विज्ञापन पॉलिसी हवा, प्रायवेट कंपनियों ने अपने रंग में रंगी शहर की इमारतें

शहर व उपनगर से अवैध होर्डिंग तो हटे, लेकिन प्रायवेट कंपनियों के विज्ञापन पर नहीं दिया ध्यान, शहर में कई जगह होर्डिंग्स हटाने में भी की गई अनदेखी

 

 

सागर. आचार संहिता लगने के बाद अवैध विज्ञापन हटाने पर महीनों तक कार्रवाई की गई, लेकिन इसके बाद भी शहर में जहां-तहां खुलेआम आउटडोर विज्ञापन प्रदर्शित हो रहे हैं। नगर निगम, नगर पालिका मकरोनिया व कैंट बोर्ड ने सड़कों के किनारे लगे होर्डिंग्स को हटाने की कार्रवाई तो की, लेकिन उन बिल्डिंगों पर ध्यान नहीं दिया, जहां पर प्रायवेट कंपनियों ने पूरी की पूरी बिल्डिंग को ही अपने रंग में रंग लिया है। यह स्थिति शहर के मुख्य बाजार से लेकर चौक-चौराहों पर हर जगह नजर आ रही है। इसकी न तो निकायों से अनुमति ली गई है और न ही विज्ञापन प्रदर्शित करने का शुल्क निकाय को मिल रहा है, जबकि मप्र नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा 28 मार्च 2017 को आउटडोर विज्ञापन मिडिया नियम के अनुसार यह सब नियम विरुद्ध है।

संपत्ति स्वामी की है गलती
शहर में जहां पर भी निजी, व्यवसायिक भवनों पर किसी प्रकार के विज्ञापन प्रदर्शित किए जा रहे हैं, उनमें सीधे तौर पर संपत्ति मालिक की गलती मानी जाएगी। नई विज्ञापन पॉलिसी में निजी भवन, भूमि या किसी अन्य प्रकार की संपत्ति पर यदि कोई विज्ञापन प्रदर्शित किया जाता है तो संबंधित संपत्ति के स्वामी को ही निकाय परमिशन देगी, किसी अन्य पार्टी को स्वीकृति नहीं दी जा सकेगी।

कई क्षेत्रों में अब तक टंगे होर्डिंग्स
नगर निगम, नगर पालिका व कैंट बोर्ड के जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण महीनों चली कार्रवाई के बाद भी कई सार्वजनिक स्थानों पर अब भी होर्डिंग्स-फ्लैक्स लगे हुए हैं। यह स्थिति सिविल लाइन चौराहा, तिली चौराहा, कालीचरण तिराहा सहित कई अन्य जगह भी देखी जा सकती है। इसके अलावा निजी भवनों की छतों पर लगे होर्डिंग्स-फ्लैक्स पर तो अतिक्रमण दस्ते ने ध्यान ही नहीं दिया है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक दल व रसूखदार लोगों की अड़ी के चलते कार्रवाई नहीं की गई है।

स्वयं की दुकान के बोर्ड के लिए भी अनुमति
मप्र विज्ञापन पॉलिसी 2017 के अनुसार अब व्यापारी को अपनी दुकान का बोर्ड लगाने के लिए भी संबंधित नगरीय निकाय से अनुमति लेनी होगी, जिसकी समय-सीमा 3 से 10 साल तक के लिए ही वैध होगी। इतना ही नहीं व्यापारी को इसके लिए पहले से ही निकाय द्वारा तय शुल्क भी जमा करना होगा। यदि बिना अनुमति के किसी प्रकार का आउटडोर विज्ञापन लगाया जाता है तो उस पर निकाय कार्रवाई कर हटवा सकती है।

मदन गोपाल तिवारी
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