रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं, जानिए क्या है पूरा मुहूर्त

रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं, जानिए क्या है पूरा मुहूर्त
There is no shadow of Bhadra on Rakshabandhan

Mahesh Kumar Singh | Updated: 14 Aug 2019, 09:25:08 PM (IST) Rewa, Rewa, Madhya Pradesh, India

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार रक्षा बंधन

रीवा. भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार रक्षाबंधन गुरुवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इसे लेकर बुधवार को बाजार में जमकर खरीददारी हुई। सभी ने नए कपड़े, राखी एवं जमकर मिठाइयां खरीदी। गुरुवार को पूरे दिन मुहूर्त है। ऐसे में बहने सुबह से शाम तक भाईयों को रक्षासूत्र बांध सकती हैं। हालांकि इसमें भी विशेष शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जाएगी। जो विशेष शुभदायी होगी।

19 वर्ष बाद रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस एक साथ
19 वर्ष के बाद यह मौका आ रहा है जब भाई बहन का प्रेम एवं स्वतंत्रता दिवस एक साथ मनाया जा रहा है। इससे पहले 2000 में स्वतंत्रता दिवस तथा रक्षाबंधन एक साथ मनाया गया था। श्रावण मास की पूर्णिमा चन्द्रमा के नक्षत्र श्रवण से युक्त होती है। जिसे हम भाई-बहनों के पवित्र त्योहाररक्षाबंधन के रूप में मनाते हैं। साथ ही श्रावण मास को वर्ष भर के लिए विदा करते हैं।

यह है मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु ने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हुए उन्हें पाताल लोक का राज्य प्रदान किया था। यहीं से रक्षा सूत्र बांधने की परिपाटी का प्रचलन हुआ। इसके साथ ही और भी रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर और भी कई मान्यताएं प्रचलित हैं।

भद्रा का साया नहीं
इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व पर भ्रदा का साया नहीं है। भद्रा प्रात: सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा। पूर्णिमा तिथि शाम 5.59 तक व्याप्त रहेगी। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार अपराह्न काल में किया गया रक्षा बंधन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। गुरुवार के दिन उदया तिथि के रूप में पूर्णिमा व्याप्त है तथा भद्रा रहित है। संपूर्ण दिन बंधन के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं।

बन्धन के शुभ मुहूर्त, सूर्योदय के अनुसार
- रक्षा बन्धन अनुष्ठान का समय प्रात: 5.47 से शामं 5.25 बजे तक
- प्रात: 5.45 से 7.19 बजे तक शुभ चौघडिय़ा में उन्नति दायक
- दोपहर 12.9 से दोपहर 1.46 बजे तक सर्व सिद्धि दायक
- अपराहन 4.49 से 6.36 बजे तक उन्नति दायक मुहूर्त बन रहे हैं

ऐसे मनाएं रक्षाबंधन
ज्योतिर्विद राजेश साहनी के मुताबिक रक्षाबंधन के दिन बहन भाई को, पुरोहित यजमान को एवं प्रजा राजा को रक्षा सूत्र बांधकर रक्षा का संकल्प लेते हैं। रक्षाबंधन के दिन व्रत रहते हुए महिलाएं अथवा पुरोहित प्रात: काल स्नान के पश्चात सूर्य को ताम्रपात्र द्वारा अघ्र्य दें। अपरान्ह काल में सूती अथवा रेशमी वस्त्र में अक्षत, केशर, चंदन, सरसों और दुर्वा रखकर रक्षा पोटली बनाएं और उसे श्रीकृष्ण भगवान को अर्पित करें।

इसके बाद ही बहनें अपने भाइयों को कुल परंपरा के अनुसार आरती, तिलक तथा नैवेद्य का प्रयोग करते हुए दाहिने हाथ में रक्षा सूत्र सहित राखी का बंधन करें। शगुन स्वरुप रुमाल इत्यादि भेंट करें। हिंदू परंपराओं के अनुसार रक्षाबंधन के दिन पुरोहित अपने यजमानों को गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित लाल धागा बांधते हैं जो संकट काल में उनकी रक्षा करने में समर्थ होता है।

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