घोटाले की जांच रिपोर्ट गायब होने से मचा हड़कंप, आयोग ने कहा तलाशो नहीं तो कराएंगे एफआईआर, पढि़ए पूरा मामला

Mrigendra Singh

Publish: Feb, 15 2018 12:44:22 PM (IST)

Rewa, Madhya Pradesh, India
घोटाले की जांच रिपोर्ट गायब होने से मचा हड़कंप, आयोग ने कहा तलाशो नहीं तो कराएंगे एफआईआर, पढि़ए पूरा मामला

संभागायुक्त कार्यालय के अधिकारी रिपोर्ट खंगालने में जुटे, कर्मचारियों पर दोषारोपण की तैयारी

रीवा. स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार घोटाले की जांच रिपोर्ट संभागायुक्त कार्यालय से गायब हो गई है। जिसके बाद से हड़कंप मचा हुआ है। मामले में राज्य सूचना आयोग ने फटकार लगाई तो कार्यालय की ओर से जवाब दिया गया कि शासन को भेजे पत्र का क्रमांक मिल गया है लेकिन नस्ती गायब है। आयोग से यह कहते हुए महीनेभर का समय मांगा गया है कि अगली पेशी पर जांच रिपोर्ट से जुड़े सारे दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इस जवाब के बाद संभागायुक्त कार्यालय अपने ही पहले के जवाब में उलझता जा रहा है।
आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना में हुई अनियमितता पर 2008 में कराई गई जांच के बाद शासन को भेजे गए पत्रों की छायाप्रति मांगी थी। आवेदक को तो कोई जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दी नहीं गई और जब राज्य सूचना आयोग में अपील हुई तो यह कहते हुए संभागायुक्त कार्यालय ने पल्ला झाडऩे का प्रयास किया कि उक्त संदर्भ में कोई दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं हैं। अपीलकर्ता दुबे की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई तो आयोग ने फटकार लगाई और 13 फरवरी को जानकारी लेकर उपस्थित होने का निर्देश दिया था। जहां पर डिप्टी कमिश्नर पीएस त्रिपाठी ने कहा है कि शिकायत नस्ती एफ-14/एक/सीएसटी/08 के तहत पत्र भेजा गया था। क्रमांक मिल गया है, महीनेभर का समय दिया जाए अगली पेशी पर पूरे दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

रिटायर्ड स्टेनो को बताया जवाबदेह
संभागायुक्त कार्यालय द्वारा राज्य सूचना आयोग को दिए गए जवाब में कहा गया कि तत्कालीन स्टेनोग्राफर मिजाजीलाल तिवारी निवासी मुकुंदपुर सतना अब सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनसे उक्त नस्ती के बारे में जानकारी मांगी गई है। डिप्टी कमिश्नर ने यह भी कहा है कि उक्त रिटायर्ड कर्मचारी ने कुछ समय मांगा है, इस कारण एक महीने का समय दिया जाना चाहिए।

पूरे कार्यालय में तलाशी गई रिपोर्ट
आयोग की तल्खी के चलते कुछ दिन पहले ही डिप्टी कमिश्नर राजस्व ने कमिश्नर के स्टेनो, स्थापना शाखा, विकास शाखा, शिकायत शाखा, जावक शाखा आदि के लिपिकों को नोटिस देकर स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना के आर्थिक अनियमितता की जांच रिपोर्ट से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। सभी लिपिकों के जवाब के बाद यह तय हो गया है कि 8 अक्टूबर 2008 को सामान्य प्रशासन विभाग को रिपोर्ट भेजी गई थी। पत्र क्रमांक भी मिल गया है लेकिन नस्ती अब भी गायब है।

आयोग ने कहा-रिपोर्ट न मिले तो कराओ एफआईआर
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने पर सुनवाई कर रहे राज्य सूचना आयोग ने संभागायुक्त कार्यालय को निर्देशित किया है कि यदि जांच रिपोर्ट नहीं मिले तो संबंधित कर्मचारी पर एफआईआर दर्ज कराने के बाद रिपोर्ट सौंपी जाए। अधिकारियों ने सभी शाखाओं के लिपिकों को चेतावनी दी है कि यदि रिपोर्ट नहीं मिली तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

एक हजार का जुर्माना फिर लगाया
जानकारी समय पर नहीं दे पाने के चलते पूर्व में दो हजार रुपए का जुर्माना संभागायुक्त पर लगाया गया था। 13 फरवरी को पेशी के दौरान शपथ पत्र में जानकारी देने के लिए कहा था लेकिन ऐसा नहीं किया गया बल्कि एक माह का समय और मांगा गया है, जिसके चलते आयोग ने कहा है कि एक हजार रुपए की कास्ट और लगाई जा रही है। यह शिकायतकर्ता को भुगतान की जाएगी।

यह है पूरा मामला
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत रीवा जिले में युवाओं को प्रशिक्षण देने के नाम पर 42 लाख रुपए अग्रणी सामाजिक संस्था के नाम के एनजीओ को भुगतान किया गया था। अनियमितता के लगे आरोपों के चलते 2008 में विधायक गिरीश गौतम ने विधानसभा में सवाल उठाया था कि प्रशिक्षण नहीं हुए और लाखों रुपए का भुगतान भी कर दिया गया है। सदन को जानकारी देने के लिए तत्कालीन जिला पंचायत सीईओ निशांत बरबड़े (आईएएस) दस्तावेज लेकर भोपाल गए थे। लौटने पर चोरहटा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि फाइल ट्रेन में चोरी हो गई है। कुछ दिनों तक मामला थाने और जीआरपी के कार्यक्षेत्र को लेकर भटकता रहा और खात्मा लगा दिया गया। मामले की जांच संभागायुक्त द्वारा कराए जाने के बाद 8 अक्टूबर 2008 को प्रतिवेदन सामान्य प्रशासन विभाग के पास भेजे जाने की बात कही जा रही है।

 

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