शासकीय कॉलेजों में सीट बढ़ाकर प्रवेश लेना मुसीबत भरा साबित हो रहा, जानिए किस तरह परेशान हो रहे छात्र

शासकीय कॉलेजों में सीट बढ़ाकर प्रवेश लेना मुसीबत भरा साबित हो रहा, जानिए किस तरह परेशान हो रहे छात्र

Ajit Shukla | Publish: Sep, 11 2018 12:43:40 PM (IST) Rewa, Madhya Pradesh, India

कक्षा में बैठने को नहीं मिल रहा स्थान...

रीवा। शासकीय कॉलेज में शासन स्तर से अनुमति मिलने के बाद प्राचार्यों ने स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रमों में सीट तो बढ़ा ली, लेकिन सुविधाओं के अभाव में अब पूर्व में लिया गया सीट बढ़ोत्तरी का निर्णय मुसीबत भरा साबित हो रहा है। कक्षा में क्षमता से अधिक छात्र-छात्राओं की संख्या न केवल उनके लिए बल्कि प्राध्यापकों के लिए भी मुसीबत भरा साबित हो रहा है।

हर पाठ्यक्रम में बढ़ाई गई है 25 फीसदी सीट
शहर के कुछ प्रमुख कॉलेजों में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं की लंबी लाइन को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रवेश प्रक्रिया के दौरान प्राचार्यों को सीट में 10 फीसदी बढ़ोत्तरी की अनुमति दिया था। विभाग की ओर से सीट में 25 फीसदी बढ़ोत्तरी की भी अनुमति मिली थी, लेकिन तब जब कॉलेज में पठन-पाठन के लिए पर्याप्त सुविधा मुहैया हों। ज्यादातर कॉलेज के प्राचार्यों ने प्रवेश के लिए भारी संख्या में आए आवेदनों के मद्देनजर क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक से अनुमति प्राप्त कर २५ फीसदी सीट बढ़ा ली, जो अब मुसीबत भरा साबित हो रहा है।

कक्षाओं में बैठने को नहीं है स्थान
शासकीय कन्या महाविद्यालय हो या फिर मॉडल साइंस कॉलेज, प्रवेशित छात्रों की अभी पूरी संख्या कॉलेज नहीं पहुंच रही है। इसके बावजूद कक्षाएं फुल हो जा रही हैं। प्रमुख पाठ्यक्रमों में अभी से कक्षा में बैठने के लिए स्थान नहीं है। पहले से ही ओव्हर फ्लो चल रही कक्षाओं में आने वाले समय में छात्र-छात्राओं के और बढऩे से उन्हें दूसरी असुविधाओं का भी सामना करना पड़ेगा। क्योंकि प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद कक्षाओं में धीरे-धीरे छात्र-छात्राओं की संख्या में बढ़ोत्तरी ही होगी।

जीडीसी में तैयार है नई बिल्डिंग, सुविधाओं का है अभाव
शासकीय कन्या महाविद्यालय में छात्राओं की अधिक संख्या को देखते हुए नई बिल्डिंग तैयार हो चुकी है, लेकिन नई बिल्डिंग में फर्नीचर सहित अन्य सुविधाओं के अभाव के चलते छात्राओं को वहां शिफ्ट कर पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। वहीं दूसरी ओर छात्रों की संख्या बढऩे के चलते मॉडल साइंस कॉलेज में अभी समस्याओं के निदान के लिए कोई ठोस विकल्प नहीं है। पढ़ाई व्यवस्थाओं को मैनेज करके ही संचालित की जा सकेंगी।

छात्र-छात्राओं के लिए यह मुसीबत भी तय
- थ्योरी कक्षा में प्राध्यापकों के लिए सभी छात्र-छात्राओं पर ध्यान दे पाना हो रहा है मुश्किल। पीछे बैठे छात्र-छात्राओं को भी हो रही है परेशानी।
- प्रायोगिक विषयों में प्रयोगशाला में शिफ्टवाइज आएगा नंबर। छात्रसंख्या अधिक होने के चलते महीने में मिल सकेगी अधिकतम दो कक्षाएं।
- आंतरिक मूल्यांकन व वार्षिक परीक्षा के दौरान छात्र-छात्राओं को बैठाने की होगी समस्या। जीडीसी में पहले भी टेंट लगाकर कराई जाती रही है परीक्षा।
- कॉलेज में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रमों में सभी छात्र-छात्राओं को शामिल किए जाने में होगी परेशानी।

जीडीसी से समझिए सीट बढ़ोत्तरी की स्थिति
बीए में 500 से बढक़र 625
बीएससी में 340 से बढक़र 390
बीकॉम में 340 से बढक़र 424

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