बीना में मुकदमा और भोपाल में सुनवाई, जंक्शन पर रेलवे कोर्ट की जरूरत

सरकार व हाईकोर्ट भेजा जा चुका है प्रस्ताव

By: sachendra tiwari

Published: 21 Aug 2021, 08:09 PM IST

बीना. पश्चिम मध्य रेलवे के सबसे बड़े जंक्शन में शामिल बीना स्टेशन पर रेलवे कोर्ट की जरूरत है, क्योंकि बढ़ती ट्रेनों के साथ ही अपराधों की संख्या भी बढ़ रही है। यहां कोर्ट शुरू कराने अधिवक्ता संघ वर्ष 2001 से लगातार प्रयास कर रहा है। इस संबंध में करीब चार बार प्रस्ताव भी भेज चुकी, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। एसोसिएशन ने पिछले दिनों हाईकोर्ट और मुख्यमंत्री को इस संबंध में स्मरण पत्र लिखकर यहां की स्थिति से अवगत कराया था।
रेलवे कोर्ट नहीं होने से सैकड़ों पक्षकारों को भोपाल, जबलपुर जाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इनका धन, समय दोनों खर्च होता है। चलती ट्रेनों और रेलवे ट्रैक पर होने वाले अपराधों पर सुनवाई के लिए अधिवक्ताओं और पक्षकारों को भोपाल, जबलपुर जाना पड़ता है, शहर से इनकी दूरी क्रमश: 145 व 350 है। पक्षकारों का मानना है कि अगर बीना में रेलवे कोर्ट खुल जाएं, तो आसपास के शहरों के लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय जल्दी मिलने लगेगा।
कोर्ट खोलने अभी तक ये किए गए प्रयास
बीना अधिवक्ता संघ वर्ष 2001 में रेलवे कोर्ट का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इसके साथ ही डीआरएम कार्यालय भोपाल और जीएम कार्यालय जबलपुर भी यह प्रस्ताव भेजकर बीना में रेलवे कोर्ट की मांग रखी थी। उसके बाद वर्ष 2008 से लगातार प्रयास किए। वर्ष 2014 में हाईकोर्ट जज एसके सेठ बीना आए थे, उस समय भी बार एसोसिएशन ने उन्हें मांग पत्र सौंपा था। उसके बाद उन्हें स्मरण पत्र भी भेजा गया, लेकिन आज तक हाईकोर्ट व सरकार की तरफ से स्वीकृति नहीं मिली है। अब हाईकोर्ट और शासन से स्वीकृति मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
वर्तमान में यह होती परेशानी
रेलवे ट्रेनों या ट्रैक पर अपराधों में शहर का यदि कोई व्यक्ति पकड़ा जाता है, तो उसे 145 किमी दूर भोपाल जाना पड़ता है, इससे उसका पूरा दिन खराब होता है। वहीं मालखेड़ी स्टेशन के पास यदि कोई पकड़ा जाता है, तो उसे जबलपुर पेशी के लिए जाना पड़ता है, इससे उसके दो दिन खराब होते है।
स्टेशन पर ही थी पहले अस्थाई कोर्ट
रेलवे अपराधों की सुनवाई के लिए करीब पंद्रह वर्ष पहले तक स्टेशन पर दो नंबर प्लेटफॉर्म पर स्थित एक कमरे में अस्थाई कोर्ट संचालित होती थी, जहां पर अपराधों की सुनवाई के लिए भोपाल से मजिस्ट्रेट आते थे, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे सुनवाई बंद हो गई और वह अस्थाई कोर्ट भी बंद कर दिया गया। सभी प्रकार की भौगौलिक स्थिति को देखते हुए बीना में रेलवे कोर्ट की जरूरत अब है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिलने से सभी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
रेलवे कोर्ट में अपराधों की श्रेणियां
- रेल पटरी पार करना।
- महिला कोच, विकलांग कोच में यात्रा।
- ट्रेनों के भीतर अवैध वेंडरिंग।
- नो पार्किंग जोन का उल्लंघन।
- ट्रेनों में कचरा व गंदगी करना।
- रेल संपत्ति की चोरी करना।
बीस वर्ष से कर रहे हैं प्रयास
न्यायिक लाभ लोगों आसानी से मिल सके इसके लिए करीब बीस वर्ष से रेलवे कोर्ट स्थापित करने की मांग बार एसोसिएशन की ओर से की जा रही है, जिसमें हाईकोर्ट व सरकार को कई बार प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है, जिसमें अभी तक स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
अशोक जैन, अधिवक्ता संघ, पूर्व अध्यक्ष

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