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ग्रामीणों के आरोपों पर गंभीर नहीं प्रशासन

महामारी नियंत्रक टीम को भी बताई शराब फैक्ट्री की समस्या सागर. मेहर गांव में फैली हैजा की बीमारी को लेकर ग्रामीण गांव के पास मौजूद शराब फैक्ट्री पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। करीब 350 ग्रामीणों के बीमार होने और 2 लोगों की जान […]

सागरJul 09, 2024 / 01:12 am

नितिन सदाफल

शराब फैक्ट्री

शराब फैक्ट्री

महामारी नियंत्रक टीम को भी बताई शराब फैक्ट्री की समस्या

सागर. मेहर गांव में फैली हैजा की बीमारी को लेकर ग्रामीण गांव के पास मौजूद शराब फैक्ट्री पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन इन आरोपों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। करीब 350 ग्रामीणों के बीमार होने और 2 लोगों की जान जाने के बाद भी शासन कारण जानने का प्रयास करता नहीं दिख रहा। गांव के लोग फैक्ट्री से निकलने वाली काली धूल, सड़े हुए कच्चे माल की गंध को बीमारी फैलने का कारण बता रहे हैं, जबकि प्रशासन के अधिकारियों ने सिर्फ बोरवेल के पानी की जांच की है, जबकि फैक्ट्री में सैंपल लेने की जहमत भी कोई नहीं उठा रहा। बीती रात 55 वर्षीय कस्तूरी बाई लोधी की भोपाल एम्स में मौत होने के बाद सोमवार को फिर 3 बच्चों को इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि राहत की बात ये रही कि दूसरे दिन भी 18 लोग सागर की सरकारी व निजी अस्पतालों से स्वस्थ होकर घर पहुंचे।
महामारी नियंत्रक अधिकारी से जांच की मांग

सीएमएचओ ममता तिमोरी ने बताया कि गांव में अब स्थिति नियंत्रण में है। एहतियात के तौर पर महामारी नियंत्रक टीम की अधिकारी सोमवार को भी गांव में सर्वे करने पहुंची थीं। कुछ ग्रामीणों ने शराब फैक्ट्री की जांच की मांग की थी लेकिन वह कार्य हमारे कार्य क्षेत्र में नहीं है। गांव में मलेरिया सर्वे भी किया गया। बीएमसी की टीम ने जो मरीज के सैंपल लिए थे उसमें विब्रियो कोलेरा जीवाणु जो की हैजा के लिए उत्तरदायी होता है पाया गया है।
प्रदूषण नियंत्रक को चेताया था

जिला पंचायत सदस्य सर्वजीत सिंह ने मेहर गांव की शराब फैक्ट्री से जल व वायु प्रदूषण रोकने की मांग और जांच को लेकर 25 अप्रेल को प्रदूषण नियंत्रण क्षेत्रीय अधिकारी को पत्र लिखा था। पत्र में कहा था इस फैक्ट्री की विषैली गैस से मेहर सहित आसपास के गांव कानोनी, मोठी, डहकुली और धोहा में लोग फेफड़ों में जलन की शिकायत कर रहे हैं। वायु में काले कण उड़ते हैं। फैक्ट्री का विषैला अपशिष्ट क्षेत्र के जल को दूषित कर रहा है। सर्वजीत सिंह ने 13 मई को फिर पत्र लिखा था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मेहर सहित आसपास के गांव में शराब फैक्ट्री से वायु व जल प्रदूषण हो रहा है। बार-बार पत्र लिखने के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण के अधिकारी जांच के लिए नहीं पहुंचे। मेहर में सैकड़ों लोग बीमार हुए और 2 लोगों की जान चली गई फिर भी प्रशासन मौन है। कुछ समय पहले भी गांव में कई बच्चों की आंखों में परेशानी हुई थी लेकिन जानकारी देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती।
सर्वजीत सिंह, जिला पंचायत सदस्य।

हमारी प्राथमिकता थी कि गांव के लोग पानी कहां का पी रहे हैं, जिससे डायरिया हुआ है। बोरवेल को चिंहित करने के बाद उसे बंद कराया गया और पर्सनल बोरवेल के पानी को भी सुरक्षित किया गया। फैक्ट्री की जांच हमने नहीं की है।
विजय डेहरिया, एसडीएम।

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