सड़कों पर आवारा मवेशियों का डेरा, रेडियम टैगिंग तक नहीं करा पाया प्रशासन

- बरसात के चलते सड़क पर आए सैकड़ों की संख्या में मवेशी, लगातार हो रही दुर्घटनाएं

By: Mrigendra Singh

Published: 30 Jun 2020, 10:16 PM IST


रीवा। शहर से लेकर गांव तक की सड़कों पर इनदिनों आवारा मवेशियों का झुंड नजर आ रहा है। बरसात की वजह से मिट्टी गीली होने के कारण अब ये मवेशी सड़क पर ही बैठ रहे हैं। सुबह से लेकर रात तक सड़कों पर विचरण करने के साथ ही आराम भी करते हैं। जिसके चलते वाहन इनसे टकरा रहे हैं और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।

पूर्व में आदेश जारी हुआ था कि सड़कों पर बैठे आवारा मवेशियों के सींग और खुर में रेडियम लगाकर उनकी टैगिंग की जाए। इससे मवेशियों की वास्तविक संख्या का भी पता चल सकेगा। रीवा शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों तक में इनदिनों आवारा मवेशियों की समस्या सबसे अधिक है। ऐसे महत्वपूर्ण कार्य की अनदेखी प्रशासनिक कार्य व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।

मवेशियों की सींग पर रेडियम लगाए जाने से रात्रि के समय वाहन चालकों को दूर से ही रोशनी पडऩे पर ये दिख सकते हैं। अधिकांश ऐसा होता है कि वाहनों का प्रकाश यदि कमजोर है तो सड़क पर बैठे मवेशी नजर नहीं आ पाते और उनसे वाहन टकरा जाते हैं। पूर्व में शासन की ओर से आए निर्देश के बाद कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर कहा था कि पशु चिकित्सा विभाग के साथ समन्वय बनाकर सड़कों पर बैठे जानवरों की टैगिंग करते हुए उनकी सींग पर रेडियम लगाया जाए।

इसकी शुरुआत भी की गई थी। मार्तण्ड स्कूल के सामने बैठे मवेशियों की सींग पर रेडियम लगाया गया था। कुछ ही दिन के बाद यह अभियान बंद हुआ तो अब तक शुरू नहीं हो सका है।

- सड़कों पर दुर्घटनाग्रस्त मवेशियों की देखभाल नहीं
वाहनों की ठोकर से हर दिन मवेशी दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। बड़े वाहनों के चालक इन्हें चोटिल करने के बाद चले जाते हैं और सड़क पर ही ये तड़पते रहते हैं। कई बार स्थानीय लोगों के प्रयास से उपचार के लिए भेजे जाते हैं और बार दम तोड़ देते हैं। नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रेलवे स्टेशन के नजदीक एक मवेशी कुछ दिन पहले ही पैर कटने के चलते तड़पता रहा, सूचना के बाद भी उसके उपचार की व्यवस्था नहीं की गई।

- कालोनियों से निकलकर सड़क पर पहुंचे
सूखे मौसम में आवारा मवेशी शहर की कालोनियों में रहते हैं और वहीं के खाली प्लाटों में बैठते हैं। इनदिनों खाली प्लाटों में पानी भर गया है। जिसकी वजह से सड़कों पर ही बैठने के लिए कालोनियों से निकलकर मुख्य सड़क पर पहुंच रहे हैं। शहर की मुख्य सड़क चौड़ी है।

- लक्ष्मणबाग में रखने के पर्याप्त इंतजाम नहीं
शहर के आवारा मवेशियों को पकड़कर लक्ष्मणबाग में स्थित गौशाला में रखने का प्रावधान है। इसके लिए नगर निगम हर साल करीब दस लाख रुपए का भुगतान गौशाला को करता है। जिसमें मवेशियों का उपचार कराने और उनके भोजन की व्यवस्था करने का काम होता है। लक्ष्मणबाग गौशाला में निर्धारित संख्या से अधिक मवेशी पहले ही भेजे जा चुके हैं। कई बार गौशाला प्रबंधन की ओर से निगम के अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा गया है कि अब उनके पास मवेशियों को रखने का इंतजाम नहीं है। इसलिए अब सड़कों पर बैठने वाले मवेशियों की धरपकड़ भी नहीं की जा रही है।
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दुर्घटनाग्रस्त हो रहे राह चलते लोग

केस-1
शहर के रतहरा मोहल्ले में रात्रि के समय स्ट्रीट लाइट बंद थी। सड़क का एक हिस्सा खोदा गया है जिसकी वजह से गड्ढे हैं, जिनसे बचने के प्रयास में बाइक सवार दो युवक मवेशियों से टकरा गए। दोनों को गंभीर चोट आने से अस्पताल भेजा गया। इसी तरह एक कार सवार रात्रि में मवेशियों को अचानक देखने के चलते डिवाइडर से टकराकर जख्मी हो गया था। ऐसी घटनाए अन्य हिस्सों में भी हो रही हैं।
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केस-2
शहर के पडऱा में गत दिवस रात्रि में किसी वाहन से ठोकर की वजह से एक मवेशी दो दिन तक जख्मी हालत में पड़ा रहा। बाद में उसकी मौत हो गई। इसी तरह चिरहुला और कुठुलिया में भी इस तरह से सड़क पर बैठे मवेशियों को ठोकर मारी गई। नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग सामान्य सूचनाओं की अनदेखी भी कर रहा है।

Mrigendra Singh Reporting
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