केन्द्रों पर बगैर ढेर लगाए सीधे बोरियों में भर रहे गेहूं, अन्नदाता को मैसेज का इंजतार

जिले में अव्यव्यस्था के चलते किसानों को परेशानी, अभी व्यवस्था संभली नहीं कि अनियमितता शुरू, खौर समिति के प्रशासन नोटिस

By: Rajesh Patel

Updated: 23 Apr 2020, 09:37 AM IST

रीवा. जिले में केन्द्रों पर नियम-कायदे की अनदेखी कर तौल की जा रही है। अधिकांश केन्द्रों पर अव्यवस्था के चलते बगैर ढेर व परखी लगाए गेहूं की तौल की जा रही है। निरीक्षण के दौरान नियंत्रक ने खौर समिति पहुंचे तो प्रशासक और प्रबंधक की मनमानी उजागार हुई। उधर, जिले में किसानों को तौल के लिए मोबाइल पर मैसेज आने का इंतजार है।

कसानों को नहीं भेजा रहा मैसेज
जिले में तौल चालू होने के 7वें दिन दस हजार क्विंटल से ज्यादा की तौल हो चुकी है। अधिकांश समितियों से जुड़े किसानों को अभी तक मैसेज नहीं पहुंचा है। जिसको लेकर तौल की रफ्तार धीमी है। इधर, अधिकांश केन्द्रों पर नियम-कायदे की अनदेखी कर गेहूं की तौल की जा रही है। समियों पर उपज का बगैर ढेर लगाए तौल की जा रही है। अव्यवस्था के चलते किसानों को भी फजीहत हो रही है। खौर समिति पर दोपहर एक टै्रक्टर पर लोड गेहूं को श्रमिक सीधे सरकारी बोरियों में भकर कांटा कर रहे थे।

नियंत्रक ने अनियमितता का बना लिए वीडियो
जिला खाद्य निरीक्षक ठाकुर राजेन्द्र ङ्क्षसह पहुंचे। नियंत्रक नेपूरी अनियतता की वीडिया बनाई और फिर पूछा कि ऐसा क्यों तौल रहे हो। श्रमिकों ने जवाब दिया कि साहब ने कहा है। इस पर नियंत्रक ने प्रशासक से पूछताक्ष की तो कोई जवाब नहीं दे सके। मामले में नियंत्रक ने केन्द्र पर गेहूं का बगैर ढेर लगाए और गुणवत्ता परखे तौल किए जाने के मामले में प्रशासन धिरेन्द्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बताया गया कि ये कहानी अकेले इस केन्द्र पर नहीं है। बल्कि जिले के अधिकांश केन्द्रों की यही स्थित है। लॉकडाउन का समितियां फायदा उठा रही हैं। किसानों ने समितियों पर प्रबंधकों की मनमानी पर लगाम लगाने की मांग की है।

शासन प्रति क्विंटल देता है 27 रुपए खर्च
उपार्जन केन्द्रों पर गेहूं की तौल के लिए सरकार पल्लेदारी को छोडकऱ समितियों को प्रति क्विंटल 27 रुपए खर्च देती है। जिससे प्रबंधक केन्द्र पर अनाज की सफाई, किसानों को बैठने-उठने और पेयजल आदि की व्वस्था करनी है। इसके अलावा तौल किए बोरों की थपकी लगाई है। लेकिन, अधिकांश केन्द्र पर तौल बोरों की थपकी लगाना तो दूर साफ-सफाई तक की व्यवस्था नहीं है। पेयजल और किसानों के सोसल डिस्टेंस व बैठने की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।

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Rajesh Patel Reporting
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