तीन एई, छह एसई और आभा कंसल्टेंसी पर कार्रवाई की गाज

तीन एई, छह एसई और आभा कंसल्टेंसी पर कार्रवाई की गाज

Samved Jain | Publish: Sep, 06 2018 03:13:35 PM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

प्रधानमंत्री आवास योजना के बीएलसी घटक में हुए फर्जीवाड़ा

सागर. प्रधानमंत्री आवास योजना के बीएलसी घटक में हुए फर्जीवाड़ा में बुधवार को निगमायुक्त अनुराग वर्मा ने जांच रिपोटर््स के आधार पर कार्रवाई की। नगर निगम के तीन सहायक यंत्रियों और ६ उपयंत्रियों पर कार्य में लापरवाह मानते हुए १५-१५ दिनों के वेतन काटने की कार्रवाई की गई।
कंसल्टेंट एजेंसी व पीएमसी आभा सिस्टम एंड कंसल्टेंसी द्वारा डीपीआर में अपात्र लोगों के नाम जोड़े जिसमें पक्के मकान के हितग्राहियों के नाम पाए गए। इसके साथ ही पति-पत्नी, माता पिता, पुत्र-पुत्री और परिवार के अन्य सदस्यों के अलग-अलग नाम जोडऩे, निगम से जुड़े जनप्रतिनिधियों से संबंधित परिवार को, जिन्हें लाभ नहीं दिया जाना था, उन्हें भी लाभ दिया गया, आदि लापरवाही करने पर एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की गई। निगमायुक्त ने कंसल्टेंट एंजेसी को अपात्र हितग्राहियों से पैसा वसूलने के निर्देश दिए और कहा कि यदि राशि वसूल नहीं होती है तो उतनी राशि कंसल्टेंट से जमा कराई जाए। इसके साथ ही भविष्य में आभा कंसल्टेंसी से निगम में कोई भी डीपीआर तैयार न करवाई जाए। एनजीओ कृष्णा प्रेम सर्वोदय समिति की कोई बड़ी लापरवाही न मिलने के कारण चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है।
इन एई व एसई पर हुई कार्रवाई
सहायक यंत्री पूरनलाल अहिरवार, संजय तिवारी और रमेश चौधरी कार्य में लापरवाही करने पर कार्रवाई हुई। उपयंत्री महादेव सोनी, दिनकर शर्मा, राजकुमार साहू, रामाधार तिवारी, राजसिंह राजपूत और अरविंद पटैरिया को 8-8 वार्डो में योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन इन्होंने कार्य में लापरवाही की जिस पर कार्रवाई हुई।
करीब २५० निकले अपात्र
चार स्तरीय जांच रिपोर्ट्स में करीब २०० से २५० हितग्राही अपात्र मिले हैं। निगमायुक्त ने इन सभी अपात्रों से राशि वसूलने के निर्देश दिए। राशि वसूलने व गंभीर श्रेणी वाले अपात्र हितग्राहियों पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई तत्काल शुरू करने के निर्देश भी दिए गए।
पार्षदों पर लटकी तलवार
निगम के इंजीनियर्स, आरबी एसोसिएट्स और कंसल्टेंट एजेंसी समेत एडीएम तन्वी हुड्डा की रिपोर्ट से सामने आए तथ्यों में पार्षदों के मिलीभगत के पुख्ता सबूत मिले हैं। बीएलसी घटक में पार्षद के निकट संबंधी को लाभ दिया गया है, जो नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 17-1जी के तहत पार्षद की अर्हताओं का उल्लघंन है। इसलिए एेसे पार्षदों पर पार्षदी समाप्त करने संबंधी कार्रवाई करने के लिए विषय को निगम परिषद में रखने के साथ पूरी जांच रिपोर्ट को संभागायुक्त मनोहर दुबे के पास भेजा जा रहा है। इस फर्जीवाड़े में आधा दर्जन से ज्यादा पार्षदों के नाम शामिल हैं जिसमें अधिकांश नाम भाजपा पार्षदों के हैं।
निगमायुक्त वर्मा ने
ये भी दिए निर्देश
निगमायुक्त वर्मा ने निर्देश दिए कि पीएमसी की नियुक्ति महापौर परिषद, निगम परिषद के अनुमोदन के बाद हुई थी, इसलिए डीपीआर जितनी भी बन चुकी है, उनका क्रियान्वयन आभा से करवाएं। भविष्य में कोई भी नई डीपीआर आभा द्वारा न बनवाई जाए क्योंकि त्रुटि की संभावना है। भविष्य में बीएलसी से संबंधित कोई भी योजना बनाने पृथक से कंसल्टेंट नियुक्त किया जाना उचित होगा।
पत्रिका के खुलासे ही बने जांच का केंद्र
पत्रिका ने बीएलसी घटक के फर्जीवाड़े को उजागर करने के साथ लगातार इसमें नए-नए तथ्यों को प्रशासन के सामने लाया। निगम इंजीनियर्स, कंसल्टेंट और कतिपय लोगों ने कैसे योजना में सेंध लगाई इसका भी खुलासा किया जिसके बाद निगम प्रशासन ने स्मार्ट तरीके से जांच करवाकर लापरवाही करने वालों के विरुद्ध एक्शन लिया।

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