एंटी सैटेलाइट मिसाइल देश की सुरक्षा के लिए जरूरी: डॉ. कस्तूरीरंगन

इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन ने पत्रिका से खास बातचीत में कहा, डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि के 28 वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने आए थे

By: आकाश तिवारी

Published: 29 Mar 2019, 08:04 AM IST

सागर. भारत ने एंटी सैटेलाइट मिसाइल तकनीक का परीक्षण कर लिया है। दुनिया ने भारत को कागजी शेर बताया था, लेकिन अब देश चौथी महाशक्ति बन गया है। यह तकनीक अब तक अमरीका, रूस और चीन के पास थी।
यह बात भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कृष्णा कस्तूरीरंगन ने पत्रिका से विशेष बातचीत में कही। वह गुरुवार को डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में २८वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने आए थे।

सवाल- भारत ने एंटी सैटेलाइट मिसाइल तकनीक का परीक्षण किया है। इसे आप किस नजरिए से देखते हैं?
जवाब- यह एक अलग प्रोग्राम है। मेरे हिसाब से यह देश के लिए महत्वपूर्ण घटना थी। विशेषकर देश की सुरक्षा के संबंध में। इस परीक्षण के कई आयाम हैं। भारत ने यह दर्शाया है कि कैसे जटिल तकनीकियों को जोड़कर हम सबसे अलग हैं।

सवाल- डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख डॉ. वीके सारस्वत ने बयान दिया है कि 2012 में केंद्र सरकार ने इसकी अनुमति नहीं थी दी। इसमें क्या सच्चाई है।
जवाब- हंसते हुए... यह मेरे विभाग का मामला नहीं है। आप उनसे ही पूछें।

सवाल: सफलतम परीक्षण करने वाले वैज्ञानिकों के नाम सामने नहीं आए हैं क्यों?
जवाब- टीम वर्क है। इन सभी वैज्ञानिकों के नाम जल्द सामने आएंगे। इसरो अवार्ड देते हैं। कई अवार्ड वैज्ञानिकों को मिलते हैं।

सवाल- अभी इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
जवाब- यह निर्णय सरकार का है। टीम भी डिसाइड करती है, उन्हें यह समय उचित लगा होगा इसलिए परीक्षण किया।

परिचय

कृष्णा स्वामी कस्तूरीरंगन राज्यसभा के सांसद एवं प्रसिद्ध भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं। इन्हें भारत सरकार ने 1992 में विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मभूषण से सम्मानित किया था। ये कर्नाटक से हैं एवं वर्तमान में भारतीय योजना आयोग के सदस्य के रूप में अपनी सेवाए दे रहे हैं।

आकाश तिवारी
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