किसानों से वसूली करने के बाद बैंक में जमा नहीं की ऋण राशि, फर्जी केसीसी भी बनाए

पामाखेड़ी सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक पर आरोप, शिकायत में सहायक प्रबंधक को बताया आठवीं पास और आयोग्य, पूर्व सहकारिता आयुक्त व पूर्व प्रशासक पर संरक्षण और गतल जांच कर बचाने के भी आरोप

सागर. सहकारिता समितियों की नियुक्तियां और उनके द्वारा किसानों के नाम पर किए गए फर्जीवाड़े के मामले केसली-देवरी के बाद अब सागर तहसील में भी सामने आने लगे हैं। सहकारिता विभाग में की गई शिकायत के अनुसार पामाखेड़ी सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक विजय दुबे पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। शिकायत में दुबे को आयोग्य तो ठहराया ही गया है, इसके अलावा उनपर किसानों से फर्जी तरीके से ऋण राशि की वसूली करने और किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर लोन निकालने के आरोप लगाए गए हैं। विभाग द्वारा की जा रही जांच की शुरूआत में ही उन पर लगाए कुछ आरोपों की पुष्टि भी हो रही है। जिसमें उनके द्वारा किसानों से ऋण वसूली करने के बाद संबंधित बैंक शाखा में राशि जमा न करेन की बात शामिल है। समिति द्वारा बरती जा रहीं इन्हीं अनियमितताओं के चलते सोमवार को ही यहां के प्रशासक मोतीलाल कोरी को पद से हटा दिया गया है।

पूर्व उपायुक्त पर भी आरोप
शिकायत में बताया गया है कि पूर्व सहकारिता उपायुक्त पीआर कावड़कर व पामाखेड़ी समिति के पूर्व प्रशासक शशी कुमार दुबे ने राज्य ओपन से 8वीं पास विजय दुबे को विक्रेता से सहायक प्रबंधक के पद पर पदोन्नत कर दिया और 10035 रुपए वेतन बढ़ा दिया। पूर्व में की गई शिकायतों की जांच में भी उपायुक्त कावड़कर ने स्पष्ट रूप से विजय दुबे को बचाया है। उन्होंने जांच में कहा था कि संस्था में कोई कर्मचारी नहीं है, जबकि संस्था में 1992 में नियुक्त विद्याचरण पांडे विक्रेता के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा सहायक पद से पृथक होने के बाद जगदीश गोस्वामी हाइकोर्ट से स्थगन आदेश 1 अगस्त 2018 को ले चुके हैं, लेकिन उनका स्थगन आदेश नहीं माना, क्योंकि मानते तो विजय दुबे को सहाकय प्रबंधक के पद से हटना पड़ता।

यह हैं आरोप
स्थानीय लोगों द्वारा की गई शिकायत में आरोप लगाए हैं कि संस्था में अनैतिक, असंवैधानिक कार्य, गवन-घोटाले, फर्जी नियुक्तियां विजय दुबे द्वारा करवाकर किसानों की समिति व किसानों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। विजय दुबे द्वारा किसानों से वसूली लेकर एक साल तक बैंक में जमा नहीं की जाती है और शिकायत के बाद राशि जमा हो जाती है। किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा है। किसानों के नाम से फर्जी ऋण, खाद-बीज का बिना हस्ताक्षर कराए निकाल लिया गया है। किसानों से कच्ची व बिना रसीदों पर भी वसूली की जा रही है व बैंक में जमा नहीं की जा रहीं हैं, जिससे किसानों के नाम पर बकाया राशि होने के कारण खाद-बीज नहीं मिल रहा है। विजय दुबे पर ऋणमाफी की सूची में भी धांधली, हेराफेरी व कर्ज बड़ाकर अर्नगल लाभ लिया गया है।

जांच चल रही है
शुरूआती जांच में सहायक प्रबंधक दुबे पर लगाए आरोपों की पुष्टि हो रही है। पूर्व में भी शिकायतें हुई हैं, लेकिन जांच को लेकर भी लोग गलत बता रहे हैं। हकीकत क्या है कुछ ही दिनों में जांच में स्पष्ट हो जाएगा।
शिवप्रकाश कौशिक, उपायुक्त, सहकारिता

मदन गोपाल तिवारी
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