खंडहर हो चुके क्वाटरों में रहने के लिए मजबूर कोरोना योद्धा

पर्याप्त पुलिस क्वाटर न होने से जर्जर भवन में रह रहे पुलिसकर्मी

By: anuj hazari

Published: 29 Jun 2020, 09:00 AM IST

बीना. शहर में शांति व्यवस्था के लिए एक पुलिस थाना व दो पुलिस चौकियां हैं। जहां पर पदस्थ पुलिसकर्मियों के लिए पर्याप्त पुलिस क्वाटर न होने के कारण वह थाने के सामने बनी जर्जर पुलिस लाइन में रहने के लिए मजबूर हैं। दिन-रात लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी सेवाएं देने वाले पुलिसकर्मियों के लिए शासन की ओर पर्याप्त सुविधाएं न मिल पाना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। विषम परिस्थितियों में भी कर्तव्य का पालन करने वालों के लिए परिवार सहित जर्जर क्वाटरों में रहना पड़ रहा है। यदि उन्हें रहने के लिए शासन की ओर न तो पर्याप्त क्वाटर बनवाए है न ही उनका मेंटेनेंस करवाया है। इस तरह से पुलिसकर्मी जब नौकरी करते हैं तो पुलिसकर्मियों का मनोबल गिरना लाजमी है।
धराशाही होने की स्थिति में करीब 15 क्वाटर
पुलिस थाने के पास बनी पुलिस लाइन अंग्रेजों के जमाने की बताई जाती है। जहां पर 20 से ज्यादा पुलिस जवान परिवार सहित रहते हैं। जिन्हें रात-दिन मौत का खतरा मंडराता रहता है, लेकिन मजबूरी के मारे पुलिसकर्मी शहर में किराए से महंगे मकान मिलने के कारण इन्हीं जर्जर क्वाटर में रहने के लिए मजबूर हैं। इनमें से पांच क्वाटर अतिजर्जर हैं जो किसी भी दिन ढह सकते हैं। जिस जमाने में लोग टाइल्स और मार्बल के मकानों व सर्वसुविधायुक्त शासकीय क्वाटरों में रह रहें है वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मी गोबर की लिपाई वाले क्वाटरों में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
नई पुलिस लाइन के क्वाटर भी जर्जर
पुलिसकर्मियों के लिए तहसील के पीछे बने 34 क्वाटरों का निर्माण करीब 23 साल पहले किया गया था, जिनके घटिया निर्माण होने से यह जर्जर हो चुके हैं। जिस बजह से यह भी गिरने की कगार पर है, लेकिन कई साल गुजर जाने के बाद नए क्वाटर बनाना तो दूर की बात, पुराने क्वाटरों का मेंटेनेंस तक नहीं किया है। क्वाटरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं है। जिन्हें पुलिसकर्मियों के लिए स्वयं के खर्चे पर ही मेंटेनेंस कार्य कराना पड़ता है।

anuj hazari Reporting
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