पांच साल से सड़कों का सत्यानाश कर रही सीवरेज की ठेका कंपनी टर्मिनेट


पत्रिका बिग इंपैक्ट--
- लगातार उठती शिकायतों के चलते मुख्यमंत्री ने दिया निर्देश, अधूरा काम छोडऩे पर नहीं होगा भुगतान

By: Mrigendra Singh

Published: 26 Sep 2021, 12:01 PM IST


रीवा। अमृत योजना के तहत शहर में चल रहे सबसे बड़े प्रोजेक्ट में एक सीवरेज प्रोजेक्ट का काम कर रही ठेका कंपनी को टर्मिनेट कर दिया गया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं की है और कहा है कि जहां पर अधूरी सड़कें छोड़ी गई हैं या फिर अन्य कार्य कराए जाने हैं उनकी राशि कंपनी के भुगतान से काटी जाए। लगातार निर्देश के बावजूद ठेका कंपनी केके स्पन द्वारा कार्य में तेजी नहीं लाई जा रही थी। साथ ही पूरे शहर में सड़कों को खोदकर ऐसे खराब किया कि उनकी नए सिरे से मरम्मत की जरूरत महसूस होने लगी है।

शहर के लोगों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा यह प्रोजेक्ट लगातार सवालों के घेरे में रहा है। मुख्य सड़क मार्ग से लेकर कालोनियों तक की सड़कों को खोदकर उनकी गुणवत्ता खराब कर दी गई है। कई जगह अधूरे गड्ढे छोड़े गए हैं तो जहां मरम्मत कराई गई है वहां पर गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है।
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए नगर निगम ने तीन वर्ष का समय निर्धारित किया था। यह अवधि पहले ही पूरी हो चुकी थी, पांच वर्ष के बाद भी प्रोजेक्ट किसी नतीजे तक नहीं पहुंचा है। अब तक प्रोजेक्ट का कार्य करीब २३ फीसदी ही पूरा हो पाया है। कई बार आरोप भी लगे कि ठेका कंपनी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने की वजह से उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और वह अपनी मर्जी के मुताबिक सड़कें खोदकर उनकी मरम्मत का कार्य नहीं करा रही है। करीब पांच वर्ष का समय पूरा होने के बाद भी सीवरेज की लाइन बिछाने का कार्य पूरा नहीं हो सका। इसके पहले भी ठेका कंपनी की लापरवाही के चलते ब्लैक लिस्टिेड करने की चेतावनी भी दी गई लेकिन उस दौरान ेकार्रवाई नहीं हुई।
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आठ महीने पहले सीएम ने समीक्षा के दौरान दी थे चेतावनी
बीते जनवरी महीने में रीवा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान नाराजगी जाहिर की थी और सीएम मानिट में शामिल करते हुए कहा था कि प्रगति रिपोर्ट वह लेकर जा रहे हैं। कागज आगे भी हाथ में रहेगा और प्रगति की पूरी रिपोर्ट लेंगे। इसके बाद होने वाली लगातार समीक्षाओं में नगर निगम के अधिकारियों से कहा जाता रहा कि कार्य में तेजी लाएं। संभागायुक्त, कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त ने लगातार कंपनी को अवसर भी दिया और कार्य में गति लाए जाने के निर्देश देते रहे। इसके बावजूद ठेका कंपनी केके स्पन अपनी मनमानी पर उतारू रही।
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गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते रहे
अमृत योजना के तहत 214.10 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में गुणवत्ता की लगातार अनदेखी होती रही। ठेका कंपनी ने कार्य के दौरान निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया और शिकायतों के बाद भी सुधार नहीं हुए। सीवर लाइन बिछाने के लिए खोदाई के बाद बेस बनाने के बाद पाइप बिछाना था लेकिन सीधे पाइप डाल दी गई। इसके साथ ही चेंबर बनाने को लेकर भी कंफ्यूजन की स्थिति रही, कहीं पर फ्लाईएश की गुणवत्ताहीन ईंटों का प्रयोग किया गया तो बाद में कांक्रीट के टूटे-फूटे चेंबर भी डाल दिए गए। सबसे अधिक सवाल सड़कों की मरम्मत को लेकर भी उठे, मरम्मत के बाद भी सड़कें धंसती रहीं। सरकर ने पीडीएमसी के इंजीनियर भी निगरानी के लिए लगाए लेकिन वह भी इसमें सुधार नहीं कर पाए।
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31 दिसंबर तक का मिला था एक्सटेंशन
शहर में सीवरेज प्रोजेक्ट का कार्य पूरा करने के लिए शुरू में 36 महीने का समय निर्धारित किया गया था। इसमें वर्षाकाल भी शामिल था। शुरुआत से ही लापरवाही पूर्वक कार्य करने के कारण समय पर कार्य नहीं हो सका। 18 नवंबर 2016 से प्रोजेक्ट के कार्य की शुरुआत हुई थी, जिसमें 17 नवंबर 2019 के पहले पूरा करना था। कंपनी की मांग पर निगम अधिकारियों ने एक्सटेंशन दिलवाया और 31 मार्च 2020 तक का समय मिला। इस अवधि में भी गति नहीं बढ़ पाई और 31 मार्च 2021 तक का फिर समय मिला। इस अवधि तक 13 प्रतिशत कार्य पूरा नहीं हो पाया था, जिसकी वजह से फिर एक्टसेशन आगामी 31 दिसंबर 2021 तक के लिए मिला था लेकिन कंपनी की लेटलतीफी की वजह से सीएम को कार्रवाई करनी पड़ी है। प्रगति की रिपोर्ट नगर निगम की ओर से शासन को भेजी गई थी, जिसमें कहा गया था कि ठीक से कार्य नहीं हो रहा है।
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टेंडर के समय से जुड़ा रहा है विवाद
सीवरेज प्रोजेक्ट शुरुआत से ही विवादों में घिरा रहा है। प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने आरोप लगाए थे कि पूर्व में सीवरेज लाइन का कार्य करने का अनुभव नहीं था फिर भी टेंडर दिया गया। यह कंपनी पाइप बनाने का काम करती रही है। इसकी शिकायत कांग्रेस पार्षद के साथ नेता प्रतिपक्ष अजय मिश्रा ने लोकायुक्त एवं इओडब्ल्यू में की थी। साथ ही नगर निगम परिषद का विशेष सम्मिलन भी बुलाया गया, उस पर भी टेंडर देने के आरोपों का सही जवाब तत्कालीन अधिकारी नहीं दे पाए थे। इसके अलावा सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने, श्रमिकों को उचित मजदूरी नहीं देने सहित अन्य कई विवादों में भी कंपनी घिरी रही।
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पहले से बनी एसटीपी का काम भी नहीं हुआ पूरा
अमृत योजना के 214.10 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट में २५ एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने हैं। पांच साल में अभी तक एक भी एसटीपी का कार्य पूरा नहीं हो सका है। जबकि पहले से झिरिया में 12 एमएलडी क्षमता का राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना(एनआरसीपी) के तहत एसटीपी बना था उसमें केवल सीवर लाइन का कनेक्शन किया जाना है। जिसके लिए पांच साल का समय लगा दिया गया। इसके अलावा दूसरे जगह एसटीपी के निर्माण विवादों में उलझे रहे। विवेकानंद नगर में भी कार्य शुरू करने के बाद रोका गया। कुछ दिन पहले ढेकहा के पास एक और भूमिपूजन हुआ है।
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शर्तों के अनुसार रोड रेस्टोरेशन नहीं
ठेका कंपनी से नगर निगम ने अनुबंध किया था कि जिस तरह की सड़कों को सीवर लाइन बिछाने के लिए खोदा जाएगा, उसी तरह से मरम्मत करके देना होगा। इसके लिए टेंडर में रुपयों का प्रावधान भी किया गया था। लेकिन कंपनी ने ठीक से कार्य नहीं किया, जिसके चलते कई जगह सड़कें धंसती रहीं और दुर्घटनाएं होती रहीं। सड़कें खराब करने की वजह से सैकड़ा भर से अधिक दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। लोग खराब सड़कों से सबसे अधिक परेशान रहे हैं।
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इन स्थानों पर बनाए जाने हैं एसटीपी
स्थान - क्षमता एमएलडी में
विवेकानंद नगर- 6.50
बिछिया पुल के पास- 6.50
पद्मधर कालोनी के पास- 06
अजगरहा रोड- 03
उद्योगविहार- 01
बनकुइयां रोड- 01
शार्कइन होटल के पास- 01
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फैक्ट फाइल
सीवरेज प्रोजेक्ट की लागत- 214.10 करोड़
सीवर लाइन की लंबाई-728
प्रोजेक्ट में चिन्हित मकान- 42933
कुल एसटीपी की संख्या- 08
एसटीपी की क्षमता- 25 एमएलडी और झिरिया में बने 12 एमएलडी को मिलाकर 37 एमएलडी
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सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए लगातार समय देने के बाद भी कार्य की गति ठीक नहीं थी। समीक्षा के दौरान सीएम ने कार्रवाई का निर्देश दिया है। जल्द ही इसका आदेश जारी कर दिया जाएगा।
मृणाल मीना, आयुक्त नगर निगम
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Mrigendra Singh Reporting
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