script30 साल, 3 मास्टर, 3 साल से चल रहा था काम, अब शुरू हुआ विवाद | 30 years, 3 masters were involved in the bus stand shifting, work was going on for 3 years, now when the displacement happened, the dispute started | Patrika News
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30 साल, 3 मास्टर, 3 साल से चल रहा था काम, अब शुरू हुआ विवाद

सागर. शहर के बीच से निकलने वाली बसों को प्रतिबंधित किए जाने से शुरू हुई हड़ताल अब आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। लोगों का कहना है कि बस स्टैंड शिफ्टिंग का मामला नया नहीं है। करीब 30 साल से हर बार के मास्टर प्लान में बस स्टैंड शिफ्टिंग का प्रस्ताव शामिल […]

सागरJun 16, 2024 / 06:55 pm

अभिलाष तिवारी

  • प्रदेश के अन्य बड़े शहरों से लेनी होगी सीख
  • सोमवार तक हड़ताल खत्म नहीं हुई तो मंगलवार को बड़ा कदम उठा सकता है प्रशासन
सागर. शहर के बीच से निकलने वाली बसों को प्रतिबंधित किए जाने से शुरू हुई हड़ताल अब आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। लोगों का कहना है कि बस स्टैंड शिफ्टिंग का मामला नया नहीं है। करीब 30 साल से हर बार के मास्टर प्लान में बस स्टैंड शिफ्टिंग का प्रस्ताव शामिल रहा है। उसको राजघाट रोड पर ही शिफ्ट किए जाने का निर्णय हुआ था। तीन साल से इसका काम भी चल रहा था, तब तक किसी भी बस ऑपरेटर्स ने इसका विरोध नहीं किया और न ही मौके पर जाकर स्थिति को समझा लेकिन अब अचानक से बसों का संचालन बंद करके शहरवासियों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि यदि सोमवार की शाम तक बस ऑपरेटर्स की हड़ताल खत्म नहीं हुई तो प्रशासन मंगलवार को उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर सकता है।

प्रशासन ने शिफ्टिंग पर ये बातें कहीं

– भोपाल, जबलपुर जैसे शहरों को देखना चाहिए, जहां पर बढ़ती आबादी के बाद उनको बाहर शिफ्ट किया गया। सागर में भी सड़कों पर यातायात का दबाव है। जैसे ही स्कूल बसें शुरू होंगी, तो समस्या और बढ़ जाएगी और कभी भी बढ़ी दुर्घटना घटित हो सकती है।
– शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए ही सिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। यदि दमोह, छतरपुर समेत अन्य जिलों से आने वाले बस बहेरिया से मकरोनिया, सिविल लाइन, तिली और फिर बस स्टैंड तक आएगी तो सिटी बसों के संचालन का औचित्य नहीं रहेगा। दूसरा जो व्यक्ति मकरोनिया से सिविल लाइन आना चाहता है, उसको सिटी बस में ही बैठना होगा।
– दोनों ही नए बस स्टैंड पर लगातार छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर सुविधाएं बढ़ाई जा रहीं हैं। बसों को खड़े करने के लिए जहां पर सामान्य जमीन थी, उस पर कंक्रीट किया जा रहा है, ताकि बारिश के सीजन में कीचड़ आदि की समस्या न हो।

सोशल मीडिया बना अखाड़ा

बस स्टैंड शिफ्टिंग को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय है। कोई इसे सकारात्मक दृष्टि से देख रहा है तो कोई इसकी वकालत कर रहा है। अधिकांश लोग बस स्टैंड की शिफ्टिंग को शहर विकास के रूप् में भी देख रहे हैं। इधर शनिवार को बस ऑपरेटर्स ने पूर्व मंत्री व खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्हें अपनी समस्या बताई। एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष पांडेय ने बताया कि उन्होंने समस्या का हल निकालने का आश्वासन दिया है।

सोच बदलनी होगी

प्रदेश व देश के अन्य शहरों का अध्ययन किया जाना चाहिए। जैसे-जैसे आबादी बढ़ती है तो जनहित में ऐसे विस्थापन किए जाते हैं। दोनों नए स्टैंड आधुनिक तरीके से बनाए गए हैं, जहां पर सभी प्रकार की सुविधाओं में लगातार इजाफा किया जा रहा है। – राजकुमार खत्री, निगमायुक्त सह ईडी, एसएससीएल

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