ये हैं रीवा के असली हीरो, रक्तदान कर बचा रहे दूसरों की जिंदगी

Dilip Patel

Publish: Jun, 14 2018 12:11:26 PM (IST)

Rewa, Madhya Pradesh, India
ये हैं रीवा के असली हीरो, रक्तदान कर बचा रहे दूसरों की जिंदगी

जोड़ रहे इंसानियत का नाता, रक्तदान करने रहते सदैव तत्पर

रीवा। इसे रक्तदान करने का जुनून कहें या फिर दूसरों की जिंदगी बचाने की संवेदना जो भी कहिए ये रक्तदाता युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। इनमें से कुछ के रक्तदान का आंकड़ा उम्र से अधिक है तो कुछ नेक कार्य का रिकार्ड बनाने में जुटे हैं। हम विश्व रक्तदान दिवस पर ऐसे ही रक्तदाताओं से परिचय करा रहे हैं। पेश है रिपोर्ट...
1. पंकज सिंह पंकू
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रहे पंकज सिंह पंकू ने 22 साल की उम्र में पहली बार रक्तदान किया था। वह जीएमएच में भर्ती अपने मित्र को देखने गए थे। उसी दौरान एक वृद्ध महिला फूट-फूट कर रो रही थी। उसका पांच साल का नाती बीमार था कोई उसे रक्त देने को तैयार नहीं था। उस वक्त पहली बार रक्त देकर बहुत आत्म संतुष्टि मिली थी। इसके बाद रक्तदान जीवन का एक हिस्सा बन गया। ब्लड ग्रुुप बी पाजिटिव होने है और 51 साल की उम्र में अभी तक 28 बार रक्तदान कर चुके हैं।

2. अजय सिंह
मझियार गांव निवासी खेती-किसानी करने वाले अजय सिंह की उम्र 59 साल है और वह इतने ही बार रक्तदान का रिकार्ड बना चुके हैं। बताते हैं कि जब वह 17 साल के थे तब डॉ. राम सुजान सिंह के पास एक मरीज आया था जिसे एबी पाजिटिव रक्त की जरूरत थी। उस वक्त डॉक्टर ने कई लोगों का गु्रप चेक कराया था। उनका ब्लड गु्रप एबी पाजिटिव निकला तो रक्तदान कराया। हालांकि उम्र नहीं थी लेकिन मरीज की जान बचाने के लिए ऐसा करना पड़ा। उसी के बाद से रक्तदान करने का सिलसिला जारी है। जरूरतमंद संपर्क करते हैं और रक्त देने के लिए हाजिर हो जाता हूं।

3. प्रमिला बघेल
पति अजय सिंह की प्रेरणा से प्रमिला सिंह बघेल ने रक्तदान करने का निर्णय लिया था। वह कहती हैं कि महिलाएं इस कार्य में यूं तो पीछे रहती हैं। कदम बढ़ाने से पहले कई तरह के सवालों में उलझ जाती हैं पर उन्हें परिजनों ने मदद की। जिससे अभी तक 12 बार रक्तदान कर दूसरों की जिंदगी बचाने में योगदान दे चुकी हैं। ओ पाजिटिव ब्लड गु्रप होने के कारण वह किसी भी जरूरत मंद के लिए मौजूद रहती हैं।

4. प्रभाकर सिंह
कृषि विभाग में पदस्थ हैं। उम्र 57 साल है और रक्तदान 18 बार कर चुके हैं। उर्रहट के रहने वाले प्रभाकर सिंह का कहना है कि उन्हें रक्तदान की प्रेरणा परिजनों और मित्रों से मिली। वह कहते हैं कि रक्तदान करने से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। आपके एक कदम से किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है। रक्तदान के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। वर्तमान समय में ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी है।

5. एड. अनुज त्रिपाठी और एकता तिवारी
पेशे से वकील हैं लेकिन समाज सेवा में तत्पर हैं। इनकी उम्र लगभग 45 साल है पर रक्तदान 75 बार कर चुके हैं। वह कहते हैं कि 18 साल की उम्र से ही रक्तदान कर रहे हैं। इस कार्य में उनकी पत्नी एकता तिवारी भी उनके साथ हैं। शादी की साल गिराह 15 फरवरी को होती है। इस दिन दोनों ही रक्तदान करते हैं। उन्होंने बताया कि थैलेसेमिया से पीडि़त बच्चों के लिए रक्तदान करना उन्हें आत्मसंतुष्टि प्रदान करता है। पत्नी एकता का ब्लड ग्रुप बी निगेटिव है। जो दुर्लभ रक्त समूह है। इसलिए बहुत जरूरत होने पर ही वह रक्तदान करती हैं। इनके नेक कार्य को प्रदेश सरकार सम्मानित कर चुकी है।

डाउनलोड करें पत्रिका मोबाइल Android App: https://goo.gl/jVBuzO | iOS App : https://goo.gl/Fh6jyB

Ad Block is Banned