सडक़ों पर घूमते हैं फटेहाल, खुले आसमान के नीचे गुजरती है जिंदगी, इनके लिए प्रशासन के पास कोई योजना नहीं

सामाजिक संगठनों की शिकायत के बाद कलेक्टर ने मांगी जानकारी, प्रशासन के पास नहीं बेघर घूम रहे विक्षिप्तों की संख्या।

By: Mahesh Singh

Published: 10 Feb 2018, 12:36 PM IST

रीवा। सडक़ों पर घूमते हैं फटेहाल। खुले आसमान के नीचे गुजरती है मानसिक विक्षिप्तों की जिंदगी। समाज की मुख्य धारा से जोडऩे की बात तो दूर इनके रहने तक का कोई ठौर-ठिकाना नहीं है। शहर की सडक़ों पर चाहे धूप हो या फिर ठंड वह खुले में ही गुजर-बसर करते हैं। आश्चर्य तो यह है कि प्रशासन के पास इनकी बेहतरी के लिए कोई योजना ही नहीं है।


सडक़ों पर घूमते हैं बेहाल
शहर में घूम रहे विक्षिप्तों में कुछ ऐसे भी हैं जिन्हें जीवन जीने के तौर तरीके सिखाए जा सकते हैं और उनका जीवन सुधारा जा सकता है। प्रशासनिक लापरवाही की वजह से आए दिन लावारिश हालत में यह मृत अवस्था में पाए जाते हैं। अधिक ठंड पडऩे के चलते हर साल कइयों की मौत हो जाती है। यही हाल गर्मी का भी होता है जब लू की वजह से इनकी मौतें होती हैं। शहर के प्रमुख बाजारों में वह फटेहाल या फिर बिना कपड़ों के घूमते मिल जाते हैं।


प्रशासन नहीं करा पाया सर्वे
प्रशासन के अलग-अलग विभागों द्वारा सर्वे कर लोगों की जानकारी जुटाई जाती है। लेकिन मानसिक रूप से विक्षिप्त ऐसे लोगों का कोई आंकड़ा अब तक प्रशासन नहीं जुटा पाया है। प्रयास भी नहीं किया गया जिससे ऐसे लोगों की जानकारी मिल पाती। जबकि प्रदेश के कई जिलों में सुधार गृह बनाए गए हंै और मानसिक रूप से विक्षिप्तों का समय-समय पर सर्वे किए जाने का प्रावधान है।


कलेक्टर ने निगम और पुलिस को भेजा पत्र
कुछ दिन पहले इस समस्या का समाधान निकालने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता बीके माला ने एक ज्ञापन संभागायुक्त को दिया था। जिस पर कलेक्टर ने नगर निगम के आयुक्त और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर कहा है कि संयुक्त अभियान चलाकर शहर में खुले में घूम रहे मानसिक विक्षिप्तों को चिह्नित करें। जिनके परिजन मिलें उन्हें पहुंचाया जाए और जो लावारिश हैं उनके उपचार और रखरखाव की व्यवस्था की जाए।


500 रुपए हर महीने देने की है योजना
मंदबुद्धि एवं विक्षिप्त व्यक्तियों के लिए शासन द्वारा बहुविकलांग सहायता योजना लागू की गई है। जिसके तहत मानसिक विक्षिप्तों के नाम पर 500 रुपए प्रतिमाह उनके अभिभावकों को दिए जाने का प्रावधान हैं। शहर में नगर निगम और ग्रामीण क्षेत्रों में जनपद पंचायतों के माध्यम से यह योजना संचालित की जा रही है। बताया जा रहा है कि जिलेभर में सैकड़ों की संख्या में इस योजना के नाम पर हर महीने भुगतान भी दिया जा रहा है।


अभिभावक भी रखें ध्यान
कई अभिभावक ऐसे भी हैं जो अपने घर के विक्षिप्त सदस्य के नाम पर हर महीने भुगतान तो ले रहे हैं लेकिन उनके सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं देते, इस कारण वह शहर में खुले आम घूम रहे हैं। कलेक्टर प्रीति मैथिल ने कहा है कि ऐसे लोगों को चिह्नित करें और उनके अभिभावकों से कहें कि वह घर पर ले जाकर देखभाल करें। जरूरत पडऩे पर अस्पताल में भी वह परिवार के सदस्य के रूप में रहकर सेवाएं दें।

Mahesh Singh Desk
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