script54 thousand Anganwadi centers of the state in a borrowed building | How fight malnutrition: उधार के भवन में प्रदेश के 54 हजार आंगनबाड़ी केंद्र | Patrika News

How fight malnutrition: उधार के भवन में प्रदेश के 54 हजार आंगनबाड़ी केंद्र

- तीन हजार केंद्रों में शौचालय तो हैं पर पीने का पानी का इंतजाम नहीं

सतना। सीलन, उधड़ा प्लास्टर और सामने जमा गंदा पानी। यह स्थिति उन आंगनबाड़ी केंद्रों की है, जिनपर कुपोषण का दंश मिटाने की जिम्मेदारी है। आलम यह है कि बास मारते कमरों में सामान रखने की ही जगह नहीं है। यह स्थिति एक दो नहीं बल्कि 54 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों की है, जो उधार के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इस पर भी 6 हजार केंद्र तो ऐसे भी हैं, जिनमें पीने के पानी का भी इंतजाम नहीं है।

सागर

Published: April 02, 2022 06:21:55 pm

प्रदेश में उधार के भवनों के भरोसे कुपोषण से जंग लड़ी जा रही है। 54 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों के पास भवन नहीं होने से स्कूल और पंचायत भवन के कोने से लेकर किराए के मकान में संचालित हो रहे हैं। जहां बच्चों के बैठने की तो दूर आवंटित सामान रखने तक की जगह नहीं है। 6 हजार ऐसे भी केंद्र हैं जहां अब तक पीने के पानी का इंतजाम नहीं हो पाया है।
आंगनबाड़ी केंद्र खुद कुपोषित
सतना का एक आंगनबाड़ी केंद्र जहां सामने फैला पानी मार रहा सड़ांध
प्रदेश में 97 हजार आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। जो संसाधन, जगह और सुविधा के गंभीर अभाव से जूझ रहे हैं। हाल ही में सरकार ने केंद्रों को गोद लेेने के लिए पूरे प्रदेश में मुहिम शुरू की थी। लेकिन यह रस्मी ही साबित हुई है। किसी भी जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा सुधारने की पहल नहीं की गई है। नेताओं व समाजसेवियों ने कुछ सामग्री दान करके अपने कत्र्तव्य की इतिश्री कर ली है। सरकार की ओर से अब तक 43 हजार केंद्रों को ही भवन मुहैया कराया गया है। बाकी 54 हजार से अधिक केंद्र उधार के भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।
कमरे में सामान रखें या बच्चों को बैठाएं
अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति यह है कि बमुश्किल एक कमरा उन्हें मिल पाया है। कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की मुश्किल यह है कि कमरे में सामान ठूंसे या बच्चों को बैठाएं। ग्रामीण इलाकों की स्थिति और भी अधिक खराब है। जिन्हें पोषण आहार भी उसी एक कमरे के केंद्र में बनवाना पड़ता है। शहरी क्षेत्र में पका खाना पहुंचाने की व्यवस्था है।
6 हजार केंद्रों में पीने का पानी नहीं
सरकार का दावा है कि 91 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में पीने के पानी की व्यवस्था है। लेकिन दिलचस्प है कि शौचालय 94 हजार केंद्रों में होने की बात कही गई है। यानी की 3 हजार ऐसे केंद्र हैं जहां शौचालय तो हैं पर पीने के पानी का इंतजाम सरकार नहीं कर पाई है।
फैक्ट फाइल
97 हजार कुल आंगनबाड़ी केंद्र
43 हजार के पास अपना भवन
24 हजार सरकारी स्कूल में संचालित
21 हजार किराए के मकान में
44 सौ पंचायत भवनों में
91 हजार में पीने का पानी उपलब्ध
94 हजार के पास शौचालय

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

यहाँ बचपन से बच्ची को पाल-पोसकर बड़ा करता है पिता, जैसे हुई जवान बन जाता है पतियूपी में घर बनवाना हुआ आसान, सस्ती हुई सीमेंट, स्टील के दाम भी धड़ामName Astrology: पिता के लिए भाग्यशाली होती हैं इन नाम की लड़कियां, कहलाती हैं 'पापा की परी'इन 4 राशियों के लड़के अपनी लाइफ पार्टनर को रखते हैं बेहद खुश, Best Husband होते हैं साबितजून में इन 4 राशि वालों के करियर को मिलेगी नई दिशा, प्रमोशन और तरक्की के जबरदस्त आसारमस्तमौला होते हैं इन 4 बर्थ डेट वाले लोग, खुलकर जीते हैं अपनी जिंदगी, धन की नहीं होती कमी1119 किलोमीटर लंबी 13 सड़कों पर पर्सनल कारों का नहीं लगेगा टोल टैक्ससंयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: दुनिया के पास बचा सिर्फ 70 दिन का गेहूं, भारत पर दुनिया की नजर

बड़ी खबरें

पंजाब CM भगवंत मान ने स्वास्थ्य मंत्री को भ्रष्टाचार के आरोप में किया बर्खास्त, मामला दर्जकहां रहता है मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम? भांजे अलीशाह ने ED के सामने किया खुलासाहेमंत सोरेन माइनिंग लीज केस में PIL की मेंटेनेबिलिटी पर झारखण्ड हाईकोर्ट में 1 जून को सुनवाईकांग्रेस की Task Force-2024 और पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी का ऐलान, जानिए सोनिया गांधी ने किन को दिया मौकापाकिस्तान ने भेजी है विषकन्या: राजस्थान इंटेलिजेंस ने सेना को तस्वीरें भेज कर किया अलर्टये है प्लेऑफ में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट, 8 में से 7 खिलाड़ी एक ही टीम केकुतुब मीनार केसः साकेत कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी, 9 जून को अदालत सुनाएगी फैसलाPooja Singhal Case: झारखंड की 6 और बिहार के मुजफ्फरपुर में ED की एक साथ छापेमारी, अहम सुराग मिलने की उम्मीद
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.