सिविल अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्र शोपीस बनकर रह गए, मरीज परेशान

सिविल अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्र शोपीस बनकर रह गए, मरीज परेशान

Hamid Khan | Publish: Oct, 14 2018 12:27:30 PM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

9 साल बाद भी बीएमसी में शुरू नहीं हो सका सुपर स्पेशलिटी ट्रीटमेंट, रेफर हो रहे मरीज

सागर (आकाश तिवारी). संभागीय मुख्यालय में लंबे अरसे से चल रही सरकारी स्वास्थ्य संस्थाएं आज भी अन्य संभागों की तुलना में काफी पिछड़ी हुई हैं। संभागभर से रोजाना सैकड़ों गंभीर मरीज जिले से बाहर इलाज कराने जा रहे हैं। मुख्यालय से भी रोजाना भोपाल, इंदौर, जबलपुर के लिए मरीज रेफर हो रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह संभागीय मुख्यालय पर सुपर स्पेशियलिटी ट्रीटमेंट की अनदेखी है।
वैसे तो इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन इस व्यवस्था बनाने के लिए जिम्मेदार जनप्रतिनिधि आगे नहीं आ रहे हैं। 9 साल पुराना हो चुका बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज अभी भी अपने अस्तित्व में नहीं आ पाया है। यहां सुपर स्पेशलिटी ट्रीटमेंट के नाम पर सिर्फ मरीजों को रेफर किया जाता है। प्रदेश के 7 अन्य मेडिकल कॉलेजों की तुलना में अभी भी बीएमसी उपचार के मामले में प्रदेश में 5वे नंबर पर ही है।
मरीजों को इन सुविधाओं की है दरकार
ट्रामा यूनिट
प्रदेश के 31 जिलों में ट्रामा यूनिट शुरू होना थी। इनमें से 30 जिलों में यह सेवा शुरू हो चुकी है, लेकिन सागर एक एेसा जिला है, जहां दो करोड़ की लागत से भवन तो बन चुका है, लेकिन अभी तक उपकरणों और विशेषज्ञों की तैनाती नहीं हुई है। यहां रात को आने वाले गंभीर मरीज आंख बंद कर बीएमसी रेफर कर दिए जाते हैं।
न्यूरो सर्जरी और कॉर्डियोलॉजी यूनिट
सड़क हादसों में सिर पर चोट लगने से गंभीर रूप से घायल होने वाले मरीज 108 एम्बुलेंस से बीएमसी पहुंचते हैं, लेकिन यहां पर सुपर स्पेशियलिटी ट्रीटमेंट की व्यवस्था न होने से भोपाल रेफर किया जाता है। बीएमसी में न्यूरो सर्जरी और कॉर्डियोलॉजी यूनिट नहीं है। ब्रेन, हार्ट से संबंधित मरीज भी सीधे बाहर रेफर किए जाते हैं।
रेडियोथैरेपी यूनिट
कैंसर के मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। बीएमसी में कैंसर के मरीजों का उपचार तो होता है। इस दौरान कुछ छोटी बड़ी सर्जरी भी हो जाती है। गंभीर मरीज बाहर भी इलाज के लिए जाते हैं, लेकिन यहां जिन कैंसर मरीजों द्वारा सर्जरी कराई जाती है, उन्हें सिकाई के लिए अभी भी बाहर जाना पड़ता है। असल में यहां पर रेडियोथैरपी यूनिट नहीं है। प्रदेश के 5 मेडिकल कॉलेज में रेडियोथैरपी यूनिट है, लेकिन बीएमसी में 9 साल बाद भी यह यूनिट शुरू नहीं हो पाई है। ड्रीम प्रोजेक्ट में इसे शामिल किया गया है, लेकिन अभी इसकी फाइल ठंडे बस्ते में ही रखी हुई है।
एक्सपर्ट-व्यू
स्पेशियलिटी ट्रीटमेंट की व्यवस्था बेहद जरूरी है। गंभीर मरीजों को यदि समय पर उपचार न मिले से उनकी जान भी चली जाती है। स्वास्थ्य अधिकारी तो अपने स्तर पर इनकी मांग करते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधियों को भी इसमें ध्यान देने की जरूरत है। जहां तक ट्रामा यूनिट की बात है तो यह अब तक क्यों नहीं शुरू हो पाई यह एक बड़ा सवाल है।
डॉ. अरुण सराफ, सेवानिवृत्त सिविल सर्जन
डॉक्टरों की कमी बनी हुई। इसके पीछे बड़ी वजह सरकारी वेतन कम दिए जाना है। शासन को चाहिए कि डॉक्टरों का वेतन बढ़ाया जाए ताकि सरकारी अस्पतालों में यह अपनी सेवाएं दे सकें। इसके अलावा नियमों में भी ढील दिए जाना जरूरी है। किडनी, डायबिटीज, थायराइड जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। सागर में सुपरस्पेशिलिस्ट का होना बेहद जरूरी है।
डॉ. दिवाकर मिश्रा, रिटायर्ड ज्वाइन डायरेक्टर हेल्थ

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