गोलमाल : ऐसे तो निकल आएगा बीएससी का चादर घोटाला, पढ़ें पूरी खबर

गोलमाल : ऐसे तो निकल आएगा बीएससी का चादर घोटाला, पढ़ें पूरी खबर

Aakash Tiwari | Publish: Feb, 15 2018 12:19:05 PM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

डेढ़ महीने पहले ढाई हजार नई चादरें खरीदी गई थीं, लेकिन इनका उपयोग अभी तक नहीं किया गया है।

सागर. बीएमसी के प्रकरण भी ठीक प्याज की परत की तरह एक-एक कर सामने आ रहे हैं। अब फटी-पुरानी चादरों की धुलाई के मामले में एक नया खुलासा हुआ है। बताया जाता है कि डेढ़ महीने पहले ढाई हजार नई चादरें खरीदी गई थीं, लेकिन इनका उपयोग अभी तक नहीं किया गया है।
फटी पुरानी चादरों की सफाई का प्रकरण संज्ञान में आने के बाद अफसरों को याद आया कि अरे, अस्पताल में ढाई हजार नई चादरों की खरीद कराई गई थी। यदि चादरें खरीदीं गईं थीं तो वह गूलर का फूल क्यों बन गईं। इस मामले में डीन डॉ. जीएस पटेल ने अधीक्षक से जवाब तलब कर लॉन्ड्री प्रभारी और ठेकेदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।
पत्रिका ने बुधवार को शीर्षक 'फटी-पुरानी चादरों की धुलाई में खर्च कर डाले ४४ लाख Ó नाम से खबर प्रकाशित की थी। खबर के बाद डीन डॉ. पटेल ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने धुलाई मामले में गड़बड़ी होने की आशंका भी जताई और मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

ये होना चाहिए वार्डों में
बीएमसी में २६ वार्ड हैं। प्रत्येक में मरीजों की चादरों के लिए व्यवस्था की गई है। इसमें तीन चादरें एक पलंग के लिए हैं। एक चादर गंदी होने पर उसे धुलने देना है। वहीं दूसरी चादर तुरंत पलंग पर बिछाना है। तीसरी चादर वार्ड प्रभारी के पास होती है। लेकिन देखा जा रहा है कि इस व्यवस्था का पालन नहीं हो रहा है।

नहीं होती मॉनीटरिंग
लॉन्ड्री में डिटर्जेंट का सही इस्तमाल चादरों व ओटी से निकलने वाले कपड़ों में हो रहा है या नहीं इसकी भी मॉनीटरिंग नहीं होती। जानकारी के अनुसार लॉन्ड्री का ठेका ४५० चादरों के अनुसार हुआ था, लेकिन मर्जर के बाद करीब ६ सौ चादरों की धुलाई हो रही है। डेढ़ महीने पहले प्रबंधन ने सौ पलंग के साथ नई चादरें खरीदी थीं। यह चादरें अभी तक उपयोग के लिए नहीं निकाली गई हैं।

डेढ़ महीने पहले ढाई हजार चादरें खरीदीं थीं। इनका उपयोग क्यों नहीं किया गया, इस बारे में अधीक्षक से जवाब मांगा है। फटी पुरानी चादरों की धुलाई के संबंध में लॉन्ड्री प्रभारी और ठेकेदार को नोटिस देने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. जीएस पटेल, डीन, बीएमसी

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