10 साल से टोल वसूली, बायपास किनारे नहीं बना ग्रीन बेल्ट

पाथ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2004 में चोरहटा से रतहरा 19 किमी बायपास का निर्माण शुरू किया था। इस दौरान कंपनी ने 7300 से बड़े पेड़ काटे थे।

By: Lokmani shukla

Published: 18 Aug 2017, 06:49 PM IST

रीवा. चोरहटा से रतहरा बायपास के दोनों किनारों पर 10 साल बाद भी ठेका कंपनी ग्रीन बेल्ट तैयार नहीं कर सकी है। जबकि कंपनी टोल वसूल रही है, जिसके समाप्त होने में सिर्फ तीन साल बचे हंै। अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने के बावजूद कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

पाथ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2004 में चोरहटा से रतहरा 19 किलोमीटर बायपास का निर्माण शुरू किया था। इस दौरान कंपनी ने 7300 से बड़े पेड़ काटे थे। अनुबंध की शर्तों के तहत काटे गए पेड़ के बदले 10 गुना यानी 73 हजार पेड़ सड़क के दोनों ओर लगाकर कंपनी को ग्रीन बेल्ट तैयार करना था। बायपास निर्माण के बाद कंपनी ने 2007 से टोल वसूली भी प्रारंभ कर दी, लेकिन पेड़ नहीं लगाए। इसके बाद भी नियमित वसूली पिछले 10 साल से चल रही है, जबकि अनुबंध में प्रावधान है कि ग्रीन बेल्ट तैयार नहीं करने पर वसूली रोक दी जाएगी। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों ने मेहरबानी दिखाते हुए कोई कदम नहीं उठाया।

2020 में समाप्त हो जाएगा अनुबंध
रतहरा से चोरहटा बायपास निर्माण करने वाली कंपनी की टोल वसूली की समय सीमा अप्रैल 2020 में समाप्त हो रही है। कंपनी अब तक सिर्फ 4500 पेड़ लगाने का दावा कर रही है। यह बात अलग है कि इन्ही पेड़ों को वन विभाग रीवा ग्रीन अभियान के तहत लगाने का दावा कर रहा है।

फैक्ट फाइल
19.46 किलोमीटर लंबा बायपास
48 करोड़ निर्माण लागत
2007 से टोल वसूली
2020 अप्रैल समाप्त होना है वसूली
73 सौ पेड़ काटे गए

जमीन पर नहीं रोका अतिक्रमण
बायपास निर्माण के दौरान शासन द्वारा अधिग्रहित जमीन पर कब्जा नहीं होने व उसकी निगरानी का जिम्मा कंपनी को दिया गया था। कंपनी बायपास का निर्माण किया, लेकिन सड़क किनारे की जमीन पर से अतिक्रमण नहीं रोक पाईहै।

कुछ पौधे लगाए गए थे
इस संबंध में एसडीओ नेशनल हाइवे आरपी तिवारी का कहना है कि बापयास निर्माण कंपनी ने ७३०० पेड़ काटे थे, जिससे १० गुना पौधे लगाकर ग्रीन बेल्ट तैयार करना था, जो अब तक नहीं हो पाया है। कुछ पौधे लगाए गए थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने नष्ट कर दिए।

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