महिलाओं ने की वट पूजा, यह है वट सावित्री व्रत का पौराणिक महत्व

इस साल संयोग ऐसा बना है कि इसी दिन शनि जयंती व स्नान, दान अमावस्या थी।

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Published: 16 May 2018, 05:21 PM IST

सागर. सुहाग की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने मंगलवार को वट सावित्री व्रत रखा। इस साल संयोग ऐसा बना है कि इसी दिन शनि जयंती व स्नान, दान अमावस्या थी। महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा अर्चना की। बरियाघाट पर भी महिलाएं पूजन करने की लिए पहुंची। वट वृक्ष की पूजा कर रहीं रानी ठाकुर ने बताया कि यह व्रत सत्यवान सावित्री से जुड़ा हुआ है।
विवाहित महिलाओं ने वट वृक्ष पर जल अर्पण किया और हल्दी का तिलक, सिंदूर और चंदन का लेप लगाया। इस व्रत के पूजन के दौरान पेड़ को फल-फूल अर्पित करने की भी मान्यता है। इसके
बाद 108 बार वट वृक्ष की परिक्रमा की।
गौरी लखेरा ने बताया कि बचपन से मां को यह व्रत करते देख रहे थे और आज यह मौका मेरे जीवन में भी आया। इस मौके पर अनुराधा लखेरा, ऊषा चौरसिया, ममता चौरसिया, संध्या गुप्ता भी मौजूद रहीं। पं. शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि माना जाता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस ले लिया था। इस दिन महिलाएं सुहाग से जुड़ा हर शृंगार करती हैं।

Coincidence of Sarvartha Siddhi Yoga
IMAGE CREDIT: Coincidence of Sarvartha Siddhi Yoga

शनिदेव की अराधना के लिए सजा फूल बंगला
सागर. न्याय के देवता शनिदेव की जयंती पर मंगलवार को सर्वार्थ सिद्धि योग ?, वट सावित्री अमावस्या एवं भौमवती अमावस्या का भी संयोग रहा। शनि मंदिरों में सुबह से भक्तों का तांता लग गया। शनि पीड़ा तेलाभिषेक कर शनि पीड़ा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। कबूलापुल स्थित शनिदेव मंदिर में फू ल बंगला के विशेष दर्शन हुए। यहां इंदौर से आए कलाकारों ने चंपा और चमेली के फूलों से फूल बंगले को सजाया। सुबह से दीपों से भगवान शनिदेवी की आरती हुई और १००० सहस्त्र नामों से आहुती भी दी गई। भंडारे की शुरूआत सुबह से हुई जो देर शाम तक चलता रहा। भाजपा के जिला महामंत्री शैलेष केशरवानी ने बताया कि खीर-पुड़ी की प्रसादी का वितरण भी किया गया। इस मौके पर हनुमान सागर सेवा समिति द्वारा हनुमान चालीसा वितरित किया गया।
सिद्धधाम मंदिर में अनुष्ठान -पहलवान बब्बा मंदिर स्थित शनि देव सिद्धधाम में सुबह 5 बजे से तेलाभिषेक किया गया। पंचांग पूरन और सुबह 6.30 से हवन की पूर्णाहुति हुई। शाम 7 बजे महाआरती एवं भोग लगाया। यज्ञाचार्य रुपेश शास्त्री ने बताया कि हवन सामग्री भक्तों को नि:शुल्क दी गई। इस मौके पर भक्तजनउपस्थित रहे।
रिमझिरिया में कन्या भोज - शनि समिति रिमझिरिया द्वारा गोवर्धन प्रांगण स्थित शनि मंदिर में कन्या भोज का आयोजन किया गया। ज्योतिषियों के अनुसार शनि जयंती पर शनि देव के दर्शन करने, शनि देव को तेल चढ़ाने से साढ़े साती और शनि पीड़ा से शांति मिलती है।

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