोक निर्माण विभाग भी सो रहा है।

दरअसल यहां कई बड़े-बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसके तहत कंक्रीट की सड़कें बनाई जा रही हैं। सड़क बनाने का काम लोक निर्माण विभाग कर रहा है। कई जगह सड़कें बना दी गईँ पर लोक निर्माण विभाग ने ये नहीं जानना चाहा कि इन सड़कों के नीचे पेयजल व सीवर की जो पाइप लाइन बिछी है उसका क्या होगा। वो तो सड़कों की लेयर बिछाता गया उस दौरान अगर पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होती है तो वो उसका काम नहीं। नगर निगम को भी उस वक्त इसकी याद नहीं आई जब सड़कों की लेयर बिछाई जा रही थी। लिहाजा जगह-जगह पानी की पाइप लाइन फट गई। कहीं सीवर लाइन में सुराख हो गया। अब नगर निगम, लोक निर्माण विभाग को पत्र भेज कर पाइप लाइन की शिफ्टिंग में आने वाले व्यय का मुआवजा मांग रहा है। कहा जा रहा है कि नगर निगम के लोक निर्माण विभाग ने लोक निर्माण विभाग को पहले ही इत्तला कर दिया था। अब रिमाइंडर भेजा जा रहा है।

सवाल सिर्फ सड़कों की लेयर बिछाने तक सीमित नहीं है। यहां एक तिराहे पर फ्लाइओवर बन रहा है। वहां भी विभागों के बीच कोई तालमेल नहीं। ये फ्लाइओवर बन रहा है समान तिराहे पर। इसके निर्माण से भी पाइप लाइन टूटी है। मेन राइजिंग पाइप लाइन ही क्षतिग्रस्त हो गई है। इस पाइप लाइन के शिफ्टिंग पर 2.45 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। ऐसे में निगर निगम ने सेतु निगम को पत्र भेजा है।

शहर में सीवर लाइन बिछाने का काम भी हो रहा है। इसके चलते भी पानी की पाइप लाइनें फट रही हैं। नगर निगम का दावा है कि इन पाइप लाइनों की मरम्मत पर 40 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। यह धनराशि ठेकेदार से मांगी जा रही है। लेकिन वह भी मस्त है। कहा तो यहां तक जा रहा कि कई जगह पाइप लाइन के ऊपर ही सीवर का चैंबर बना दिया गया है।

अब नगर निगम के कार्यपालन यंत्री एसके चतुर्वेदी का कहना है कि चौरहटा से रतहरा तक सड़क निर्माण में 8.96 करोड़ और फ्लाइओवर में 2.45 करोड़ रुपये पाइप लाइन की शिफ्टिंग में खर्च होंगे। निर्माण के चलते पाइप लाइन का नुकसान हुआ है। लिहाजा दोनों जगहों के लिए पत्र लिख कर धनराशि जमा करने को कहा गया है।

Ajay Chaturvedi
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