रीवा में अवैध कालोनी पर सख्ती, हाउसिंग सोसायटी के मकान और प्लाट बिक्री पर रोक

- अल्प आय वर्ग के लिए गठित की गई थी कालोनी, लंबे समय से मिल रही थी शिकायत
- नगरीय प्रशासन के प्रमुख सचिव से भी की गई थी शिकायत


रीवा। अवैध कालोनियों के तेजी के साथ हो रहे विकास की वजह से अब नगर निगम ने सख्ती की शुरुआत कर दी है। इसी के तहत वार्ड क्रमांक 15 में विकसित की जा रही अल्प आय वर्ग की सहकारी गृह निर्माण समिति पर शिकंजा कसा गया है। नगर निगम ने अवैध कालोनियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए भूखंड और मकान की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही एक अवसर दिया है कि यदि कोई आपत्ति या दावा है तो सात दिन के भीतर प्रस्तुत करें। इस मामले में पहले भी नगर निगम ने हाउसिंग सोसायटी से कई बार जानकारी तलब की थी लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं आया। कुछ महीने पहले ही मुख्य सचिव को इसकी शिकायत की गई थी कि अवैध रूप से कालोनी का विकास किया जा रहा है। जिसके चलते मुख्य सचिव ने रिपोर्ट तलब की थी, इसके बाद निगम के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की और रिपोर्ट शासन को भेजी थी। नगर निगम आयुक्त ने अल्य आय वर्ग गृह निर्माण सहकारी सोसायटी के अध्यक्ष रमाशंकर मिश्रा को नोटिस भी जारी किया है। इन्हें भी अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का अवसर दिया गया है। नगर निगम आयुक्त की ओर से यह नोटिस मध्यप्रदेश नगर पालिका निगम अधिनियम १९५६ की धारा २९२-ड(२) के तहत हाउसिंग सोसायटी के प्लाट और मकान के खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी है।
- भूमि के स्वामित्व को लेकर चल रहा विवाद
अल्य आय वर्ग गृह निर्माण सहकारी सोसायटी द्वारा जहां पर कालोनी विकसित की जा रही है, उस भूमि के स्वामित्व को लेकर भी विवाद चल रहा है। इस पर कई जांचें पहले से ही लंबित चल रही हैं। इस मामले के शिकायतकर्ता विश्वनाथ पटेल चोटीवाला ने कई बार शिकायतें दर्ज कराई। इनकी ओर से दस्तावेज भी सांैपे गए हैं जिसमें कहा गया है कि रतहरी में ७.७९ एकड़ सार्वजनिक निस्तार की भूमि को गयाचरण वाजपेयी नाम के व्यक्ति ने कूटरचना का सहारा लेकर अपने नाम करा लिया था। साथ ही उक्त भूमि को अल्प आय वर्ग सोसायटी को बिक्री कर दिया था। जहां पर बिना किसी सक्षम स्वीकृति के मनमानी रूप से निर्माण किया जा रहा है। इतना ही नहीं नगर निगम द्वारा बनाई गई सड़क को भी खोदकर उस पर मकान बना दिया गया। इसकी शिकायत के साथ ही चोटीवाला एवं अन्य लोगों ने अनशन भी किया था तब प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
- तालाब को नष्ट कर कालोनी बसाने का भी है आरोप
रतहरी मोहल्ले में पहले एक तालाब था, पहले उसकी मेढ़(भीटा) को दस्तावेजों में निजी भूमि कराया गया, इसके बाद धीरे-धीरे उसे नष्टकर कालोनी का निर्माण शुरू किया गया। प्रशासनिक रूप से कोई कार्रवाई नहीं किए जाने के चलते यह कालोनी तालाब की ओर बढ़ती गई और अब तालाब का अस्तित्व पूरी तरह से समाप्त हो गया है। तालाब का स्वरूप बदलने के खिलाफ अधिवक्ता श्रीप्रकाश तोमर ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका लगाई है। जिस पर कलेक्टर एवं निगम आयुक्त से जवाब मांगा गया था और वहां पर चल रहे निर्माण पर रोक लगाने का निर्देश था। इस निर्देश के बाद भी मकानों का निर्माण तेजी के साथ हो रहा है।
- पहले भी कई कालोनियों का हो चुका है अधिग्रहण
नगर निगम ने कुछ दिन पहले ही शहर की कई अवैध कालोनियों का अधिग्रहण किया है। साथ ही इन कालोनियों में निगम ने अपने अधिकारियों को प्रशासक के रूप में नियुक्त भी कर दिया है। प्रमुख रूप से वार्ड क्रमांक आठ के चेलवा टोला में अवैध कालोनाइजर कमलकिशोर पटेल की २.८३३ हेक्टेयर की कालोनी का अधिग्रहण कर प्रबंधक नगर निगम के प्रभारी सहायक यंत्री एसके गर्ग को बनाया गया है। इसी तरह वार्ड १५ के रतहरा में मैनपुरी यूपी निवासी कालोनाइजर शिवाजी की ९.७१२ हेक्टेयर कालोनी में उपयंत्री सुनील मिश्रा को प्रबंधक बनाया गया है। वार्ड ४५ के कुठुलिया में प्रमोद कुमार मिश्रा की ३.०४७ हेक्टेयर की अवैध कालोनी अधिग्रहित हुई है। इस कालोनी में निगम के प्रभारी सहायक यंत्री पीएन शुक्ला प्रबंधक बनाए गए हैं। वार्ड क्रमांक १५ के रतहरा में कालोनाइजर्स गीता रानी के ३.७९६ हेक्टेयर की कालोनी का प्रबंधक प्रभारी सहायक यंत्री भूपेन्द्र सिंह बुंदेला को नियुक्त किया है। इसी तरह वार्ड क्रमांक दस के अनंतपुर में सज्जन यादव की ०.१४२ हेक्टेयर की कालोनी का अधिग्रहण कर प्रभारी सहायक यंत्री दिलीप त्रिपाठी को प्रबंधक नियुक्त किया गया है।
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शहर में जहां भी कालोनियों का विकास नियमों के अनुसार नहीं हो रहा है, उन पर कार्रवाई की जा रही है। इसी के तहत अल्प आय वर्ग सोसायटी को भी नोटिस दी गई है। सात दिन का अवसर है कि वह अपनी बातें रख सकते हैं अन्यथा अगली कार्रवाई करेंगे।
सभाजीत यादव, आयुक्त नगर निगम

Mrigendra Singh Reporting
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