गन्ने और चांवल के भूसे से तैयार ग्लूकोज से तैयार किया जीव ईंधन, पैट्रोल की खपत कम होने का दावा

- डॉ हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में हुई रिसर्च
एक्सक्लूसिव

सागर. डॉ हरिसिह गौर विवि के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की रिसर्च टीम ने ऐसा जैव ईंधन तैयार करने का दावा किया है, जिससे पैट्रोल की मांग 20 फीसदी बगैर पैट्रोल के पूरी की जा सकती है। दरअसल शोध टीम ने ग्लूकोज तैयार करने के लिए एक फंगस तैयार किया है , जो गन्ने और चांवल के भूंसे से ग्लूकोज बनायेगा। फिर इसे यीस्ट द्वारा एथेनॉल में बदल दिया जाएगा। इसका उपयोग आसानी से पैट्रोल के रूप में किया जा सकता है। वही इंडस्ट्रियल शराब बनाने में भी यह रिसर्च कारगर है।

उदाहरण के तौर पर यदि 100 एमएल पैट्रोल की जरूरत है। उसमें 80 एमएल पैट्रोल रहेगा। 20 एमएल विवि द्वारा तैयार बायो इथेनॉल का उपयोग किया जाएगा। इससे 20 फीसदी पैट्रोल कम उपयोग करना होगा।
-रिसर्च टीम ने तैयार किया फंगस, गन्ने और चांवल के भूसे को बदलता है ग्लूकोज में
विवि के शोधार्थी भानू प्रताप ने अपनी रिसर्च में एक फंगस तैयार किया है। उससे गन्ने और चांवल के भूसे से ग्लूकोज तैयार होगा। फिर इसे यीस्ट द्वारा एथेनॉल में परिवर्तित किया जाता है। शोधार्थी द्वारा तैयार किए गए इस एथेनॉल का उपयोग बायोफ्यूल के रूप में किया जा सकता है।

-2015 में शुरू हुई थी रिसर्च

पैट्रोल-डीजल की खपत लगातार बढ़ रही है। इस वजह से ये ईंधन समाप्त होने की कगार पर है। विवि की रिसर्च टीम ने इसी उद्देश्य से वर्ष 2015 में इस विषय पर रिसर्च शुरू की। आमतौर पर गन्ने और चांवल के भूसे का उपयोग कुछ नही रहता। पैट्रोलियम पदार्थ के लिए इन वेस्ट चीजों का उपयोग रिसर्च के रूप में लिया गया जो कारगर रहा है।

-इन जर्नल्स में हो चुका प्रकाशन

जानकारी के मुताबिक यह रिसर्च तीन बड़े पेपर में पब्लिश हो चुकी है। जिनमे रिनिवेबल एनर्जी, बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी, बायोमास एवं बायोरिफिनारी आदि शामिल है।

 

दुनिया में पेट्रोलियम पदार्थ की खपत बहुत तेजी से बढ़ रही है। यह चिंता का विषय है। हमारे विभाग ने रिसर्च के जरिए जैव ईंधन बनाया है। इसके उपयोग से पेट्रोल में की मात्रा बढ़ेगी। पैट्रोल की खपत कम होगी।

प्रो नवीन कांगो, विभाग अध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी विवि

आकाश तिवारी
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