इस तरह से हो सकता है ट्रैफिक में सुधार, गड़बड़ी की उम्मीद भी नहीं होगी

इस तरह से हो सकता है ट्रैफिक में सुधार, गड़बड़ी की उम्मीद भी नहीं होगी

govind agnihotri | Publish: Sep, 07 2018 11:12:25 AM (IST) | Updated: Sep, 07 2018 11:12:26 AM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

सामाजिक सख्ती के बिना अधूरी है ट्रैफिक के प्रति पुलिस की जागरुकता

 

सागर. सड़क पर चलने के नियमों के प्रति जागरुकता की अलख जगाती ट्रैफिक पुलिस की सख्ती बेहतर प्लानिंग के अभाव में लगभग बेअसर साबित हो रही हैं। तीन माह पहले चलाए गए सड़क सुरक्षा सप्ताह की जो स्थिति हुई वैसा ही हाल तीसरे दिन पुलिस के जागरुकता अभियान का दिख रहा है। पिछले कई बार मुहिम चलाए जाने बाद भी स्कूल- कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की रुचि भी लाइसेंस लेकर ड्राइविंग करने के प्रति नहीं बढ़ी है। अनाधिकृत रूप से सड़कों पर बेकाबू रफ्तार से ड्राइविंग करते युवा लगातार हादसों की चपेट में आ रहे हैं लेकिन लोगों में भी ट्रैफिक के नियमों को जानने-समझने व उनका पालन करने की फुरसत नहीं है।

साल में हजार विद्यार्थियों ने भी नहीं बनवाए
ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग लगातार अनाधिकृत ड्राइविंग को रोकने के लिए सख्ती बरत रहा है लेकिन इसका असर सड़क और लाइसेंस के आंकड़ों पर नजर नहीं आ रहा है। लगातार अपील करने व मुहिम के बावजूद पिछले एक साल में आरटीओ कार्यालय में लाइसेंस बनवाने वाले विद्यार्थियों का आंकड़ा हजार के आसपास नहीं पहुंचा। जबकि पिछले दिनों आरटीओ द्वारा कई स्कूल-कॉलेजों में कैंप भी लगवाए गए थे।

हादसों की संख्या में भी नहीं आई गिरावट

ट्रैफिक के नियमों की अनदेखी करने के कारण होने वालीे दुर्घटनाओं में पिछले साल करीब ४०० लोगों ने अपनी जान गवां दी थी। जिले की सड़कों पर ब्लैक स्पॉट से कई गुना ज्यादा सड़क हादसे शहरी क्षेत्र की सड़कों पर हुए और इनमें जान गवांने वालों में १७ से ३५ वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं की संख्या 70 फीसदी से भी ज्यादा थी। और इनमें शराब पीकर ड्राइविंग करने वालों का आंकड़ा भी 50 फीसदी से ऊपर रहा था। इस वर्ष भी शुरूआती सात महीनों में सड़क हादसों के जो आंकड़े सामने आए हैं वे पिछले साल से ज्यादा हैं।

जुर्माना-अपील नहीं समाधान, निगरानी की जरूरत
डीएसपी ट्रैफिक संजय खरे का कहना है कि पुलिस अपने दायरे में रहकर लगातार हादसों की संख्या में कमी लाने और लोगों को ट्रैफिक के नियमों का पालन करने के लिए जागरुक बनाने के लिए समझाइश और कार्रवाई दोनों काम कर रही है। लेकिन केवल इतना ही पर्याप्त नहीं है। ट्रैफिक के नियमों की अनदेखी स्वयं वाहन चालक और सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की जान को खतरे में डालती है। इसलिए इसके लिए सामाजिक स्तर पर पहल भी होनी चाहिए। अभिभावक अपने बच्चों को बिना लाइसेंस और ड्राइविंग सेंस के वाहन न चलाने दें। हो सकता है इसमें स्कूल-ट्यूशन जाने या घर की किसी बड़ी जरूरत के समय दिक्कत आए लेकिन उनकी जान को खतरा नहीं होगा। शैक्षणिक संस्थाओं में भी नाबालिग बच्चों को बाइक-स्कूटर ड्राइविंग के प्रति हतोत्साहित किया जाना चाहिए और साथ ही नियम अनुरूप ड्राइविंग की शिक्षा दिया जाना जरूरी है।

फैक्ट फाइल
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