लाल चकत्ते दिखते ही मवेशी हो रही बीमार, पशु चिकित्सक नहीं दे रहे ध्यान

एक से दूसरे मवेशी में फैल रहा है यह रोग

By: sachendra tiwari

Published: 10 Sep 2021, 09:35 PM IST

बीना. शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों मवेशियों को एक रोग हो रहा है, जिसमें वह बीमार हो जाते हैं। यह बीमारी एक मवेशी से दूसरे मवेशी को फैल रही है और इसका इलाज भी कुछ नहीं है। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा भी अभी इस संबंध में कोई ज्यादा जानकारी नहीं दी जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अभी यह बीमारी ज्यादा फैली है, जिसमें मवेशियों को छोटे-छोटे लाल चकत्ते दिखते हैं और फिर वह बीमार हो जाते हैं, जिससे चरना भी छोड़ देते हैं। यदि यह चकत्ते पैर में हो जाते हैं तो चलना भी मुश्किल हो रहा है। पशुपालक बाजार से दवाएं लेकर मवेशियों का इलाज करा रहे हैं, क्योंकि पशु चिकित्सा विभाग द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पशुपालकों का कहना है कि यदि मवेशी ज्यादा गंभीर जाते हैं तो उनकी मौत भी हो जाती है। इस प्रकार की बीमारी मवेशियों में पहली बार देखी गई है। पहले बरसात में सिर्फ बेखरा रोग ज्यादा होता था, जिसका इलाज पशुपालकों के पास रहता है, लेकिन इसका इलाज भी पता नहीं है और मेडिकल से एंटीवायोटिक व दर्द की दवाएं खिला रहे हैं। इंदर सिंह ने बताया कि पशु चिकित्सा विभाग द्वारा न तो वैक्सीन लगाई जा रही है और न इस बीमारी का कोई इलाज बताया जा रहा है, जिससे मेडिकल से दवाएं लाकर खिला रहे हैं। इस ओर अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है नहीं तो संक्रमण ज्यादा फैल सकता है।
बारिश के कारण होती हैं बीमारी
पशु चिकित्सक डॉ. विजया तिवारी ने बताया कि बारिश के कारण मवेशियों को बीमारियां होती हैं। मौसमी बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीनेशन किया जा रहा है। जिसमें गले की बीमारी, छोटे बछड़ों में होने वाला रोग ब्लैक क्वाटर और खुर पका की वैक्सीन लगाई जा रही है। लगभग सभी मवेशियों को वैक्सीन लगने वाली है। चकत्ते पडऩे वाली बीमारी भी मौसम के कारण हो सकती है।
मवेशियों को बन रहे गहरे घाव
सेमरखेड़ी और आसपास के गांव में मवेशियों में चकत्ते गहरे घाव होने की बीमारी फैल रही है और मवेशी भूसा तक नही खा पाते है और न ठीक से चल पा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में यह रोग महामारी की तरह फैला है। इस संबंध में आगासौद में पदस्थ पशु चिकित्सक डॉ. सोनल श्रीवास्तव ने बताया यह रोग एक प्रकार की मक्खी के काटने से फैलता है और पहले गोल घेरा बनता है फिर घाव बन जाता है। एंटीवायोटिक दवाओं से यह ठीक हो जाता है। प्रदेश सरकार द्वारा पशु धन संजीवनी योजना लागू की है, जिसमें टोल फ्री नंबर 1962 पर फोन करके मवेशी की जानकारी ली जाती है और पास के पशु चिकित्सक घर आकर फ्री दवा करते हैं।

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sachendra tiwari Reporting
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