13 अप्रेल से शुरू हो रहीं हैं चैत्र नवरात्रि, घोड़े पर सवार होकर आएंगी माता

- नवरात्रि के साथ शुरु होगा नवसंवत्सर 2078

By: Atul sharma

Published: 06 Apr 2021, 11:05 AM IST

सागर. पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि 13 अप्रेल से शुरू होने वाली हैं, ये पर्व 22 अप्रेल तक चलेगा। सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। कुल चार तरह के नवरात्रि मनायी जाती है। वहीं इसी दिन से हिंदुओं का नया साल यानि नवसंवत्सर 2078 शुरु होगा, जिसका नाम राक्षस है। इस नवसंवत्सर के राजा और मंत्री दोनों ही मंगल रहेंगे।नवरात्रि का त्यौहार साल में चार बार मनाया जाता है, जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि मुख्य माने जाते हैं। वहीं माघ और आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती हैैं। नवरात्रि पर मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। वहीं नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना भी की जाती है।

घोड़े पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
इस बार चैत्र नवरात्रि का आरंभ मंगलवार के दिन से होगा जिसकी वजह से मां घोड़े पर सवार होकर आएंगी। इससे पहले शारदीय नवरात्रि पर भी मां घोड़े पर सवार होकर आई थीं। देवी मां जब भी घोड़े पर आती हैं तो युद्ध की आशंका बढ़ जाती है। सभी नवरात्रि यानि चैत्र, शारदीय, माघ और आषाढ़ नवरात्रि में विशेष रूप से मां दुर्गा के सभी 9 स्वरूपों की अलग-अगल दिन पूजा का महत्व होता है। ऐसे में इस चैत्र नवरात्रि में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि की पूजा-अर्चना की जाएगी।


प्रतिपदा तिथी पर होगी घटस्थापना
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। माना जाता है कि विधि-विधान से कलश स्थापना करने से मां भक्तों के सारे कष्ट दूर करती हैं। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है जिसे कलश स्थापना भी कहते हैं। पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाला नवरात्रि का पर्व आरंभ हो जाता है। पहले दिन में विधि-विधान से घटस्थापना करते हुए भगवान गणेश की वंदना के साथ माता के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा, आरती और भजन किया जाता है।

चैत्र नवरात्रि की तिथियां
13 अप्रैल- नवरात्रि प्रतिपदा- मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
14 अप्रैल- नवरात्रि द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी पूजा
15 अप्रैल- नवरात्रि तृतीया- मां चंद्रघंटा पूजा
16 अप्रैल- नवरात्रि चतुर्थी- मांकुष्मांडा पूजा
17 अप्रैल- नवरात्रि पंचमी- मां स्कंदमाता पूजा
18 अप्रैल- नवरात्रि षष्ठी- मां कात्यायनी पूजा
19 अप्रैल- नवरात्रि सप्तमी- मां कालरात्रि पूजा
20 अप्रैल- नवरात्रि अष्टमी- मां महागौरी
21 अप्रैल- नवरात्रि नवमी- मां सिद्धिदात्री , रामनवमी
22 अप्रैल- नवरात्रि दशमी- नवरात्रि पारणा

घट स्थापना विधि
- चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा तिथि को सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- लाल वस्त्र, अक्षत, पुष्प, धूप, दीपक, नैवेद्य, पुष्पांजलि आदि के माध्यम से देवी के स्‍थान को सुसज्जित करें।- इसके बाद गणपति और मातृका की पूजा भी करके घट या कलश स्थापना करें।
- अब नौ देवियों की आकृति बनाने के लिए लकड़ी के पटरे पर पानी में गेरू घोलें।
- इसके अलावा सिंह वाहिनी दुर्गा की प्रतिमा भी स्थापित कर सकते हैं।
- एक कलावा लपेटें और गणेश स्वरूप में कलश पर उसे विराजमान करें।
- घट के पास गेहूं या जौ का पात्र रखें।
- अब वरुण पूजन और मां भगवती का विधि-विधान से आह्वान करें।
- मां दुर्गा का आवाहन पूजन करें।

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