'रक्तदान से वजन कम होने के साथ ही हार्ट अटैक की संभावनाएं हो जाती हैं कम'

एसजीएमएच की पैथालॉजी में रक्तदान जागरुकता पर आयोजित की गई कार्यशाला

By: Mahesh Singh

Published: 01 Mar 2020, 01:04 PM IST

रीवा. श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय में रक्तदान जागरुकता पर कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान रक्तदान के फायदे व नुकसान पर फोकस किया गया। इस दौरान चिकित्सकों ने विस्तृत चर्चा की और मौजूद लोगों को रक्तदान के प्रति अधिक से अधिक जागरुक करने के लिए संकल्प लिया।

पैथालॉजी विभाग में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में लोगों को प्रेरित करने एवं सामाजिक संगठनों के साथ आयोजित की गई। एड्स कंट्रोल सोसायटी के द्वारा आयोजित जागरुकता कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी सागर के पैथालॉजिस्ट डॉ संतोष गौड़ रहे। उन्होंने रक्तदान से जुड़े फायदे व उसकी भ्रांतियों पर फोकस किया।

संजय गांधी अस्पताल के पूर्व संचालक डॉ. सीबी शुक्ला ने रक्तदान पर चर्चा करते हुए वर्ष 1975 में जागरुकता की स्थित बताई। उन्होंने कहा तब जागरुकता के अभाव में पुत्र अपने माता-पिता को खून देने से हिचकिचाता था। आज आधुनिता में ब्लक से चार अलग-अलग ब्लड तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति का आश्वयकतानुसार चार अलग-अलग लोगों को ब्लड चढ़ाया जा रहा है।

पूर्व संचालक ने कहा कि खून जातियों में नहीं बल्कि ग्रुप में बटा हुआ है। इसलिए किसी को भी ब्लड की आश्वयकता पडऩे पर रक्तदान किया जा सकता है। प्रत्येक स्वस्थ्य व्यक्ति हर तीसरे माह दो यूनिट ब्लड दान कर सकता है। शरीर पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा। इस दौरान कई अन्य चिकित्सकों ने बताया कि रक्तदान से हार्ट अटैक की संभावनाएं कम हो जाती हैं। खून दान करने से वजन कम हो जाता है।

रक्दान से शरीर में एनर्जी आती है। खून डोनेट करने से लिवर से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलती है। रक्दातन के लिए चिकित्सकों ने जागरुकता के लिए रक्तदान के कई फायदे बताए। इस अवसर पर मेडिकल कालेज के डीन डॉ. एपीएस गहरवार, डॉ. एसके मिश्र सहित अन्य चिकित्सक व अध्ययनरात चिकित्सा छात्रों के साथ ही सामाजिक संगठनों के सदस्य मौजूद रहे।

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