स्टार्म वाटर ड्रेन का 22 करोड़ का प्रोजेक्ट एक साल में करना था पूरा, पांच साल में आधे भी नहीं बने


- अमृत योजना के तहत शहर में 17 नालों का चल रहा है निर्माण कार्य
- बारिश के पानी निकासी में होती है समस्या, इसलिए शहर को मिला था प्रोजेक्ट

By: Mrigendra Singh

Updated: 11 Jun 2021, 11:37 AM IST


रीवा। शहर में स्टार्म वाटर ड्रेन के प्रोजेक्ट का कार्य प्रशासनिक उदासीनता का शिकार हो गया है। इस कार्य की शुरुआत हुए करीब पांच वर्ष पूरे हो रहे हैं लेकिन अभी तक कार्य पूरा होने की स्थिति में नहीं पहुंचा है। शहर में 17 नालों का निर्माण कराया जाना है जिससे बरसात के दिनों में मोहल्लों का पानी आसानी से निकल सके और वहां पर जलभराव की स्थिति नहीं हो। अमृत योजना के तहत 22 करोड़ रुपए की लागत का यह प्रोजेक्ट मनमानी का शिकार हो गया है और इसकी राशि में जमकर बंदरबाट किए जाने के भी आरोप लग रहे हैं। कई वार्डों के पार्षदों ने इस संबंध में निगम के अधिकारियों के साथ ही कलेक्टर से भी शिकायत की है लेकिन कहीं से भी कार्य प्रारंभ किए जाने को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। यह कार्य एक वर्ष के भीतर पूरा करना था, लेकिन करीब पंाच वर्ष का समय पूरा होने जा रहा है और अब तक आधे भी पूरी तरह से बनकर तैयार नहीं हैं। कुछ जगह ठेकेदार ने कार्य शुरू कराया है लेकिन अधूरे में ही रोक रखा है।
नगर निगम के जिम्मेदार इंजीनियर्स की मनमानी और उदासीनता शहर के लोगों पर भारी पड़ रही है। इस वर्ष भी बरसात के दिनों में शहर के उन प्रमुख हिस्सों में जलभराव की आशंका है जहां पर पहले भी समस्या होती रही है। यह प्रोजेक्ट रीवा को इसीलिए दिया गया है कि यहां जलभराव की समस्या से निजात मिल सके। लेकिन 22 करोड़ रुपए की लागत वाले प्रोजेेेेक्ट में सबसे अधिक शिकायतें सामने आ रही हैं।


- सैकड़ों की संख्या में शिकायतों की अनदेखी


नालों के निर्माण में ठेकेदार की मनमानी के चलते कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसलिए संबंधित स्थानों से सैकड़ों की संख्या में शिकायतें नगर निगम के अधिकारियों के पास पहुंचती रही हैं। करीब पांच वर्ष का समय पूरा होने की स्थिति में पहुंच रहा है, इस बीच अधिकारियों का प्रभार भी बदलता रहा लेकिन इस प्रोजेक्ट का कार्य अपनी ही मनमानी गति से चलता रहा है। नगर निगम की परिषद की बैठकों में कई बार इसके कार्य को लेकर पार्षदों की ओर से हंगामा भी मचाया गया लेकिन ठेकेदार का प्रभाव इतना अधिकारियों पर रहा है कि स्वयं विरोध सहते रहे लेकिन उससे कार्य में तेजी लाने के लिए नहीं बोल सके।

- नेताओं की पसंद पर बदलते रहे ड्राइंग
स्टार्म वाटर ड्रेन रीवा शहर की प्रमुख आवश्यकता रहा है। करीब दो दर्जन से अधिक मोहल्लों में जलभराव होता है, इसलिए समस्या समाधान के लिए इसका निर्माण आवश्यक है। नेताओं की पसंद के आधार पर कई बार अधिकारियों ने इस नाले का स्वरूप ही बदल डाला। सबसे पहले नेहरू नगर में इसका विरोध हुआ था, जहां पर इंजीनियर्स की डिजाइन के विपरीत सत्तादल के नेताओं के कहने पर नाले को संकरा किया गया और घुमाया गया। इसी तरह रतहरा, रानीतालाब सहित कई अन्य स्थानों में भी मनमानी की गई है। बताया जा रहा है कि कुछ जगह जहां पहले से कार्य का प्रस्ताव नहीं था उन क्षेत्रों में भी इसका कार्य कराया जा रहा है। बीते साल रानी तालाब से सिंधी कलोनी अशोक नगर होते हुए खलगा तक के लिए प्रस्तावित नाले का भूमि पूजन कराया गया था, उसका कार्य अधूरा है। इसी तरह एक और अखाड़घाट में फिल्टर प्लांट के पास बनाने की शुरुआत हुई थी।
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गुणवत्ता ऐसी कि जिन्हें बनाने का दावा, वह गिरने लगे


स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम के नालों की गुणवत्ता बेहद ही घटिया है। जिन स्थानों पर निर्माण कार्य पूरा किए जाने का दावा किया गया है, वहां पर अब नालो गिरने लगे हैं। यह स्थिति किसी एक जगह की नहीं बल्कि शहर के कई हिस्सों की है। शहर के नालों की गुणवत्ता को लेकर एडवोकेट टास्क फोर्स के अध्यक्ष शिव सिंह ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। जिस पर नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव को दो वर्ष पहले जांच के लिए भेजा गया था। प्रमुख सचिव ने कई हिस्सों में पहुंचकर कार्य देखा तो नाले धंस रहे थे इसके बावजूद कोई कोई सुधार नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता शिव सिंह बताते हैं कि पडऱा में एजी कालेज के पास जिस नाले को निगम के अधिकारी निर्माण पूरा होना बता रहे हैं, वह लंबे समय से धंस चुका है लेकिन मरम्मत का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। बरसात के दिनों में लोगों को समस्या होगी। निगम के अधिकारी गुणवत्ताहीन कार्य करवा रहे हैं।
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- यहां होना है नालों का निर्माण


1. शांति विहार से एजी कॉलेज(वार्ड 4) लंबाई 606 मी. लागत 1.7 करोड़ रुपए।
2. पद्मधर कलोनी(वार्ड 5) में 254 मी. लंबा नाला लागत 56.7 लाख रुपए।
3. एजी कॉलेज से चंदुआ नाला(वार्ड 3) में लंबाई 1387 मी. लागत 3.18 करोड़ रुपए।
4. चिरहुला हाउसिंग बोर्ड (वार्ड 44) में लंबाई 289 मी. लागत 45.23 लाख रुपए।
5. बोदाबाद कलोनी(वार्ड 7) में लंबाई 476 मी. लागत 68.87 लाख रुपए।
6. अरुण पार्क से अजंता टाइल्स(वार्ड 13) में लंबाई 700 मी. लागत 1.42 करोड़ रुपए।
7. वार्ड 12 से एनएच 7 में लंबाई 356 मीटर लागत 58.62 लाख रुपए।
8. वार्ड 7 सुशील तिवारी के घर तक लंबाई 204 मी. लागत 27.73 लाख रुपए।
9. अलाबक्स कलोनी वार्ड 7 में लंबाई 396 मी. लागत 60.21 लाख रुपए। एक्सटेंशन है। नाली बनाना है।
10. आनंद नगर वार्ड 8 में लंबाई 631 मी. लागत 84.58 लाख रुपए।
11. नीम चौराहा से विभीषण नगर तक वार्ड 9 में लंबाई 1031 मी. लागत 1.47 करोड़ रुपए।
12. एसएएफ से मालवीय स्कूल तक लंबाई वार्ड 26 लंबाई 2348 मी. 2.29 करोड़ लागत रुपए।
13. गुढ़हाई बाजार से खलगा नाला लंबाई 374 मी. लागत 48.18 लाख रुपए।
14. गोपाल टाइल्स वार्ड 15 में लंबाई 907 मी. लागत 1.25 करोड़ रुपए।
15. धोबिया टंकी से गुढ़ चौराहा वार्ड 28 में लंबाई 1973 मी. लागत 3.11 करोड़ रुपए।
16. केवी स्कूल वार्ड 11 में लंबाई 521 मी. लागत 84.04 लाख रुपए।
17.अमाहिया नाला वार्ड 23 में लंबाई 625 मी. लागत 84.39 लाख रुपए।

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सीधी-बात
राजेश सिंह, प्रभारी स्टार्म वाटर डे्रनेज प्रोजेक्ट नगर निगम
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सवाल- शहर में स्टार्म वाटर ड्रेनेज प्रोजेक्ट के कितने नालों का कार्य पूरा हो चुका है?
जवाब - अमृत योजना के तहत बनाए जा रहे इस ड्रेनेज प्रोजेक्ट में अब तक आठ नालों का कार्य पूरा हो चुका है। जल्द ही अन्य का भी कार्य पूरा कराया जाएगा।
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सवाल- शहर में बाढ़ की आशंका रहती है, समय पर कार्य किस वजह से पूरा नहीं हो पाया?
जवाब- इस प्रोजेक्ट की भी समय-सीमा निर्धारित थी, कार्य शुरू कराए गए हैं, ठेकेदार की मांग पर समय को बढ़ाया गया है, यह प्रक्रिया का हिस्सा है।
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सवाल- लेटलतीफी की वजह प्रशासनिक तकनीकी है या फिर ठेकेदार की लापरवाही?
जवाब- इसके लिए दोनों वजह मानी जा सकती है। कई जगह पाइपलाइन शिफ्टिंग या फिर अन्य कार्य जो निगम को कराने हैं नहीं होने की वजह से कार्य में देरी हुई है। कुछ जगह ठेकेदार द्वारा कार्य की गति धीमी करने के चलते स्थिति बन रही है।
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सवाल- ऐसी लापरवाही पर ठेकेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा है निगम ?
जवाब-- समय-समय पर नोटिस जारी की जाती रही है। साथ ही जहां पर पेनाल्टिी लगाने का प्रावधान है, वह प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। जल्द ही प्रोजेक्ट के सभी कार्य पूरे कराए जाएंगे।

Mrigendra Singh Reporting
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